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Samastipur Sadar Hospital News: पत्रकार से कथित बदसलूकी का वीडियो सामने आया, डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग तेज

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Alam Ki Khabar: समस्तीपुर सदर अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक पर पत्रकार से कथित बदसलूकी और धक्का देने का आरोप लगा है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर सदर अस्पताल में रविवार रात एक ऐसी घटना सामने आई जिसने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इमरजेंसी ड्यूटी के दौरान चिकित्सक के कथित रूप से अनुपस्थित रहने की सूचना पर कवरेज करने पहुंचे एक पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी और धक्का-मुक्की का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें अस्पताल परिसर के अंदर डॉक्टर और पत्रकार के बीच तीखी नोकझोंक तथा पत्रकार को बाहर की ओर धकेलते हुए देखा जा सकता है। हालांकि इस पूरे मामले में चिकित्सक का पक्ष समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आ सका है।

मिली जानकारी के अनुसार रविवार रात करीब आठ बजे सदर अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों और उनके परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक के मौजूद नहीं होने की शिकायत की। इसी सूचना के आधार पर पत्रकार श्रवण कुमार अस्पताल पहुंचे और खाली पड़े चिकित्सक कक्ष का वीडियो बनाया। इसी दौरान डॉक्टर के अस्पताल पहुंचने पर पत्रकार ने उनसे ड्यूटी से अनुपस्थित रहने को लेकर सवाल पूछा।

आरोप है कि सवाल पूछे जाने से नाराज चिकित्सक डॉ. पी.डी. शर्मा ने पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें इमरजेंसी कक्ष से बाहर धकेल दिया। सामने आए वीडियो में दोनों के बीच तीखी बहस का दृश्य भी दिखाई देता है। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई।

घटना के बाद भाकपा (माले) के जिला स्थायी समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने इसे स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला बताते हुए जिला प्रशासन और सिविल सर्जन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो जनहित में आंदोलन शुरू किया जाएगा।

माले नेता ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित चिकित्सक को लेकर पहले भी कई तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इन आरोपों से जुड़े साक्ष्य मौजूद हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में चिकित्सक का पक्ष सामने आया है।

घटना के बाद पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच भी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि कोई पत्रकार जनहित के मुद्दों को उठाता है तो उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। सरकारी अस्पताल में ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार की अभद्रता या हाथापाई जैसे आरोप बेहद गंभीर माने जाने चाहिए और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

इस पूरे मामले को लेकर अब निगाहें जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों द्वारा आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

सरकारी अस्पताल में जवाबदेही और पत्रकारों का सम्मान दोनों जरूरी

सरकारी अस्पताल जनता के भरोसे की सबसे बड़ी संस्थाओं में गिने जाते हैं। ऐसे में यदि ड्यूटी, मरीजों की परेशानी या अस्पताल की व्यवस्था से जुड़े सवाल पूछने पर किसी पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी होती है, तो यह चिंता का विषय है। दूसरी ओर, किसी भी चिकित्सक पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच भी उतनी ही आवश्यक है ताकि सत्य सामने आ सके। कानून का तकाजा यही है कि न किसी को बिना जांच दोषी ठहराया जाए और न ही किसी शिकायत को दबाया जाए। जिला प्रशासन को चाहिए कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर दोष तय करे और यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाए तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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