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Bankipur Byelection: बांकीपुर में भाजपा का बड़ा दांव, 24 घंटे में बदला उम्मीदवार, नीरज कुमार सिन्हा को मिला टिकट

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Alam Ki Khabar: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने नामांकन के 24 घंटे के भीतर उम्मीदवार बदल दिया। अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ बंटी की जगह नीरज कुमार सिन्हा को अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया। जानिए इस बड़े राजनीतिक फैसले के पीछे की पूरी कहानी।

पटना, 11 जुलाई। आलम की खबर: बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने ऐसा फैसला लिया है जिसने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। नामांकन दाखिल होने के महज 24 घंटे के भीतर पार्टी ने अपने अधिकृत उम्मीदवार को बदलते हुए अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ अभिषेक बंटी की जगह नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतार दिया। भाजपा ने आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार बदलने की वजह पारिवारिक कारण बताई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को महज व्यक्तिगत कारण नहीं बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की मौजूदगी में अभिषेक बंटी ने शक्ति प्रदर्शन के साथ नामांकन दाखिल किया था। लेकिन अगले ही दिन उन्होंने नाम वापस लेने की घोषणा कर दी। इसके तुरंत बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में नीरज कुमार सिन्हा को पार्टी का नया अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर दिया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर स्वयं चुनाव मैदान में हैं और इस सीट को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना चुके हैं। ऐसे में पार्टी किसी भी तरह का राजनीतिक जोखिम लेने के पक्ष में नहीं दिखी।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं भी सामने आई हैं। कुछ राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि अभिषेक बंटी के परिवार से जुड़े पुराने मामलों को लेकर विपक्ष हमलावर हो सकता था, जबकि अन्य विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय संगठन से मिले फीडबैक और चुनावी समीकरणों को देखते हुए भाजपा ने अंतिम समय में रणनीति बदली। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और भाजपा ने केवल पारिवारिक कारणों का ही उल्लेख किया है।

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। इस सीट पर कायस्थ मतदाताओं की अच्छी संख्या है और पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाकर सामाजिक समीकरण साधने की भी कोशिश की है। संगठन में सक्रिय और प्रभावशाली माने जाने वाले नीरज सिन्हा को स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरा माना जाता है।

अब इस सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा, जन सुराज के प्रशांत किशोर और राजद की रेखा गुप्ता के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की तस्वीर उभर रही है। राजनीतिक दलों ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है और अब सभी की नजर 30 जुलाई को होने वाले मतदान पर टिकी है।

चुनावी रणनीति या राजनीतिक मजबूरी?

भाजपा द्वारा अंतिम समय में उम्मीदवार बदलना यह संकेत देता है कि पार्टी इस सीट को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। हालांकि इस फैसले के पीछे की वास्तविक वजह पर अलग-अलग राजनीतिक दावे किए जा रहे हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से पार्टी ने केवल पारिवारिक कारणों का हवाला दिया है। मतदान के नतीजे ही तय करेंगे कि भाजपा का यह फैसला रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक साबित होता है या विपक्ष के आरोपों को बल देता है।

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