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Begusarai News: 1991 बम विस्फोट मामले में पूर्व सांसद सूरजभान सिंह समेत तीन आरोपी बरी

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Alam Ki Khabar | Begusarai News: बेगूसराय के चर्चित 1991 बम विस्फोट मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने पूर्व सांसद सूरजभान सिंह, ललन सिंह और रामलखन सिंह को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

बेगूसराय/आलम की खबर:बेगूसराय के बहुचर्चित वर्ष 1991 के बम विस्फोट मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय से पूर्व सांसद सूरजभान सिंह समेत तीन आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए पूर्व सांसद सूरजभान सिंह, ललन सिंह और रामलखन सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

यह मामला बरौनी थाना कांड संख्या 449/1991 से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, 2 नवंबर 1991 को बरौनी थाना क्षेत्र के बीहट गांव स्थित रामलखन सिंह के गोहाल (मवेशी घर) में एक शक्तिशाली बम विस्फोट हुआ था। इस घटना में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था, जबकि गोहाल की खपरैल छत भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। मामले की जांच के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दायर किया गया था।

इस प्रकरण में वर्ष 2018 में न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 307/34, 324/34, 427/34, 120बी तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3/4 के तहत आरोप तय किए थे। इसके बाद नियमित रूप से मामले की सुनवाई चलती रही।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक रामप्रकाश यादव ने कुल आठ गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। इनमें रामबहादुर सिंह, सुरेश महतो, रुद्र नारायण, अशोक महतो, ललन कुमार, अरविंद कुमार और राकेश कुमार सहित अन्य गवाहों की गवाही दर्ज कराई गई। वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मंसूर आलम ने आरोपियों का पक्ष रखा।

दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने माना कि आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसी आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश सुनाया।

अदालत के इस फैसले के साथ करीब तीन दशक से अधिक समय से लंबित इस चर्चित मामले का न्यायिक पटाक्षेप हो गया। फैसले के बाद अदालत परिसर में दोनों पक्षों के अधिवक्ता और संबंधित लोग मौजूद रहे।

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तीन दशक पुराने मामले का हुआ फैसला

करीब 35 वर्ष पुराने इस मामले में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के कारण आरोपियों को संदेह का लाभ दिया गया।

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