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Motihari Posting Scam: मोतिहारी एसडीओ से 25 लाख की रंगदारी मांगने वाला आरोपी गिरफ्तार, ट्रांसफर-पोस्टिंग सिंडिकेट की जांच तेज

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Alam Ki Khabar: मोतिहारी में एसडीओ की पोस्टिंग के नाम पर 25 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में मुख्य आरोपी राजन जायसवाल गिरफ्तार हुआ है। पुलिस को मोबाइल से कई अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं और संभावित ट्रांसफर-पोस्टिंग सिंडिकेट की जांच जारी है।

मोतिहारी, 22 जुलाई। आलम की खबर: बिहार में प्रशासनिक अधिकारियों की पोस्टिंग के नाम पर कथित ठगी और रंगदारी का एक बड़ा मामला सामने आया है। मोतिहारी सदर के नवपदस्थापित एसडीओ अरुण कुमार से 25 लाख रुपये की मांग करने के आरोप में पुलिस ने मुख्य आरोपी राजन जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है। साइबर थाना और बिहार एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में हुई इस गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुट गई हैं।

पुलिस के अनुसार आरोपी को पटना आने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस से दबोचा गया। गिरफ्तारी के बाद उसके मोबाइल फोन की जांच में कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। शुरुआती जांच में व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनके आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं यह मामला किसी बड़े ट्रांसफर-पोस्टिंग गिरोह से तो जुड़ा नहीं है।

जांच में सामने आया है कि हाल ही में बिहार प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के तबादले से पहले आरोपी लगातार कुछ अधिकारियों के संपर्क में था। उसने तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी अरुण कुमार को भरोसा दिलाया कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें मोतिहारी सदर एसडीओ के पद पर पदस्थापित करवा देगा। इसके बदले 25 लाख रुपये की मांग की गई थी।

जब तबादला सूची जारी होने के बाद अरुण कुमार की नियुक्ति मोतिहारी सदर एसडीओ के रूप में हुई तो आरोपी ने इसका श्रेय खुद को देते हुए रुपये की मांग तेज कर दी। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने व्हाट्सएप कॉल और संदेशों के माध्यम से लगातार दबाव बनाया और पैसे नहीं देने पर पोस्टिंग रद्द कराने या रुकवाने की धमकी भी दी। अधिकारी को कथित तौर पर कुछ सरकारी फाइलों के स्क्रीनशॉट भेजकर अपने प्रभाव का दावा किया गया।

लगातार मिल रही धमकियों के बाद एसडीओ अरुण कुमार ने साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर साइबर डीएसपी प्रतिश कुमार के नेतृत्व में तकनीकी जांच शुरू हुई। कॉल डिटेल और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी गई। जैसे ही जानकारी मिली कि आरोपी वंदे भारत एक्सप्रेस से पटना की ओर जा रहा है, बिहार एसटीएफ को सूचना दी गई। संयुक्त कार्रवाई में मोकामा के पास ट्रेन से आरोपी को हिरासत में लेकर मोतिहारी पुलिस के हवाले कर दिया गया।

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। आरोपी के मोबाइल से दस से अधिक आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के मोबाइल नंबर मिलने की बात कही जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन नंबरों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था और क्या आरोपी किसी संगठित नेटवर्क के लिए काम कर रहा था या सिर्फ प्रभावशाली लोगों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने की कोशिश करता था।

साइबर पुलिस का कहना है कि मोबाइल से मिले डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी ने पहले भी इसी तरह कितने अधिकारियों या अन्य लोगों को अपना निशाना बनाया। यदि जांच में किसी बड़े गिरोह की पुष्टि होती है तो इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

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विशेष टिप्पणी

यदि प्रशासनिक पदों की पोस्टिंग के नाम पर फर्जी पैरवी और रंगदारी का यह आरोप सही साबित होता है, तो यह केवल एक ठगी का मामला नहीं बल्कि सरकारी व्यवस्था की साख से जुड़ा गंभीर विषय है। निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई से ही ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।

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