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बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़ा: बाथरूम में छिपा मोबाइल और Answer Key से खुले कई राज, EOU करेगी जांच

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बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में EOU ने जांच शुरू कर दी है। नवादा परीक्षा केंद्र से मोबाइल, Answer Key और तकनीकी कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका सामने आई है।

नवादा/आलम की खबर:बिहार में सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान सामने आए कथित फर्जीवाड़े ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद अब पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी ने मामले को अपने हाथ में लेते हुए परीक्षा में सेंधमारी करने वाले नेटवर्क की तलाश शुरू कर दी है।

मामला नवादा जिले के कन्हाई लाल साहू महाविद्यालय परीक्षा केंद्र से जुड़ा है, जहां 14 जून 2026 को आयोजित मद्य निषेध सिपाही, जेल गार्ड और चलंत दस्ता सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान कथित रूप से अनियमितता की शिकायत सामने आई थी। परीक्षा केंद्र के अधिकारियों की शिकायत के आधार पर नवादा सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अब इस मामले की जांच EOU कर रही है।

जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि परीक्षा में गड़बड़ी की योजना कितने स्तर पर बनाई गई थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। शुरुआती जांच में परीक्षा केंद्र की तकनीकी व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।

जांच में सामने आया है कि बायोमेट्रिक सिस्टम और जैमर संचालन से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि कुछ लोगों की मिलीभगत से अभ्यर्थियों तक परीक्षा से संबंधित जानकारी पहुंचाने की कोशिश की गई।

इस मामले में अब तक कई अभ्यर्थियों समेत कुल 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसियां सभी आरोपियों की भूमिका की अलग-अलग जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन व्यक्ति किस स्तर पर इस कथित फर्जीवाड़े में शामिल था।

बाथरूम के ऊपर छिपे मोबाइल से मिला अहम सुराग

मामले की जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा उस समय हुआ जब जैमर ऑपरेटर से पूछताछ के बाद परीक्षा केंद्र परिसर के पीछे स्थित बाथरूम के ऊपर छिपाकर रखा गया एक मोबाइल फोन बरामद किया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार मोबाइल फोन में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। इसमें कुछ परीक्षार्थियों से जुड़ी जानकारी, रोल नंबर के अंतिम अंक और प्रश्नपत्र के सेट से संबंधित तस्वीरें मौजूद होने की बात सामने आई है।

मोबाइल बरामद होने के बाद जांच अधिकारियों का शक और मजबूत हुआ है कि परीक्षा के दौरान किसी सुनियोजित तरीके से जानकारी बाहर पहुंचाने की कोशिश की गई थी।

हालांकि जांच अभी शुरुआती चरण में है और मोबाइल से मिले सभी डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। कॉल डिटेल, चैट और अन्य डेटा के आधार पर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

Answer Key पहुंचाने की साजिश की जांच

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि एक विशेष Answer Key तैयार किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह उत्तर सूची किसने तैयार की और इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया।

आरोप है कि तकनीकी व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों के माध्यम से चुनिंदा अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने की कोशिश की गई। इसके बदले पैसे के लेनदेन की आशंका भी जताई जा रही है।

EOU अब इस मामले में आर्थिक पहलुओं की भी जांच कर रही है। बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल माध्यमों से यह पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे मामले में किसी बड़े गिरोह की भूमिका तो नहीं है।

जांच के दायरे में परीक्षा केंद्र से जुड़े कर्मचारी

इस पूरे मामले में परीक्षा केंद्र से जुड़े तकनीकी कर्मचारियों की भूमिका जांच के केंद्र में है। पुलिस और EOU यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।

जांच एजेंसी सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जानकारी और अन्य रिकॉर्ड को खंगाल रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले की कई परतें खुल सकती हैं।

EOU यह भी जांच कर रही है कि क्या यह मामला केवल एक परीक्षा केंद्र तक सीमित था या इसके तार अन्य जगहों से भी जुड़े हुए हैं।

लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा मामला

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। बिहार में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं और कठिन मेहनत के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं।

ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने से अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित होता है। यही वजह है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है।

सरकार और परीक्षा एजेंसियां लगातार परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित बनाने का दावा करती रही हैं, लेकिन इस तरह के मामले सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत महसूस होती है।

आगे और खुलासे की संभावना

फिलहाल EOU की जांच जारी है। जांच एजेंसी मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

जांच के दौरान अगर अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो आने वाले दिनों में और कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल सभी की नजर EOU की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

यह मामला सिर्फ एक परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी का नहीं है, बल्कि बिहार की भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। अब जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कितने लोग थे और इसकी पहुंच कहां तक थी।

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बिहार में प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ी बड़ी खबरें

बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में सामने आया कथित फर्जीवाड़ा परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है क्योंकि लाखों युवाओं का भविष्य इससे जुड़ा होता है।

EOU की जांच से उम्मीद है कि इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों की निगरानी और तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना होगा।

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