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Bihar Village Tax: बिहार के गांवों में मकान, दुकान, हाट-बाजार पर लगेगा शुल्क, सरकार ने मंजूर किए नए नियम

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Alam Ki Khabar: बिहार सरकार ने ग्राम पंचायत कर, दर और शुल्क नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी है। नए नियमों के तहत गांवों में होल्डिंग टैक्स, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और विभिन्न सेवाओं पर शुल्क लिया जा सकेगा।

पटना, 17 जुलाई। आलम की खबर: बिहार सरकार ने ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत कर, दर और शुल्क नियमावली-2026 को मंजूरी देते हुए पंचायतों के लिए विभिन्न कर और शुल्क की अधिकतम दरें तय कर दी हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायतें अपने क्षेत्र में निर्धारित सीमा के भीतर होल्डिंग टैक्स और विभिन्न सेवाओं पर शुल्क वसूल सकेंगी। सरकार का कहना है कि इससे पंचायतों की आय बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। नए प्रावधानों के अनुसार पंचायत क्षेत्र के पक्के मकानों पर अधिकतम 100 रुपये वार्षिक होल्डिंग टैक्स और अर्ध-पक्के मकानों पर अधिकतम 50 रुपये वार्षिक कर लगाया जा सकेगा। कच्चे या मिट्टी के मकानों को इस कर से छूट दी गई है। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के लाभार्थियों के लिए 25 रुपये वार्षिक कर निर्धारित किया गया है, जिसका भुगतान संबंधित विभाग करेगा। सिर्फ आवासीय भवन ही नहीं, बल्कि होटल, विवाह भवन, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, सिनेमा हॉल और अन्य बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी निर्धारित सीमा के अनुसार वार्षिक शुल्क लिया जा सकेगा। इसके अलावा हाट-बाजार, मेले, बस पड़ाव, टेंपो स्टैंड, दुकानों और पशु मेलों से भी पंचायतें शुल्क वसूल सकेंगी। नई नियमावली में पेयजल आपूर्ति, कचरा संग्रहण और सार्वजनिक शौचालय जैसी सुविधाओं के लिए भी सेवा शुल्क लेने का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इन संसाधनों से पंचायतों को अपनी आय बढ़ाने और स्थानीय विकास कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि कर और शुल्क से प्राप्त राशि पंचायतों के विकास पर ही खर्च की जाएगी। इससे ग्राम पंचायतें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी और स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जा सकेगा। हालांकि इस निर्णय के बाद गांवों में नई टैक्स व्यवस्था को लेकर चर्चा भी तेज हो गई है।

गांवों की आय बढ़ाने की पहल

सरकार का तर्क है कि पंचायतों को वित्तीय रूप से मजबूत किए बिना ग्रामीण विकास को गति देना कठिन है। नई नियमावली का उद्देश्य स्थानीय निकायों को अपने संसाधन बढ़ाने का अधिकार देना है, ताकि सड़क, सफाई, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जा सके।

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