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Bihar Stone Mining: बिहार के 6 जिलों में 44 नए पत्थर खनन भूखंडों को मंजूरी, निर्माण कार्यों को मिलेगी रफ्तार

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Alam Ki Khabar: बिहार सरकार ने नवादा, शेखपुरा, गया, रोहतास, औरंगाबाद और बांका में 44 नए पत्थर खनन भूखंडों को मंजूरी दी है। ई-नीलामी के जरिए खनन पट्टों की बंदोबस्ती होगी, जिससे पत्थर की उपलब्धता, रोजगार और राजस्व बढ़ने की उम्मीद है।

पटना, 12 जुलाई। आलम की खबर: बिहार सरकार ने राज्य में पत्थर खनन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए छह जिलों के 44 नए भूखंडों पर खनन की मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से राज्य में पत्थर की उपलब्धता बढ़ेगी, निर्माण परियोजनाओं की लागत कम होगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और सरकारी राजस्व में भी वृद्धि होगी। सबसे अधिक 17 खनन भूखंड नवादा जिले में स्वीकृत किए गए हैं।

खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार जिन जिलों में नए खनन भूखंडों को मंजूरी मिली है उनमें नवादा, शेखपुरा, गया, रोहतास, औरंगाबाद और बांका शामिल हैं। नवादा में 17, शेखपुरा में 10, गया में 9, रोहतास में 4, औरंगाबाद में 3 तथा बांका में 1 भूखंड पर पत्थर खनन की अनुमति दी गई है।

जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन (DSR) के आधार पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा कला, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग से अनापत्ति मिलने के बाद खान एवं भूतत्व विभाग ने खनन पट्टों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी खनन पट्टों की ई-नीलामी कराने का निर्णय लिया है। यह नीलामी केंद्र सरकार की एजेंसी MSTC के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगी, जिससे योग्य कंपनियां प्रतिस्पर्धी तरीके से भाग ले सकेंगी।

विभाग का कहना है कि स्थानीय स्तर पर पत्थर उत्पादन बढ़ने से दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी। वर्तमान में बाहर से पत्थर मंगाने पर परिवहन और अन्य खर्च जुड़ने से निर्माण लागत बढ़ जाती है। नए खनन क्षेत्र शुरू होने के बाद बाजार में पत्थर की उपलब्धता बेहतर होगी और कीमतों में भी कमी आने की संभावना है। इसका सीधा लाभ सरकारी निर्माण योजनाओं के साथ-साथ निजी निर्माण कार्यों को भी मिलेगा।

विभागीय जानकारी के अनुसार नवादा जिले के आठ खनन पट्टों के लिए निविदा पहले ही जारी की जा चुकी है, जबकि शेष भूखंडों के लिए भी जल्द ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू होगी। वर्तमान में राज्य में सीमित संख्या में सक्रिय पत्थर खदानें हैं, ऐसे में नए भूखंडों के शुरू होने से खनन क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है।

स्वीकृत क्षेत्रों में गया जिले के गोरे, जगरनाथपुर, मिर्जापुर और कोशमा, बांका जिले के शंभूगंज क्षेत्र, शेखपुरा के मटोखर, सुरदासपुर, जमुआरा और नीरपुर तथा नवादा के भदोखरा, पहरेठ, टुंगी, महिमन दीघा और खखटुआ जैसे इलाके शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इस निर्णय से औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

खनन और विकास के बीच संतुलन जरूरी

पत्थर खनन से विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण और नियमों का कड़ाई से पालन भी उतना ही आवश्यक है। यदि पारदर्शी तरीके से खनन किया गया तो इसका लाभ उद्योग, रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था—तीनों को मिल सकता है।

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