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रोसड़ा गायत्री शक्ति पीठ में श्रद्धा के साथ मना गायत्री जयंती समारोह, दीपयज्ञ और हवन में उमड़े श्रद्धालु

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समस्तीपुर के रोसड़ा स्थित गायत्री शक्ति पीठ में गायत्री जयंती और वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। दीपयज्ञ, सामूहिक गायत्री मंत्र जप और हवन यज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के रोसड़ा स्थित गायत्री शक्ति पीठ में गायत्री जयंती एवं वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गायत्री परिवार से जुड़े लोगों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा और श्रद्धालुओं ने विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

दो दिनों तक चले इस विशेष आयोजन में दीपयज्ञ, सामूहिक गायत्री मंत्र जप और वैदिक विधि-विधान के साथ हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गायत्री उपासना, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के संदेश को समाज तक पहुंचाना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार की संध्या दीपयज्ञ के साथ हुई। इस दौरान गायत्री शक्ति पीठ परिसर में बड़ी संख्या में दीप प्रज्वलित किए गए। दीपों की रोशनी से पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक वातावरण में बदल गया। दीपयज्ञ का संचालन परिव्राजक विश्वनाथ दास ने किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को गायत्री साधना के महत्व और जीवन में सकारात्मक विचारों की भूमिका के बारे में जानकारी दी।

बुधवार की सुबह कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू हुआ। सुबह 8 बजे से 10 बजे तक मंदिर परिसर में सामूहिक गायत्री मंत्र जप का आयोजन किया गया। इसमें मौजूद श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर गायत्री मंत्र का उच्चारण किया। मंत्रोच्चारण से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

इसके बाद वैदिक मंत्रों और धार्मिक विधि-विधान के साथ हवन यज्ञ संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर विश्व कल्याण, समाज में शांति और मानव जीवन में सकारात्मकता की कामना की। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने गायत्री जयंती के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मां गायत्री का धरती पर अवतरण माना जाता है। इसी दिन वेद ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का विशेष महत्व बताया गया है।

वक्ताओं ने कहा कि गायत्री मंत्र केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन में ज्ञान, सद्बुद्धि और सकारात्मक सोच का संदेश देता है। युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने गायत्री साधना को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

उन्होंने कहा कि पहले गायत्री मंत्र की साधना सीमित लोगों तक मानी जाती थी, लेकिन युगऋषि के प्रयासों से सामूहिक उपासना और जनजागरण के माध्यम से इसे समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया गया। आज गायत्री परिवार के माध्यम से देश और दुनिया में आध्यात्मिक चेतना का विस्तार हो रहा है।

इस अवसर पर वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा के जीवन, उनके आदर्शों और समाज सेवा से जुड़े कार्यों को भी याद किया गया। गायत्री परिवार के सदस्यों ने उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि माता भगवती देवी शर्मा ने आध्यात्मिकता के साथ-साथ समाज निर्माण और नारी जागरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

गायत्री शक्ति पीठ के सदस्यों ने बताया कि इस तरह के आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में प्रेम, सहयोग और सेवा की भावना मजबूत होती है।

दो दिवसीय कार्यक्रम में गायत्री शक्ति पीठ के मुख्य ट्रस्टी अरविंद प्रसाद, मामराज अग्रवाल, आनंद बजाज, मीरा पौद्दार, दीपक ठाकुर, ललिता देवी सहित बड़ी संख्या में गायत्री परिवार के सदस्य और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान सभी लोगों ने आध्यात्मिक जीवन में अनुशासन, सेवा और सद्भाव को अपनाने का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं का कहना था कि ऐसे आयोजनों से मन को शांति मिलती है और समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार होता है।

रोसड़ा गायत्री शक्ति पीठ में आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देने वाला साबित हुआ। श्रद्धालुओं की सहभागिता और उत्साह ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।

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आध्यात्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का माध्यम

आज के बदलते दौर में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। गायत्री जयंती जैसे कार्यक्रम केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि यह लोगों को अच्छे विचार, सेवा भावना और सकारात्मक जीवन शैली अपनाने की प्रेरणा देते हैं।

रोसड़ा गायत्री शक्ति पीठ में आयोजित कार्यक्रम ने यही संदेश दिया कि आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से समाज में बेहतर वातावरण बनाया जा सकता है। सामूहिक जप, यज्ञ और धार्मिक आयोजनों से लोगों में एकता और सहयोग की भावना मजबूत होती है।

ऐसे आयोजनों की निरंतरता हमारी सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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