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JDU Bihar New State Committee: जेडीयू की नई प्रदेश कमेटी पर बवाल, नीतीश कुमार के आवास पर नेताओं में तीखी नोकझोंक

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Alam Ki Khabar | जेडीयू की नई प्रदेश कमेटी के गठन के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आया। मुख्यमंत्री आवास पर नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। कई नेताओं ने कमेटी गठन पर गंभीर आरोप लगाए। संबंधित आरोपों पर पार्टी की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पटना, 09 जुलाई। आलम की खबर:जनता दल (यूनाइटेड) की नई प्रदेश कमेटी के गठन के महज एक दिन बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया। गुरुवार को पटना स्थित पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर उस समय असहज स्थिति बन गई, जब प्रदेश कमेटी को लेकर शिकायत करने पहुंचे एक नेता और एमएलसी संजय गांधी के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों को हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग करना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद जेडीयू के निवर्तमान प्रदेश महासचिव धीरज कुशवाहा और एमएलसी संजय गांधी के बीच हुआ। बताया जाता है कि धीरज कुशवाहा नई प्रदेश कमेटी के गठन को लेकर अपनी शिकायत सीधे नीतीश कुमार के समक्ष रख रहे थे। इसी दौरान संजय गांधी ने उन्हें बीच में रोकते हुए वहां से जाने की बात कही, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

सूत्रों के अनुसार, बहस के दौरान प्रदेश कमेटी के गठन में कथित अनियमितताओं, पक्षपात और पदों के वितरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। आरोप यह भी लगाए गए कि पार्टी के लिए लंबे समय से काम करने वाले कई नेताओं की अनदेखी की गई, जबकि कुछ ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं जिनकी भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर सवाल उठते रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

धीरज कुशवाहा ने मीडिया से बातचीत में यह स्वीकार किया कि उनकी संजय गांधी से बहस हुई। हालांकि उन्होंने आरोपों के संबंध में विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया। उनका कहना था कि वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने अपनी बात रखने पहुंचे थे और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।

दरअसल, बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने नई प्रदेश कमेटी की घोषणा की थी। नई टीम में 12 प्रदेश उपाध्यक्ष, 38 प्रदेश महासचिव और 74 प्रदेश सचिव बनाए गए हैं। सूची जारी होते ही पार्टी के भीतर नाराजगी की चर्चा तेज हो गई। कई नेताओं का आरोप है कि संगठन में नियुक्तियों के दौरान पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है।

पार्टी के असंतुष्ट नेताओं का दावा है कि कई ऐसे नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारी दी गई है जिन पर पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगते रहे हैं। वहीं, कई पुराने नेताओं और संगठन के लिए लंबे समय से काम करने वाले कार्यकर्ताओं को नई सूची में जगह नहीं मिली। इन दावों पर पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के असंतुष्ट नेताओं का एक समूह शुक्रवार को नीतीश कुमार से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां और सुझाव सीधे उनके सामने रखने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि लगभग 50 नेता नई प्रदेश कमेटी को लेकर अपनी नाराजगी दर्ज करा सकते हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के भीतर इस तरह का असंतोष पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय और संगठनात्मक बदलाव का अधिकार पार्टी नेतृत्व के पास ही है।

फिलहाल जेडीयू नेतृत्व की नजर इस बात पर है कि संगठन के भीतर उठे असंतोष को कैसे शांत किया जाए, ताकि आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

संगठन में संवाद ही समाधान

किसी भी राजनीतिक दल में नई टीम के गठन के बाद मतभेद होना असामान्य नहीं है। लेकिन यदि असंतोष सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे तो नेतृत्व के लिए संवाद स्थापित करना और संगठन को साथ लेकर चलना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं का विश्वास बनाए रखना किसी भी दल की सबसे बड़ी ताकत होती है।

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