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Success Story BPSC 70th Result: पहली बार PT में हुईं फेल, दूसरी कोशिश में बनीं RDO; शादी के बाद शिवांगिनी सिंह ने रचा सफलता का इतिहास

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Alam Ki Khabar: भोजपुर की शिवांगिनी सिंह ने 70वीं BPSC परीक्षा में ग्रामीण विकास पदाधिकारी (RDO) बनकर सफलता हासिल की। पहले प्रयास में असफल होने के बाद दूसरे प्रयास में मिली कामयाबी, जानिए उनकी तैयारी, संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी।

भोजपुर (आरा), 11 जुलाई। आलम की खबर: सफलता कभी भी पहली कोशिश की मोहताज नहीं होती। कई बार पहली असफलता ही सबसे बड़ी सीख बन जाती है और वही व्यक्ति को मंजिल तक पहुंचाती है। भोजपुर जिले के आरा शहर की रहने वाली शिवांगिनी सिंह ने इस बात को सच साबित कर दिया। पहले प्रयास में वह BPSC की प्रारंभिक परीक्षा (PT) भी पास नहीं कर सकीं, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी का तरीका बदला। लगातार मेहनत, अनुशासन और धैर्य के बल पर दूसरे प्रयास में उन्होंने 70वीं BPSC परीक्षा उत्तीर्ण कर ग्रामीण विकास पदाधिकारी (RDO) का पद हासिल कर लिया। उनकी सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि दिसंबर 2025 में शादी के बाद उन्होंने इंटरव्यू दिया और अंतिम परिणाम आने पर मायके के साथ-साथ ससुराल में भी खुशी की लहर दौड़ गई।

आरा के बॉस टाल मोहल्ले निवासी अधिवक्ता संतोष कुमार सिंह और सरकारी शिक्षिका संजना सिंह की बड़ी बेटी शिवांगिनी ने शुरुआती शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, धनुपरा से प्राप्त की। वर्ष 2013 में प्रथम श्रेणी से मैट्रिक और 2015 में इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने Banaras Hindu University से सोशल साइंस में स्नातक किया तथा बाद में Indira Gandhi National Open University से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2022 से उन्होंने पूरी तरह BPSC की तैयारी शुरू कर दी।

शिवांगिनी बताती हैं कि वह प्रतिदिन छह से आठ घंटे नियमित पढ़ाई करती थीं। उन्होंने सीमित लेकिन गुणवत्तापूर्ण अध्ययन पर जोर दिया। विषयों की गहराई से तैयारी के साथ ऑनलाइन लेक्चर देखे और लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू की तैयारी के लिए लगातार मॉक इंटरव्यू दिए। उनका मानना है कि सही रणनीति और निरंतर अभ्यास ही सफलता की असली कुंजी है।

उन्होंने अपनी तैयारी को बेहद गोपनीय रखा। इसकी जानकारी केवल उनकी मां को थी। शादी के बाद भी केवल उनके पति को पता था कि वह BPSC की तैयारी कर रही हैं। अंतिम परिणाम आने के समय वह पुणे में थीं। जैसे ही चयन की सूचना मिली, मायके और ससुराल दोनों जगह जश्न शुरू हो गया।

शिवांगिनी की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का विश्वास सबसे बड़ी ताकत बना। सरकारी शिक्षिका मां संजना सिंह ने हर कठिन समय में उनका मनोबल बढ़ाया, जबकि अधिवक्ता पिता संतोष कुमार सिंह ने हमेशा अपनी बेटी को पसंद का करियर चुनने की आजादी दी। परिवार ने कभी बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं किया और यही सोच आज उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि बन गई।

दिल्ली में तैयारी के दौरान आसपास के लोगों की कई तरह की बातें भी सुनने को मिलीं, लेकिन परिवार ने कभी इन नकारात्मक बातों को महत्व नहीं दिया। उन्हें भरोसा था कि उनकी बेटी एक दिन अधिकारी जरूर बनेगी। आखिरकार वह विश्वास सच साबित हुआ और आज शिवांगिनी हजारों युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।

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मेहनत का कोई विकल्प नहीं

शिवांगिनी सिंह की कहानी बताती है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि नई शुरुआत का अवसर होती है। सही रणनीति, धैर्य और परिवार का साथ किसी भी कठिन लक्ष्य को आसान बना सकता है। उनकी सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो पहली असफलता के बाद निराश हो जाते हैं।

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