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समस्तीपुर रेल मंडल के लोको पायलटों की बहादुरी, पटरी पर लेटे लोगों की बचाई जान, DRM ने किया सम्मानित

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समस्तीपुर रेल मंडल के लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों ने अपनी सूझबूझ और मानवता का परिचय देते हुए पटरी पर लेटे लोगों की जान बचाई। DRM ज्योति प्रकाश मिश्रा ने सराहना पत्र देकर सम्मानित किया।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर: भारतीय रेल में लोको पायलट की जिम्मेदारी सिर्फ ट्रेन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित पहुंचाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि कई बार उनकी सतर्कता और तत्काल निर्णय किसी की जिंदगी बचाने का कारण बन जाती है। समस्तीपुर रेल मंडल के कुछ लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों ने हाल में ऐसी ही मिसाल पेश की है, जहां उन्होंने अपनी ड्यूटी निभाने के साथ-साथ मानवता का परिचय देते हुए कई लोगों की जान बचाई।

ट्रेन संचालन के दौरान बेहद कम समय में सही फैसला लेना लोको पायलट के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। तेज गति से चल रही ट्रेन को अचानक रोकना आसान नहीं होता, लेकिन समस्तीपुर मंडल के रेलकर्मियों ने अपनी सूझबूझ, अनुभव और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की और संभावित हादसों को टाल दिया।

इन सराहनीय कार्यों को देखते हुए समस्तीपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री ज्योति प्रकाश मिश्रा ने संबंधित लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि रेलकर्मियों की सजगता और संवेदनशीलता भारतीय रेल की सेवा भावना को दर्शाती है।

मां और बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए लगाया इमरजेंसी ब्रेक

पहली घटना 22 जून 2026 की है। समस्तीपुर से सहरसा जाने वाली सवारी गाड़ी संख्या 63346 अपने निर्धारित मार्ग पर चल रही थी। इसी दौरान सलौना और इमली स्टेशन के बीच लोको पायलट अभय कुमार और सहायक लोको पायलट जय प्रकाश कुमार-1 की नजर रेलवे ट्रैक पर पड़ी।

उन्होंने देखा कि एक महिला अपने बच्चे के साथ पटरी पर लेटी हुई थी। स्थिति बेहद गंभीर थी और ट्रेन लगातार आगे बढ़ रही थी। लोको पायलट ने बिना समय गंवाए तुरंत आपातकालीन ब्रेक लगाया और ट्रेन को सुरक्षित दूरी पर रोक लिया।

ट्रेन रुकने के बाद दोनों रेलकर्मी इंजन से नीचे उतरे और महिला को समझाकर ट्रैक से हटाया। उन्होंने आसपास मौजूद ग्रामीणों की मदद से महिला और बच्चे को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। इसके बाद रेलवे ट्रैक की जांच करने और स्थिति सामान्य होने के बाद ही ट्रेन को आगे रवाना किया गया।

इस घटना में लोको पायलट की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया और एक मां-बच्चे की जिंदगी सुरक्षित बच गई।

मासूम बच्चे के लिए देवदूत बने रेलकर्मी

दूसरी घटना 1 मई 2026 को सामने आई थी। रक्सौल से दरभंगा जाने वाली सवारी गाड़ी संख्या 75230 अपने मार्ग पर थी। इसी दौरान ढेंग और रीगा स्टेशन के बीच चालक दल को रेलवे ट्रैक पर एक बच्चा दिखाई दिया।

ट्रेन की गति अधिक थी, लेकिन लोको पायलट पंकज कुमार और सहायक लोको पायलट श्रवण कुमार शर्मा ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाया।

समय रहते ट्रेन रुक गई और बच्चे की जान बच गई। रेलकर्मियों ने बच्चे को सुरक्षित ट्रैक से हटाया और आवश्यक कार्रवाई की। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि रेलवे कर्मचारियों की सतर्कता कई बार बड़ी दुर्घटनाओं को रोक देती है।

मालगाड़ी चालक दल ने भी दिखाई मानवीय संवेदना

तीसरी घटना 22 मई 2026 की है। जब लोको पायलट मनोज कुमार-2 और सहायक लोको पायलट मनी भूषण कुमार एक मालगाड़ी लेकर जा रहे थे। मालगाड़ी का वजन अधिक होने के कारण उसे अचानक रोकना और भी कठिन होता है, लेकिन चालक दल ने खतरे को देखते हुए तुरंत फैसला लिया।

उन्होंने देखा कि एक महिला रेलवे ट्रैक पर लेटी हुई थी। आशंका थी कि महिला आत्मघाती कदम उठाने के उद्देश्य से वहां पहुंची थी। लोको पायलट और सहायक लोको पायलट ने तुरंत ब्रेक लगाकर मालगाड़ी को रोका।

इसके बाद दोनों रेलकर्मी नीचे उतरे और महिला को समझा-बुझाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। उन्होंने स्थानीय लोगों को बुलाकर महिला को उनके सुपुर्द किया और ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही मालगाड़ी को आगे बढ़ाया।

रेलकर्मियों की सजगता बनी समाज के लिए प्रेरणा

रेलवे में काम करने वाले लोको पायलटों को हर पल सतर्क रहना पड़ता है। ट्रेन संचालन के दौरान छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में जब कोई रेलकर्मी अपनी जिम्मेदारी से आगे बढ़कर किसी की जिंदगी बचाता है तो यह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन जाता है।

समस्तीपुर रेल मंडल के इन रेलकर्मियों ने यह साबित किया है कि रेलवे कर्मचारी केवल तकनीकी जिम्मेदारियां निभाने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर वे मानव जीवन की रक्षा के लिए भी पूरी संवेदनशीलता के साथ आगे आते हैं।

मंडल रेल प्रबंधक द्वारा सम्मानित किए गए इन लोको पायलटों की कार्यशैली अन्य कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनकी सतर्कता के कारण कई परिवारों की खुशियां बरकरार रहीं।

रेल प्रशासन ने भी आम लोगों से अपील की है कि रेलवे ट्रैक पर अनावश्यक रूप से न जाएं और किसी भी परिस्थिति में सुरक्षा नियमों का पालन करें। रेलवे ट्रैक जीवन बचाने के लिए नहीं बल्कि सुरक्षित यात्रा के लिए बनाए गए हैं।

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जब ड्यूटी से आगे बढ़कर इंसानियत बनी पहचान

रेलवे के लोको पायलटों का काम बेहद जिम्मेदारी भरा होता है। हजारों यात्रियों की सुरक्षा उनके फैसलों पर निर्भर करती है। ऐसे में जब कोई लोको पायलट अपनी ड्यूटी के साथ मानव जीवन को प्राथमिकता देता है, तो वह सिर्फ एक कर्मचारी नहीं बल्कि समाज का जिम्मेदार प्रहरी बन जाता है।

समस्तीपुर रेल मंडल के लोको पायलटों की घटनाएं यह संदेश देती हैं कि सतर्कता और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं। कुछ सेकंड में लिया गया सही फैसला किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदल सकता है।

आज जरूरत है कि लोग भी रेलवे सुरक्षा नियमों को गंभीरता से समझें। पटरी पर जाना या वहां बैठना बेहद खतरनाक हो सकता है। रेलकर्मी लगातार लोगों की सुरक्षा के लिए प्रयास करते हैं, लेकिन आम लोगों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

इन रेल योद्धाओं का सम्मान केवल उनका सम्मान नहीं बल्कि उस भावना का सम्मान है जिसमें कर्तव्य के साथ इंसानियत भी शामिल है।

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