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Bihar Digital Education: बिहार के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा का सपना अधूरा, PGI-D रिपोर्ट में सभी जिले फेल

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Alam Ki Khabar: शिक्षा मंत्रालय की PGI-D 2025-26 रिपोर्ट में बिहार के सरकारी स्कूलों की डिजिटल शिक्षा की स्थिति चिंताजनक सामने आई है। किसी भी जिले को डिजिटल लर्निंग में 20 अंक तक नहीं मिले। जानिए पूरी रिपोर्ट।

पटना, 14 जुलाई। आलम की खबर: शिक्षा मंत्रालय की जिला प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI-D) 2025-26 रिपोर्ट ने बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने रखी है, जिसने डिजिटल शिक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य का कोई भी जिला डिजिटल लर्निंग श्रेणी में 50 में से 20 अंक तक हासिल नहीं कर सका। इससे साफ संकेत मिलता है कि स्मार्ट क्लास, हाई-स्पीड इंटरनेट, कंप्यूटर लैब और तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था का विस्तार अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। नई शिक्षा नीति में डिजिटल शिक्षा को प्राथमिकता दिए जाने के बावजूद सरकारी स्कूलों में डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि समग्र प्रदर्शन के मामले में कई जिलों ने सुधार दर्ज किया है। नालंदा 311 अंकों के साथ राज्य में पहले स्थान पर रहा, जबकि शेखपुरा 309 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचा। दोनों जिलों को 'प्रचेष्टा-1' श्रेणी में शामिल किया गया है। मुंगेर और पटना ने 288-288 अंक प्राप्त किए, जबकि भागलपुर ने पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपनी रैंकिंग में सुधार किया। इसके बावजूद डिजिटल लर्निंग के क्षेत्र में इन जिलों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। राजधानी पटना को इस श्रेणी में केवल 12 अंक मिले, जबकि नालंदा को 15 और शेखपुरा को 16 अंक प्राप्त हुए। भागलपुर को भी मात्र 13 अंक मिले और पिछले वर्ष की तुलना में इस क्षेत्र में कोई सुधार दर्ज नहीं किया गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्कूल सुरक्षा और बाल संरक्षण जैसे मानकों पर भी कई जिलों का प्रदर्शन कमजोर रहा। दूसरी ओर अररिया 223 अंकों के साथ सबसे नीचे रहा, जबकि सीतामढ़ी और मधुबनी को 225-225 अंक प्राप्त हुए। राज्य का कोई भी जिला शिक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च श्रेणियों तक नहीं पहुंच पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल भवन निर्माण या नामांकन बढ़ाने से शिक्षा की गुणवत्ता नहीं सुधरेगी। डिजिटल संसाधनों, प्रशिक्षित शिक्षकों, बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी और आधुनिक शिक्षण तकनीकों के बिना सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि यदि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से निवेश नहीं किया गया तो नई शिक्षा नीति के डिजिटल विजन को धरातल पर उतारना चुनौती बना रहेगा।

डिजिटल शिक्षा की रफ्तार बढ़ाना समय की जरूरत

आज के दौर में डिजिटल शिक्षा केवल सुविधा नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। सरकारी स्कूलों में तकनीकी संसाधनों की कमी सीधे छात्रों की प्रतिस्पर्धी क्षमता को प्रभावित करती है। यदि बिहार को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में पहुंचना है तो स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, इंटरनेट और शिक्षकों के डिजिटल प्रशिक्षण पर तेजी से काम करना होगा। केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन ही शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव ला सकता है।

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