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Patna Property Tax: AI से होगी संपत्तियों की पहचान, बिजली उपभोक्ताओं के डेटा से बढ़ेगा टैक्स बेस

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Alam Ki Khabar: पटना नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स असेसमेंट के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल करेगा। बिजली उपभोक्ताओं के डेटा से संपत्तियों का सर्वे कर नई होल्डिंग्स को टैक्स के दायरे में लाने की तैयारी है।

पटना: आलम की खबर:पटना नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रॉपर्टी टैक्स व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब शहर की संपत्तियों की पहचान और टैक्स असेसमेंट के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। निगम बिजली उपभोक्ताओं के डेटा के आधार पर संपत्तियों का सर्वे करेगा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से टैक्स के दायरे से बाहर रह गई संपत्तियों को चिन्हित करेगा।

नगर निगम के इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर में मौजूद सभी योग्य संपत्तियों को प्रॉपर्टी टैक्स व्यवस्था से जोड़ना है। वर्तमान समय में पटना नगर निगम क्षेत्र में करीब 7 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जबकि लगभग 3 लाख संपत्तियां ही प्रॉपर्टी टैक्स के लिए पंजीकृत हैं। ऐसे में बिजली कनेक्शन और टैक्स असेसमेंट के बीच बड़े अंतर को कम करने की योजना बनाई गई है।

इस अभियान के तहत निगम नई होल्डिंग्स की पहचान करेगा और संपत्ति मालिकों को टैक्स असेसमेंट की प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रेरित करेगा। इसके लिए नगर निगम के कंट्रोल रूम में 26 सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया गया है। यह टीम प्रतिदिन बिजली उपभोक्ताओं से फोन के माध्यम से संपर्क करेगी और संपत्ति से जुड़ी जानकारी जुटाएगी।

संपर्क के दौरान उपभोक्ताओं से उनकी संपत्ति की जानकारी, SAS संख्या, प्रॉपर्टी टैक्स भुगतान की स्थिति और जरूरी दस्तावेजों के बारे में जानकारी ली जाएगी। साथ ही लोगों को सेल्फ असेसमेंट सिस्टम (SAS) के तहत टैक्स निर्धारण की प्रक्रिया की जानकारी भी दी जाएगी।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, AI आधारित तकनीक से अभियान को तेज और प्रभावी बनाया जाएगा। इससे कम समय में अधिक संख्या में उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाई जा सकेगी। तकनीक की मदद से डेटा का विश्लेषण कर उन संपत्तियों की पहचान करने में आसानी होगी, जो अभी तक टैक्स व्यवस्था से बाहर हैं।

ऊर्जा विभाग की ओर से पटना नगर निगम को कुल 6,97,792 विद्युत उपभोक्ताओं का विवरण उपलब्ध कराया गया है। इनमें से 6,18,244 उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर दर्ज हैं। अभियान के पहले चरण में उन्हीं उपभोक्ताओं से संपर्क किया जा रहा है, जिनके मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं। इसके बाद अन्य उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने की योजना है।

अभियान की निगरानी के लिए टीम के सभी सदस्यों को प्रतिदिन अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी। रिपोर्ट के माध्यम से यह देखा जाएगा कि कितने उपभोक्ताओं से संपर्क हुआ, कितनी संपत्तियों की जानकारी मिली और कितने लोगों ने टैक्स असेसमेंट की प्रक्रिया पूरी की।

नगर निगम का मानना है कि इस अभियान से शहर में टैक्स व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी और निगम की आय में भी बढ़ोतरी होगी। वहीं, नई संपत्तियों के जुड़ने से शहर के विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त राजस्व उपलब्ध हो सकेगा।

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संपादकीय: डिजिटल तकनीक से बदलेगी शहरी व्यवस्था

बढ़ते शहरों के साथ नगर निकायों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही राजस्व व्यवस्था बनाए रखना है। पटना नगर निगम का AI और डेटा आधारित सर्वे अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। अगर तकनीक का इस्तेमाल पारदर्शिता और सही तरीके से किया जाता है तो इससे जहां निगम की आय बढ़ेगी, वहीं आम लोगों को भी बेहतर शहरी सुविधाएं मिल सकेंगी। जरूरी है कि इस प्रक्रिया में नागरिकों को जागरूक किया जाए और अनावश्यक परेशानी से बचाया जाए।

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