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Samastipur News:समस्तीपुर के उत्पाद अधीक्षक पर छेड़छाड़, अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप, भाजपा विधायक की शिकायत पर जांच

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Alam Ki Khabar: समस्तीपुर के उत्पाद अधीक्षक पर महिला पुलिसकर्मियों से छेड़छाड़, दलालों के जरिए अवैध वसूली और थानेदारों पर पैसे का दबाव बनाने के आरोप लगे हैं। भाजपा विधायक राजेश कुमार सिंह की शिकायत पर विभागीय जांच जारी है।

समस्तीपुर, 31 जुलाई। आलम की खबर: समस्तीपुर जिले के उत्पाद अधीक्षक के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित छेड़छाड़, दलालों के माध्यम से अवैध वसूली और उत्पाद थानों के प्रभारी अधिकारियों पर पैसों का दबाव बनाने जैसे आरोपों को लेकर मोहद्दीननगर से भाजपा विधायक राजेश कुमार सिंह ने मुख्य सचिव से शिकायत की है। शिकायत के बाद मद्य निषेध विभाग ने पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

भाजपा विधायक ने अपने शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि समस्तीपुर में पदस्थापित उत्पाद अधीक्षक का आचरण विभाग की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी विभागीय दलालों के जरिए अवैध वसूली कर रहे हैं तथा महिला पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। विधायक का कहना है कि अधिकारी के वरिष्ठ पद पर होने के कारण पीड़ित महिला कर्मी खुलकर शिकायत करने से डरती हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि उत्पाद थानों के प्रभारी अधिकारियों पर अवैध वसूली कर पैसे पहुंचाने का दबाव बनाया जाता है। जो अधिकारी ऐसा नहीं करते, उनका कुछ ही महीनों में तबादला कर दिया जाता है। विधायक ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई और तत्काल स्थानांतरण की मांग की है।

मुख्य सचिव को भेजी गई शिकायत के बाद मद्य निषेध विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आदेश दिया। विभाग की ओर से ईआईबी के उपायुक्त को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई और 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था। हालांकि निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी अंतिम जांच रिपोर्ट विभाग को नहीं सौंपी जा सकी है।

जांच अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही रिपोर्ट विभाग को सौंप दी जाएगी। उनके अनुसार सभी आरोपों की अलग-अलग बिंदुओं पर जांच की जा रही है ताकि तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जा सके।

इस बीच जांच अधिकारी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में उनके खिलाफ पूर्व में दर्ज निगरानी विभाग के एक मामले का उल्लेख किया गया है। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से कोई नई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

फिलहाल पूरे मामले में किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोप कितने सही हैं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और विभागीय निर्णय के आधार पर ही माना जाएगा।

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संपादकीय

किसी भी सरकारी अधिकारी पर महिला कर्मियों के उत्पीड़न और भ्रष्टाचार जैसे आरोप बेहद गंभीर होते हैं। ऐसे मामलों में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच आवश्यक है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं यदि आरोप निराधार हों तो संबंधित अधिकारी को भी न्याय मिलना चाहिए। कानून और प्रक्रिया का पालन ही ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण आधार है।

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