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Banka News: शंभूगंज के तत्कालीन थानाध्यक्ष राम मोहन कुमार निलंबित, जांच में लापरवाही और नियमों की अनदेखी उजागर

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Alam Ki Khabar | बांका पुलिस ने शंभूगंज थाना के तत्कालीन प्रभारी थानाध्यक्ष राम मोहन कुमार को मारपीट मामले की जांच में लापरवाही, नियमों की अनदेखी और वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

बांका, 20 जुलाई। आलम की खबर: बांका पुलिस ने विभागीय अनुशासन के मामले में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए शंभूगंज थाना के तत्कालीन प्रभारी थानाध्यक्ष राम मोहन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच में कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही, नियमों की अनदेखी और वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक ने यह कार्रवाई की।

पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 12 जुलाई 2026 को शंभूगंज थाना क्षेत्र के करसंडा गांव में दो पक्षों के बीच विवाद और मारपीट की घटना हुई थी। मामले में घायल धीरज कुमार को पुलिस थाना लेकर पहुंची थी तथा इस संबंध में शंभूगंज थाना में काउंटर केस संख्या 215/26 और 217/26 दर्ज किया गया था।

जांच के दौरान यह सामने आया कि तत्कालीन थानाध्यक्ष ने घायल का समय पर जख्म प्रतिवेदन जारी नहीं कराया। इतना ही नहीं, शराब सेवन की आशंका के बावजूद ब्रेथ एनालाइजर से जांच कराए बिना ही घायल को अस्पताल भेज दिया गया। विभागीय जांच में यह भी आरोप सामने आया कि घटना की सूचना समय पर वरीय अधिकारियों को नहीं दी गई, आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को सही स्थिति से अवगत नहीं कराया गया।

पुलिस निरीक्षक-सह-अंचल निरीक्षक की जांच रिपोर्ट एवं अनुशंसा के आधार पर पुलिस अधीक्षक ने प्रथम दृष्टया आरोप सही पाते हुए तत्कालीन प्रभारी थानाध्यक्ष राम मोहन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, बांका निर्धारित किया गया है।

बांका पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कर्तव्य में लापरवाही, नियमों की अनदेखी और अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

जवाबदेही से ही मजबूत होगी पुलिस व्यवस्था

पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता तभी कायम रहती है जब कानून का पालन कराने वाले अधिकारी स्वयं भी कानून और विभागीय नियमों का पूरी ईमानदारी से पालन करें। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई होना जनता के विश्वास को मजबूत करता है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही ही पुलिस व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।

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