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Bihar Vigilance List: बिहार में 5 हजार से अधिक दागी अधिकारी-कर्मचारी चिन्हित, शिक्षा विभाग सबसे आगे

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Alam Ki Khabar: बिहार में 5,136 दागी अधिकारी और कर्मचारियों की सूची निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने जारी की है। शिक्षा विभाग में सबसे अधिक 988 मामले दर्ज हैं। जानिए किन विभागों में कितने अधिकारी जांच के दायरे में हैं।

पटना, 26 जुलाई। आलम की खबर: बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों अधिकारी और कर्मचारी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की सूची में शामिल हैं। विभाग की ओर से 30 जून 2026 तक तैयार की गई सूची सभी विभागाध्यक्षों, प्रमंडलीय आयुक्तों और राज्य के सभी 38 जिलों के जिलाधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई है। सूची में ऐसे अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं जिनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के साथ न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 5,136 मामलों से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं। इनमें सबसे अधिक 988 मामले शिक्षा विभाग से संबंधित हैं। इसके बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के 545, पंचायती राज विभाग के 348, बिहार पुलिस के 288 तथा सामान्य प्रशासन विभाग के 251 अधिकारी और कर्मचारी निगरानी की सूची में शामिल हैं।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो प्रत्येक वर्ष जनवरी और जुलाई महीने में ऐसी अद्यतन सूची संबंधित विभागों को भेजता है। इस सूची में केवल उन्हीं अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम शामिल किए जाते हैं जिनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने के बाद न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी होती है। विभाग इसी आधार पर संबंधित कर्मियों की निगरानी स्वच्छता का आकलन करते हैं।

नई सूची जारी होने के बाद विभागों को अपने अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रोन्नति से संबंधित प्रक्रिया में अलग से निगरानी विभाग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। विभाग उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर स्वयं आवश्यक निर्णय ले सकेंगे।

भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर बिहार में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो लगातार सक्रिय अभियान चला रहा है। समय-समय पर विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाते हैं। शिक्षा, राजस्व, पुलिस, बिजली, पंचायत और अन्य विभागों में कार्रवाई लगातार जारी रहती है। सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहनशीलता की नीति के तहत दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

हालांकि किसी अधिकारी या कर्मचारी का नाम निगरानी सूची में शामिल होने का अर्थ अंतिम रूप से दोष सिद्ध होना नहीं है। संबंधित मामलों का अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश के आधार पर होगा।

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विशेष टिप्पणी:

निगरानी विभाग की सूची प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे विभागों को अपने कर्मियों के सेवा अभिलेखों की समीक्षा करने में सुविधा मिलेगी। साथ ही यह संदेश भी जाता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने पर प्रशासनिक स्तर पर भी उसका प्रभाव पड़ता है। पारदर्शी व्यवस्था और समयबद्ध कार्रवाई से ही आम जनता का सरकारी तंत्र पर विश्वास मजबूत हो सकता है।

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