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पटना हाईकोर्ट ने नाबालिग अपहरण मामले की जांच पर उठाए गंभीर सवाल, नई SIT बनाने का निर्देश

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पटना हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के कथित अपहरण और मानव तस्करी से जुड़े मामले में पुलिस जांच पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने नई एसआईटी गठित कर चौबीसों घंटे जांच करने का निर्देश दिया।

पटना/आलम की खबर:नाबालिग लड़की के कथित अपहरण और उसे वेश्यावृत्ति में धकेलने के आरोप से जुड़े गंभीर मामले में पटना हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पूरे घटनाक्रम को बेहद चिंताजनक बताया है। अदालत ने केस डायरी और जांच प्रक्रिया का अवलोकन करने के बाद कहा कि प्रारंभिक जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच पर सवाल खड़े होते हैं। न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया है और स्पष्ट किया है कि पीड़िता की तलाश सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

यह मामला उस याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत केस डायरी का विस्तार से परीक्षण किया और कई गंभीर कमियों की ओर संकेत किया।

खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि जांच के शुरुआती चरण में जिन लोगों के नाम गिरफ्तार आरोपियों के बयान में सामने आए थे, उनसे समय पर पूछताछ तक नहीं की गई। अदालत ने इस पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले में जांच अधिकारी द्वारा आवश्यक कार्रवाई में देरी न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी पाया कि केस डायरी में अनेक प्रविष्टियां होने के बावजूद उनमें अधिकांश विवरण एक-दूसरे की पुनरावृत्ति जैसे प्रतीत होते हैं। अदालत की टिप्पणी थी कि केवल औपचारिक प्रविष्टियां कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांच को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर पीड़िता को ले जाने की आशंका जताई गई थी, वहां प्रभावी छापेमारी और जांच के पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए। न्यायालय के अनुसार ऐसे मामलों में प्रत्येक संभावित स्थान की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए थी ताकि पीड़िता का शीघ्र पता लगाया जा सके।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि मामले की निगरानी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के स्तर पर की जा रही थी। इसके बावजूद जांच की गति और गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। अदालत ने कहा कि पर्यवेक्षण स्तर पर भी अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दी, जिससे जांच प्रभावित हुई।

राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता और सरकारी पक्ष ने भी अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि इस मामले में जांच अपेक्षित स्तर पर नहीं हो सकी। अदालत को यह जानकारी दी गई कि पूर्णिया के पुलिस अधीक्षक से इस संबंध में बातचीत की गई है और मामले की जांच के लिए नई एसआईटी गठित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि नई एसआईटी का नेतृत्व ऐसे अधिकारी को सौंपा जाए जिसे इस प्रकार के संवेदनशील मामलों की जांच का पर्याप्त अनुभव हो और जिसकी निष्पक्ष कार्यशैली पर भरोसा किया जा सके। अदालत ने यह भी कहा कि जांच टीम को चौबीसों घंटे सक्रिय रहकर पीड़िता की तलाश करनी होगी।

न्यायालय ने प्रशासन को निर्देश दिया कि नई एसआईटी को आवश्यक संसाधन, तकनीकी सहायता और प्रशासनिक स्वीकृतियां बिना किसी देरी के उपलब्ध कराई जाएं ताकि जांच में किसी प्रकार की बाधा न आए। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है और हर क्षण की देरी पीड़िता की सुरक्षा पर असर डाल सकती है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि उसकी नाबालिग बेटी का अपहरण कर उसे अवैध गतिविधियों में धकेलने की साजिश रची गई। इस संबंध में पुलिस अधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी के बाद न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया।

हाईकोर्ट ने पूरे मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई 2026 को निर्धारित की है। तब तक नई एसआईटी द्वारा की गई कार्रवाई और जांच की प्रगति रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जा सकती है। इस मामले पर अब पुलिस प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था दोनों की नजर बनी हुई है।

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संवेदनशील मामलों में तेज और निष्पक्ष जांच ही न्याय की पहली शर्त

नाबालिगों से जुड़े अपराध केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत गंभीर होते हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की छोटी-सी लापरवाही भी पीड़ित और उसके परिवार के लिए लंबे समय तक न्याय में देरी का कारण बन सकती है।

पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी यह संदेश देती है कि संवेदनशील मामलों में केवल औपचारिक जांच पर्याप्त नहीं है। समयबद्ध, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई ही न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास मजबूत कर सकती है। नई एसआईटी से उम्मीद की जा रही है कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगी।

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