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Bihar Sugar Mills: बिहार की बंद 9 चीनी मिलों को फिर मिलेगी नई जिंदगी, सरकार ने निवेश का रास्ता किया साफ

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Alam Ki Khabar: बिहार सरकार ने बंद पड़ी 9 चीनी मिलों को दोबारा चालू करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। कानून में संशोधन के बाद निजी निवेशकों और सहकारी समितियों को मिलों के संचालन का रास्ता साफ हो गया है।

पटना, 26 जुलाई। आलम की खबर: बिहार में वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चीनी उपक्रम (अधिग्रहण) अधिनियम में संशोधन कर बंद पड़ी नौ चीनी मिलों की जमीन निजी निवेशकों और सहकारी समितियों को संचालन के लिए उपलब्ध कराने का रास्ता साफ कर दिया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से राज्य में चीनी उद्योग को नई गति मिलेगी और गन्ना किसानों के साथ-साथ हजारों लोगों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।

अब तक वर्ष 1985 के अधिनियम के कारण इन मिलों का संचालन केवल राज्य सरकार के अधिकार में था। इसी वजह से निजी निवेशकों को मिलों की जमीन और परिसंपत्तियां हस्तांतरित करने में कानूनी बाधाएं आ रही थीं। गन्ना उद्योग विभाग द्वारा कानून में संशोधन किए जाने के बाद अब यह बाधा दूर हो गई है और बंद मिलों के पुनर्जीवन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

सरकार ने पहले चरण में मधुबनी की सकरी चीनी मिल, दरभंगा की रैयाम चीनी मिल और गोपालगंज की सासामूसा चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की योजना बनाई है। लक्ष्य रखा गया है कि नवंबर 2026 से इन मिलों में पेराई सत्र शुरू हो सके। सकरी और रैयाम चीनी मिलों का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा, जबकि सासामूसा चीनी मिल के लिए निवेशक चयन की प्रक्रिया जारी है।

राज्य सरकार और सहकारिता विभाग ने राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ (एनएफसीएसएफ), नई दिल्ली के साथ समझौता कर दोनों सहकारी मिलों की तकनीकी और आर्थिक संभावनाओं का अध्ययन कराया है। फिजिबिलिटी रिपोर्ट मिलने के बाद पुनः संचालन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इंडियन पोटाश लिमिटेड से भी प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।

सरकार का उद्देश्य केवल बंद कारखानों को चालू करना नहीं बल्कि बिहार की गन्ना आधारित अर्थव्यवस्था को दोबारा मजबूत बनाना है। सात निश्चय-3 के तहत 'समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार' अभियान में चीनी उद्योग को प्रमुख स्थान दिया गया है। विभाग का मानना है कि उद्योग के पुनर्जीवन से किसानों को अपनी फसल का बेहतर बाजार मिलेगा, स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बिहार कभी देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में शामिल था, लेकिन समय के साथ कई मिलें बंद होती चली गईं। अब सरकार के इस फैसले से उम्मीद जगी है कि वर्षों से बंद पड़े कारखानों में फिर से उत्पादन शुरू होगा और गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। हालांकि इस योजना की सफलता निवेश, पारदर्शी प्रबंधन और तय समय पर संचालन शुरू होने पर निर्भर करेगी।

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विशेष टिप्पणी:

बिहार की अर्थव्यवस्था में चीनी उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यदि बंद पड़ी मिलें समय पर चालू हो जाती हैं तो इसका सीधा लाभ किसानों, मजदूरों और स्थानीय व्यापारियों को मिलेगा। सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि घोषित योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि निर्धारित समय पर धरातल पर भी दिखाई दें।

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