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वैशाली में मिले अर्धजले शव की हुई पहचान, समस्तीपुर के युवक की हत्या का आरोप; मामा समेत 5 नामजद

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वैशाली में मिले अर्धजले शव की पहचान समस्तीपुर निवासी नीतीश कुमार के रूप में हुई है। मृतक के भाई ने मामा समेत पांच लोगों पर अपहरण और हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर जांच तेज कर दी है।

वैशाली/आलम की खबर:वैशाली जिले के जुड़ावनपुर थाना क्षेत्र में सड़क किनारे मिले अर्धजले शव की गुत्थी अब धीरे-धीरे सुलझने लगी है। पुलिस ने शव की पहचान समस्तीपुर जिले के शाहपुर पटोरी थाना क्षेत्र के होली गांव निवासी नीतीश कुमार के रूप में की है। पहचान होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मृतक के परिजनों ने इसे सुनियोजित हत्या बताते हुए उसके मामा समेत पांच लोगों पर अपहरण कर हत्या करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।

पुलिस के अनुसार 30 जून को जुड़ावनपुर थाना क्षेत्र के चकसिंगार पंचायत स्थित लंका टोला के पास सड़क किनारे एक अर्धजला शव बरामद हुआ था। शव की हालत अत्यंत खराब होने के कारण उसकी तत्काल पहचान नहीं हो सकी थी। पहचान सुनिश्चित करने और मौत के कारणों का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम हेतु भेजा गया था। बाद में परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर शव की पहचान नीतीश कुमार के रूप में की।

परिजनों के अनुसार नीतीश कुमार हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत था और कुछ दिन पहले ही अपने गांव लौटा था। आरोप है कि गांव आने के बाद उसका मामा उसे अपने साथ लेकर गया, जिसके बाद वह रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया। परिवार ने उसकी तलाश की और स्थानीय थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी।

इसी दौरान वैशाली में अज्ञात युवक का अर्धजला शव मिलने की सूचना सामने आई। सूचना मिलने पर परिवार के सदस्य सदर अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने शव की पहचान नीतीश कुमार के रूप में की। इसके बाद पूरे मामले ने हत्या की आशंका को और मजबूत कर दिया।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को संदेह है कि हत्या के बाद शव को आग के हवाले कर उसकी पहचान मिटाने का प्रयास किया गया। शव काफी हद तक झुलस चुका था, जिससे पहचान करना कठिन हो गया था। पुलिस का मानना है कि अपराधियों ने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को सड़क किनारे फेंका।

मृतक के भाई ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उसके मामा और अन्य चार लोगों ने मिलकर पहले नीतीश का अपहरण किया और बाद में उसकी हत्या कर शव को जला दिया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने पांच नामजद आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

जांच के दौरान एक और पहलू सामने आया है। पुलिस विभिन्न संभावित कारणों की जांच कर रही है। कुछ स्थानीय सूत्रों के अनुसार मामला पारिवारिक संबंधों और आपसी विवाद से जुड़ा हो सकता है। हालांकि पुलिस ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

परिवार के सदस्यों ने बताया कि नीतीश की मां का निधन बचपन में हो गया था, जिसके बाद उसका पालन-पोषण मामा के घर हुआ। बाद में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वह रोजगार की तलाश में गुरुग्राम चला गया था। वह दो भाइयों में छोटा था और अविवाहित था। उसकी मौत की खबर से पूरे परिवार में शोक का माहौल है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। साथ ही कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हत्या की साजिश कैसे रची गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

जुड़ावनपुर थाना पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कई पहलुओं से की जा रही है। अपहरण, हत्या, आपराधिक साजिश और साक्ष्य मिटाने से जुड़े सभी बिंदुओं पर जांच जारी है। पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार ओझा ने बताया कि शव की पहचान समस्तीपुर निवासी नीतीश कुमार के रूप में हो चुकी है। मृतक के भाई के आवेदन पर पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किए जाने की उम्मीद है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी उपलब्ध साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण कराया जा रहा है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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हत्या की गुत्थी सुलझाने में वैज्ञानिक जांच की अहम भूमिका

अपराध की गंभीर घटनाओं में वैज्ञानिक साक्ष्य, तकनीकी जांच और निष्पक्ष अनुसंधान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस के लिए आवश्यक है कि हर पहलू की गहराई से जांच कर तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचे।

इस मामले में भी अंतिम सच्चाई पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए किसी भी संभावित कारण को आधिकारिक पुष्टि से पहले अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए।

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