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Bihar Rural Roads: बिहार में अधूरी ग्रामीण सड़कें होंगी पूरी, 50 करोड़ से बड़े पैकेज पर रोक

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Alam Ki Khabar: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में ग्रामीण सड़कों की बदहाल स्थिति का मुद्दा गूंजा। ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने घोषणा की कि 50 करोड़ रुपये से बड़े सड़क पैकेज नहीं होंगे और अधूरी सड़क व पुल-पुलिया योजनाओं का निर्माण पूरा कराया जाएगा।

पटना, 22 जुलाई। आलम की खबर: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन ग्रामीण क्षेत्रों की अधूरी और जर्जर सड़कों का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठा। प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष के विधायक ने ही अपनी सरकार से ग्रामीण सड़क परियोजनाओं में हो रही देरी पर जवाब मांगा। इस पर ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य में अब 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले बड़े सड़क पैकेज नहीं बनाए जाएंगे तथा जिन सड़क और पुल-पुलिया योजनाओं का कार्य बीच में रुक गया है, उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा कराया जाएगा।

कल्याणपुर से भाजपा विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि कई बड़ी परियोजनाओं का टेंडर जारी होने के बावजूद वर्षों बाद भी निर्माण कार्य अपेक्षित गति से पूरा नहीं हो सका। उन्होंने सुझाव दिया कि छोटे-छोटे पैकेज बनाकर स्थानीय स्तर पर कार्य कराया जाए, ताकि सड़क निर्माण समय पर पूरा हो सके और लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सके।

जवाब में ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि सरकार ने इस संबंध में महत्वपूर्ण नीति निर्णय लिया है। अब विभाग की ओर से 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले बड़े सड़क पैकेज जारी नहीं किए जाएंगे। उनका कहना था कि इससे बिहार के स्थानीय संवेदकों को अधिक अवसर मिलेगा और निर्माण कार्य भी निर्धारित समय में पूरा होने की संभावना बढ़ेगी।

मंत्री ने सदन को बताया कि विभाग पहले ही छोटे पैकेजों में सड़क निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया अपनाने लगा है। भविष्य में ग्रामीण कार्य विभाग की अधिकांश परियोजनाएं इसी व्यवस्था के तहत संचालित की जाएंगी ताकि गुणवत्ता और समय-सीमा दोनों का बेहतर पालन हो सके।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन सड़कों और पुल-पुलियाओं का शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या अन्य मंत्री एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा किया गया था, लेकिन किसी कारणवश उनका टेंडर रद्द हो गया या निर्माण अधूरा रह गया, उन सभी परियोजनाओं को उपलब्ध बजट के अनुसार पूरा कराया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अधूरी परियोजनाओं को पूरा कर ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है। इसके लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध होते ही लंबित योजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया जाएगा।

सदन में हुई इस चर्चा के बाद ग्रामीण सड़क निर्माण की धीमी गति और बड़ी परियोजनाओं के प्रबंधन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सरकार का दावा है कि नई नीति से निर्माण कार्य में तेजी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी पहले से अधिक मजबूत होगी।

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विशेष टिप्पणी

ग्रामीण सड़कें गांवों की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा होती हैं। यदि निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं होता तो इसका सीधा असर किसानों, छात्रों और आम लोगों की आवाजाही पर पड़ता है। छोटे पैकेजों में टेंडर की नई नीति तभी सफल मानी जाएगी जब अधूरी परियोजनाएं तय समय-सीमा के भीतर पूरी हों।

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