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Katihar DM Ashutosh Dwivedi: कटिहार डीएम आशुतोष द्विवेदी, मिड-डे मील, बच्चों के साथ भोजन, मनिहारी स्कूल, बिहार प्रशासन

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Alam Ki Khabar: कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने मनिहारी प्रखंड के स्कूल में बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर मिड-डे मील किया। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता परखी, बच्चों से बातचीत की और सहयोग शिविर का भी निरीक्षण किया।

कटिहार, 9 जुलाई। आलम की खबर: प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संवेदनशीलता और सादगी का एक अलग ही उदाहरण बुधवार को कटिहार में देखने को मिला। जिले के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी मनिहारी प्रखंड में आयोजित सहयोग शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे थे, लेकिन कार्यक्रम के बाद उन्होंने जो किया, उसने वहां मौजूद बच्चों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया। डीएम सीधे मनिहारी प्रखंड के कांटाकोश उत्क्रमित विद्यालय पहुंचे और बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) किया।

जिलाधिकारी को अपने बीच बैठा देखकर स्कूली बच्चों के चेहरे खिल उठे। किसी औपचारिकता के बिना उन्होंने बच्चों के साथ वही भोजन किया जो प्रतिदिन विद्यालय में परोसा जाता है। भोजन के दौरान उन्होंने बच्चों से पढ़ाई, स्कूल की व्यवस्था, शिक्षकों की उपस्थिति और मिड-डे मील की गुणवत्ता के बारे में खुलकर बातचीत की। बच्चों ने भी बेझिझक अपने अनुभव साझा किए।

डीएम ने केवल भोजन नहीं किया, बल्कि भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और रसोई व्यवस्था का भी बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों को हमेशा पौष्टिक, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि मिड-डे मील योजना का उद्देश्य केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूत करना भी है।

इससे पहले जिलाधिकारी ने मनिहारी में आयोजित सहयोग शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल का जायजा लिया और अधिकारियों से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने लाभार्थियों से सीधे बातचीत कर योजनाओं की स्थिति जानी तथा अधिकारियों को निर्देश दिया कि आम लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने दोहराया कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी के इस सादगीपूर्ण व्यवहार की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग उनके व्यवहार की सराहना करते हुए लिख रहे हैं कि एक अधिकारी का आम लोगों, खासकर बच्चों के बीच इस तरह बैठना प्रशासन के मानवीय चेहरे को सामने लाता है। कई लोगों ने इसे जनसेवा के प्रति संवेदनशील सोच का उदाहरण बताया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कोई वरिष्ठ अधिकारी बिना किसी औपचारिकता के बच्चों के बीच बैठकर भोजन करता है, तो इससे न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है बल्कि सरकारी विद्यालयों और मिड-डे मील व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा भी मजबूत होता है। शिक्षकों ने भी जिलाधिकारी के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इससे बच्चों में सकारात्मक संदेश गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं होने चाहिए, बल्कि इनके माध्यम से योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन कर सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। जिलाधिकारी के इस दौरे से स्कूल प्रशासन को भी व्यवस्था और गुणवत्ता बनाए रखने का स्पष्ट संदेश मिला है।

संवेदनशील प्रशासन ही मजबूत विश्वास की पहचान

सरकारी योजनाओं की सफलता केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देनी चाहिए। जब कोई जिलाधिकारी बच्चों के साथ बैठकर भोजन करता है और उनकी समस्याएं सीधे सुनता है, तो यह प्रशासन और जनता के बीच विश्वास की दूरी कम करता है। ऐसे कदम अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रेरणादायक बन सकते हैं।

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