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Prashant Kishor Property: बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर ने घोषित की 96 करोड़ की संपत्ति, पत्नी डॉ. जाह्नवी दास के नाम 101.93 करोड़ की दौलत

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Alam Ki Khabar: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में नामांकन के दौरान प्रशांत किशोर ने चुनावी हलफनामे में अपनी और पत्नी डॉ. जाह्नवी दास की संपत्ति का ब्यौरा दिया। दोनों की कुल घोषित संपत्ति करीब 198 करोड़ रुपये है। जानिए उनकी सबसे बड़ी संपत्ति, कंपनी में हिस्सेदारी और हलफनामे की अन्य प्रमुख बातें।

पटना, 14 जुलाई। आलम की खबर: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जनसुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर के नामांकन के बाद उनके चुनावी हलफनामे में दर्ज संपत्ति का विवरण चर्चा का विषय बन गया है। हलफनामे के अनुसार प्रशांत किशोर ने अपने नाम लगभग 96.06 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति घोषित की है, जबकि उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास के नाम करीब 101.93 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज है। इस तरह दंपति की कुल घोषित संपत्ति लगभग 198 करोड़ रुपये के आसपास पहुंचती है। दस्तावेजों के मुताबिक डॉ. जाह्नवी दास की चल संपत्ति करीब 89.51 करोड़ रुपये है, जिसमें बैंक जमा, निवेश और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियां शामिल हैं। हलफनामे में बिहार, दिल्ली और गाजियाबाद में स्थित फ्लैट, प्लॉट तथा अन्य अचल संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। प्रशांत किशोर की सबसे बड़ी संपत्ति उनकी कंपनी Vedhas Ventures Private Limited में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 95.26 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। इसके अलावा उनके पास करोड़ों रुपये की बैंक एफडी और अन्य निवेश भी हैं। चुनावी दस्तावेजों में यह भी बताया गया है कि डॉ. जाह्नवी दास पेशे से डॉक्टर रही हैं और स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य कर चुकी हैं। बाद में उन्होंने चिकित्सा अभ्यास छोड़कर पारिवारिक जिम्मेदारियों पर ध्यान दिया। हलफनामे में प्रशांत किशोर ने अपने खिलाफ दर्ज आठ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी भी दी है। इनमें अधिकांश मामले वर्ष 2024 और 2025 के दौरान दर्ज हुए हैं। हालांकि, अब तक किसी भी मामले में उन्हें दोषी घोषित नहीं किया गया है। चुनावी हलफनामा उम्मीदवारों की वित्तीय और कानूनी स्थिति को सार्वजनिक करने की संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है, जिससे मतदाताओं को उम्मीदवारों के बारे में विस्तृत जानकारी मिल सके।

चुनावी हलफनामे से क्या संदेश मिलता है

लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी हलफनामा पारदर्शिता का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इससे मतदाताओं को उम्मीदवार की संपत्ति, आय, निवेश और लंबित मामलों की जानकारी उपलब्ध होती है, ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें। चुनाव आयोग की यह व्यवस्था चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मानी जाती है।

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