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Bihar CAG Report: 62,632 करोड़ रुपये के खर्च का पूरा हिसाब नहीं, विधानसभा में पेश रिपोर्ट से बढ़े सवाल

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Alam Ki Khabar: बिहार विधानसभा में पेश CAG रिपोर्ट में 62,632 करोड़ रुपये के खर्च का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं होने और हजारों करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित होने का खुलासा हुआ है।

पटना, 24 जुलाई। आलम की खबर: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सरकार द्वारा किए गए 62,632 करोड़ रुपये के खर्च का पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है, जबकि बड़ी राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) भी अब तक संबंधित विभागों की ओर से जमा नहीं किए गए हैं।

विधानसभा में वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा रखी गई रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए राज्य सरकार ने लगभग 3.64 लाख करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया था। हालांकि रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि बजट का लगभग 21 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित अवधि के दौरान खर्च ही नहीं हो सका। इससे कई योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और बजटीय प्रबंधन पर सवाल उठे हैं।

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक 62,632 करोड़ रुपये के खर्च से संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराए गए। वहीं कुल लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्रों की राशि 92,131 करोड़ रुपये बताई गई है। इनमें केवल वित्तीय वर्ष 2024-25 से संबंधित लगभग 39,228.57 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।

रिपोर्ट में कुछ विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। ऑडिट के दौरान अररिया और पूर्वी चंपारण में ऐसे पुल निर्माण कार्यों का उल्लेख किया गया, जिन पर सरकारी धन खर्च होने का रिकॉर्ड मौजूद है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। इन परियोजनाओं पर लगभग 3.30 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उपयोगिता प्रमाण पत्र किसी भी सरकारी योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। जब किसी विभाग, एजेंसी या संस्था को सरकारी राशि जारी की जाती है तो उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर यह प्रमाणित करना होता है कि राशि स्वीकृत उद्देश्य के लिए ही खर्च की गई। ऐसे प्रमाण पत्र लंबित रहने से सरकारी खर्च की पारदर्शिता और निगरानी प्रभावित होती है।

रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष ने वित्तीय अनुशासन और योजनाओं की निगरानी को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। वहीं सरकार की ओर से रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं पर विभागीय स्तर पर समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई है।

CAG की रिपोर्ट का उद्देश्य सरकारी खर्च का ऑडिट कर वित्तीय प्रबंधन की स्थिति का मूल्यांकन करना होता है। ऐसे में रिपोर्ट में दर्ज टिप्पणियां भविष्य में प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

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नजरिया

सार्वजनिक धन का प्रत्येक रुपया जनता के हित से जुड़ा होता है। इसलिए सरकारी योजनाओं में समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा होना और खर्च का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध कराना सुशासन की बुनियादी आवश्यकता है। ऑडिट रिपोर्ट में उठाए गए सवालों का समयबद्ध और पारदर्शी जवाब जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए जरूरी है।

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