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बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में बड़ी कार्रवाई, SVU की 4000 पन्नों की चार्जशीट से बढ़ी हलचल

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बिहार टेंडर घोटाला मामले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने कोर्ट में करीब 4000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। ठेकेदार रिशु श्री, IAS संजीव हंस समेत कई लोगों की भूमिका की जांच जारी है।

पटना/आलम की खबर:बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में जांच एजेंसी की कार्रवाई ने एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। बिहार विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने इस मामले में अदालत में करीब 4000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी की ओर से दाखिल इस चार्जशीट में कई अधिकारियों, इंजीनियरों, ठेकेदारों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी विभागों में ठेके हासिल करने के लिए एक संगठित नेटवर्क के जरिए प्रभाव, आर्थिक लेन-देन और कथित कमीशन व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया। चार्जशीट में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका, कथित लेन-देन और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों का विस्तार से जिक्र किया गया है।

हालांकि इस मामले में शामिल सभी लोगों पर लगे आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अदालत में सुनवाई के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

रिशु श्री पर ठेकों में प्रभाव इस्तेमाल करने का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, ठेकेदार रिशु श्री की भूमिका कई सरकारी परियोजनाओं से जुड़े मामलों में सामने आई है। आरोप है कि सरकारी विभागों में काम हासिल करने के लिए प्रभाव का इस्तेमाल किया गया और कुछ अधिकारियों तक कथित रूप से कमीशन पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई।

SVU की जांच में दावा किया गया है कि कुछ सरकारी ठेकों के भुगतान और काम आवंटन की प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका मिली है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच कथित सांठगांठ के जरिए सरकारी प्रक्रियाओं को प्रभावित किया गया।

IAS संजीव हंस की भूमिका भी जांच के दायरे में

चार्जशीट में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस का नाम भी शामिल होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, जल संसाधन विभाग में सचिव पद पर रहते हुए कुछ परियोजनाओं की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की गई।

SVU ने आरोप लगाया है कि वीरपुर, सुपौल स्थित कोसी बराज सर्किल में फिजिकल मॉडलिंग सेंटर से जुड़ी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई। एजेंसी ने इस मामले में विभिन्न दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई है।

पवन कुमार और संतोष कुमार पर भी आरोप

जांच एजेंसी ने पवन कुमार और संतोष कुमार की भूमिका को लेकर भी चार्जशीट में उल्लेख किया है। आरोप है कि उनकी कंपनी के माध्यम से कई सरकारी विभागों में ठेके प्राप्त किए गए।

SVU के अनुसार, इन परियोजनाओं में कथित रूप से अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच आर्थिक लेन-देन की जांच की गई। एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में इस नेटवर्क से जुड़े लोगों और गतिविधियों का विवरण दिया है।

मुमुक्षु चौधरी पर नगर परियोजनाओं को लेकर आरोप

चार्जशीट में मुमुक्षु चौधरी का नाम भी शामिल होने की बात कही गई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि नगर आयुक्त के पद पर रहते हुए कुछ शहरी विकास परियोजनाओं के टेंडर आवंटन में अनियमितता हुई।

जांच के अनुसार, सीतामढ़ी और सहरसा नगर निगम क्षेत्र से जुड़े करीब 10 करोड़ रुपये के टेंडर की प्रक्रिया की भी जांच की गई है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि इन मामलों में नियमों के उल्लंघन और कथित आर्थिक लाभ की जांच की जा रही है।

तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह की भूमिका की जांच

जांच एजेंसी ने तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह समेत अन्य लोगों की भूमिका का भी उल्लेख किया है। आरोप है कि कुछ सरकारी विभागों की निविदाओं में विशेष कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।

SVU ने अपनी जांच में टेंडर प्रक्रिया, भुगतान रिकॉर्ड, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को आधार बनाया है। एजेंसी का कहना है कि पूरे नेटवर्क की जांच कई स्तरों पर की जा रही है।

छापेमारी और बरामदगी को लेकर भी जांच

इस मामले में पहले भी जांच एजेंसियों की ओर से छापेमारी की कार्रवाई की गई थी। जांच के दौरान कुछ स्थानों से नकदी और दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई थी। एजेंसियां इन बरामदगी को मामले की जांच से जोड़कर देख रही हैं।

हालांकि बरामदगी और आरोपों से जुड़े सभी पहलुओं पर अदालत में आगे की प्रक्रिया के दौरान ही स्थिति स्पष्ट होगी।

चार्जशीट के बाद बढ़ी प्रशासनिक हलचल

करीब 4000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस मामले ने एक बार फिर बिहार में चर्चा तेज कर दी है। सरकारी ठेकों में पारदर्शिता, अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच संबंध तथा निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

जांच एजेंसी अब अदालत में दाखिल तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। आने वाले समय में इस मामले में और पूछताछ, जांच या कानूनी कदम उठाए जाने की संभावना है।

सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए ऐसे मामलों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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सरकारी ठेकों से जुड़े मामले हमेशा से संवेदनशील रहे हैं, क्योंकि इनमें जनता के पैसे और सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता सीधे जुड़ी होती है। बिहार टेंडर घोटाला मामले में SVU की चार्जशीट ने एक बार फिर सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की जरूरत को सामने रखा है।

जांच एजेंसी के आरोपों के अनुसार यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो दोषियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई जरूरी है। वहीं दूसरी ओर न्यायिक प्रक्रिया के तहत हर आरोपी को अपना पक्ष रखने का अधिकार भी प्राप्त है।

ऐसे मामलों में केवल आरोप नहीं बल्कि जांच और अदालत के फैसले महत्वपूर्ण होते हैं। सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया को मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों से बचा जा सके।

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