:
Breaking News

Siwan Violence: बिहार बंद के दौरान सीवान हिंसा पर उठे सवाल, गोली किसने चलाई? जांच पर टिकी सबकी नजर

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar: बिहार बंद के दौरान सीवान में हुई हिंसा के बाद फायरिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस और विपक्ष के दावे अलग-अलग हैं, जबकि गोली किसकी थी इसका खुलासा जांच रिपोर्ट के बाद ही होगा।

सीवान, 26 जुलाई। आलम की खबर: नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित बिहार बंद के दौरान सीवान में हुई हिंसा अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गई है, बल्कि पुलिस कार्रवाई, राजनीतिक आरोपों और निष्पक्ष जांच का विषय बन गई है। प्रदर्शन के दौरान पथराव, आंसू गैस और फायरिंग की घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि घायल छात्रों को गोली आखिर किसने मारी। फिलहाल इस सवाल का आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है और मामले की जांच जारी है।

पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने सुरक्षाबलों पर पथराव किया, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। पुलिस का दावा है कि सबसे पहले उपद्रवी तत्वों की ओर से फायरिंग हुई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई। वहीं इस घटना में सीवान के एसपी पूरन कुमार झा, दो डीएसपी सहित कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी पुलिस ने कही है।

दूसरी ओर इस हिंसा में तीन प्रदर्शनकारी भी गोली लगने से घायल हुए हैं। घायलों की पहचान सीवान निवासी आरिफ, बुलेट कुमार गोंड और उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी आकाश कुमार के रूप में हुई है। तीनों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया। घटना के बाद पुलिस ने हिंसा और उपद्रव के आरोप में 65 लोगों को हिरासत में लिया है तथा सीसीटीवी फुटेज और वीडियो के आधार पर अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।

घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों पर गोलियां चलाईं। दूसरी ओर पुलिस ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

सीवान के पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने भी कहा है कि घायल युवकों को लगी गोली किस हथियार से चली और उसका स्रोत क्या था, इसका पता जांच के बाद ही चल सकेगा। ऐसे में फिलहाल किसी भी दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। माना जा रहा है कि बैलिस्टिक जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट, वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन यदि प्रदर्शन हिंसक हो जाए तो कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच ही यह तय कर सकती है कि हिंसा की जिम्मेदारी किसकी थी और गोली किसने चलाई।

यह भी पढ़ें:

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार के 100 दिन: ₹11,464 करोड़ की विकास योजनाओं का शुभारंभ।

बिहार की बंद पड़ी 9 चीनी मिलों को फिर शुरू करने की तैयारी।

विशेष टिप्पणी:

सीवान की घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर प्रदर्शनकारियों के घायल होने की घटना है तो दूसरी ओर पुलिसकर्मियों के भी घायल होने का दावा है। ऐसे में किसी भी पक्ष के आरोप या दावे को अंतिम सत्य मानने से पहले निष्पक्ष जांच पूरी होना आवश्यक है। जांच रिपोर्ट ही यह स्पष्ट करेगी कि फायरिंग किसने की और कानून के दायरे में किसकी जिम्मेदारी तय होती है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *