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Darbhanga Suicide News: BPSC की तैयारी कर रहे युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सुसाइड नोट में बयां किया मानसिक तनाव

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Darbhanga News: दरभंगा में BPSC की तैयारी कर रहे 25 वर्षीय युवक ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में परीक्षा में असफलता और मानसिक तनाव का जिक्र है। पढ़िए Alam Ki Khabar की विस्तृत रिपोर्ट।

दरभंगा/आलम की खबर:दरभंगा शहर के बेंता चौक वार्ड-35 से शनिवार को एक बेहद दुखद घटना सामने आई, जहां बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की तैयारी कर रहे 25 वर्षीय युवक रोमित कुमार का शव उनके घर के किचन में फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। मौके पर पहुंची बेंता थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेज दिया है। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।

मृतक की पहचान शिव शंकर साहू उर्फ शिबू साहू के पुत्र रोमित कुमार के रूप में हुई है। परिवार के अनुसार, वह लंबे समय से BPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। लगातार तीन प्रयासों में सफलता नहीं मिलने के बाद वह मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। प्रारंभिक जांच में घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने अपनी मानसिक स्थिति, परीक्षा में असफलता और परिवार के प्रति अपने भावनात्मक संदेश का उल्लेख किया है।

सुसाइड नोट में रोमित ने लिखा कि वह यह कदम उठाना नहीं चाहते थे, लेकिन दरोगा परीक्षा में झटका लगने के बाद उनका मानसिक स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने कई बार खुद को संभालने और दोबारा पढ़ाई शुरू करने की कोशिश की, लेकिन परिस्थितियों ने उनका साथ नहीं दिया। उन्होंने अपने माता-पिता, भाई-बहनों और परिवार के सभी सदस्यों से माफी मांगते हुए सभी से हमेशा खुश रहने की अपील की। साथ ही उन्होंने परिवार से अनुरोध किया कि उनकी मौत को बीमारी बताएं।

सुसाइड नोट में उन्होंने यह भी लिखा कि उन्होंने 4 जुलाई के दिन ही अपने सपनों की शुरुआत की थी और विश्वास था कि ग्रेजुएशन के बाद BPSC में सफलता मिलेगी। लेकिन लगातार असफलता और बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य के कारण वह खुद को संभाल नहीं सके। उन्होंने लिखा कि "इतनी कोशिश के बाद भी मैं कमबैक नहीं कर पाया" और "सरकार तथा खुद पर से मेरा भरोसा उठ गया था।"

परिजनों ने बताया कि रोमित केवल प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी ही नहीं कर रहे थे, बल्कि मिर्जापुर इलाके में अपनी एक लाइब्रेरी भी चलाते थे। वह अपनी मेहनत से कमाई करते थे और विश्वविद्यालय के छात्रों को पढ़ाकर भी उनकी मदद करते थे। परिवार के अनुसार, वह दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे थे तथा उनका विवाह नहीं हुआ था।

इस परिवार पर पिछले दो महीनों में यह दूसरा बड़ा दुख आया है। मृतक के चाचा जयप्रकाश साहू ने बताया कि करीब दो महीने पहले रोमित के चचेरे भाई ऋषभ की भी ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। लगातार दो घटनाओं ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

घटना के बाद परिजन तत्काल उन्हें एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

परीक्षाओं का दबाव, लगातार असफलता और मानसिक तनाव आज युवाओं के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में परिवार, मित्रों और समाज का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है। कठिन परिस्थितियों में संवाद बनाए रखना और समय पर सहायता लेना कई जिंदगियां बचा सकता है।

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मानसिक संघर्ष पर संवाद जरूरी

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान असफलता जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं होती। मानसिक तनाव महसूस होने पर परिवार, मित्रों या किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना बेहद जरूरी है। समय पर मिला सहयोग नई शुरुआत की राह खोल सकता है। समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह ऐसे युवाओं को अकेला महसूस न होने दे।

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