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Bihar News: दरभंगा से पहली बार कनाडा रवाना हुई 7 टन फ्लेवर्ड मखाने की खेप, मिथिला के किसानों के लिए खुला वैश्विक बाजार

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Alam Ki Khabar: बिहार के दरभंगा से पहली बार 7 टन फ्लेवर्ड मखाने की खेप समुद्री मार्ग से कनाडा भेजी गई। APEDA की पहल से किसानों को बेहतर कीमत मिलने और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच का रास्ता खुला है।

दरभंगा। आलम की खबर: मिथिलांचल की पहचान बन चुका बिहार का मखाना अब वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ा चुका है। दरभंगा से पहली बार फ्लेवर्ड मखाने की बड़ी खेप समुद्री मार्ग के जरिए कनाडा के लिए रवाना की गई है। इस उपलब्धि को न केवल बिहार के कृषि क्षेत्र बल्कि मखाना उत्पादकों और निर्यात उद्योग के लिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आने वाले समय में बिहार के मखाने की मांग विदेशों में और बढ़ेगी तथा किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर मूल्य मिलेगा।

दरभंगा औद्योगिक क्षेत्र से कुल 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाने को दो विशेष कंटेनरों में पैक कर गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के लिए भेजा गया। वहां से यह खेप समुद्री मार्ग के जरिए कनाडा पहुंचेगी। पहली बार इतनी व्यवस्थित तरीके से फ्लेवर्ड मखाने का निर्यात होने से मखाना उद्योग से जुड़े कारोबारियों में भी उत्साह का माहौल है।

इस निर्यात अभियान को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से पूरा किया गया। अधिकारियों का कहना है कि बिहार के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और मखाना इस दिशा में सबसे संभावनाशील उत्पादों में से एक है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस उपलब्धि को बिहार के किसानों के लिए बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच मिलने से किसानों को पहले की तुलना में कहीं बेहतर मूल्य मिलेगा। साथ ही बिहार के प्रीमियम मखाने की पहचान अब दुनिया के नए बाजारों तक पहुंचेगी, जिससे निर्यात के नए अवसर भी बनेंगे।

एपेडा के अधिकारियों के अनुसार अब मखाने के व्यापार में बिचौलियों की भूमिका कम होगी। किसानों और निर्यातकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होने से उत्पादकों को अपनी उपज का वास्तविक मूल्य मिलेगा। अनुमान है कि किसानों को पहले की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है। इससे मखाना उत्पादन को भी नई गति मिलेगी और अधिक किसान इस फसल की ओर आकर्षित होंगे।

राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के वैज्ञानिकों का कहना है कि मिथिला क्षेत्र का मखाना अपने स्वाद, गुणवत्ता और पौष्टिकता के कारण पहले से ही देशभर में प्रसिद्ध है। अब कनाडा जैसे विकसित बाजार में इसकी पहुंच बनने से अन्य देशों में भी निर्यात के रास्ते खुलेंगे। इससे बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यदि निर्यात का दायरा लगातार बढ़ता रहा तो दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार और आसपास के मखाना उत्पादक जिलों के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। मखाना प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और निर्यात से जुड़े उद्योगों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बिहार आज देश में सबसे अधिक मखाना उत्पादन करने वाला राज्य है। देश के कुल मखाना उत्पादन का बड़ा हिस्सा मिथिलांचल से आता है। यही कारण है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों इस उत्पाद को वैश्विक बाजार में स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। आधुनिक पैकेजिंग, गुणवत्ता परीक्षण और निर्यात मानकों को अपनाने से बिहार का मखाना विदेशी उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों को निर्यात आधारित बाजार लगातार मिलता रहा तो वे आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए भी प्रेरित होंगे। इससे उत्पादन बढ़ेगा, गुणवत्ता में सुधार होगा और बिहार का मखाना दुनिया के प्रमुख सुपरफूड उत्पादों में अपनी अलग पहचान बना सकेगा।

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विशेष टिप्पणी

दरभंगा से कनाडा के लिए रवाना हुई मखाने की पहली खेप केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बिहार के किसानों की मेहनत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है। यदि इसी तरह गुणवत्ता, ब्रांडिंग और निर्यात पर लगातार काम होता रहा तो आने वाले वर्षों में मखाना बिहार की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत कृषि निर्यात उत्पाद बन सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और मिथिला की पहचान दुनिया के बाजारों में और मजबूत होगी।

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