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Bihar News: बगहा में बाघ का आतंक जारी, 24 घंटे में दूसरे हमले में महिला की मौत

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Alam Ki Khabar: बिहार के बगहा पुलिस जिला में 24 घंटे के भीतर बाघ के दूसरे हमले में 45 वर्षीय महिला की मौत हो गई। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में दहशत है और वन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है।

बेतिया, 31 जुलाई। आलम की खबर: पश्चिम चंपारण के बगहा पुलिस जिला क्षेत्र में बाघ का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटे के भीतर बाघ के दूसरे हमले में एक महिला की जान चली गई, जबकि एक दिन पहले घायल हुई दूसरी महिला की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। लगातार हो रही घटनाओं ने सीमावर्ती गांवों के लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है।

ताजा घटना नौरंगिया थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या 13 की है। मृतका की पहचान रामायण चौधरी की 45 वर्षीय पत्नी उमरावती देवी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह यूपी-बिहार सीमा से सटे मदनपुर वन क्षेत्र के मिश्रौलिया रेता स्थित अपने धान के खेत में कृषि कार्य कर रही थीं। इसी दौरान गन्ने के खेत में छिपे बाघ ने अचानक हमला कर दिया और उन्हें घसीटते हुए खेत के अंदर ले गया।

खेत में मौजूद अन्य मजदूरों ने शोर मचाया तो आसपास के ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे। लोगों की भीड़ देखकर बाघ महिला को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया, लेकिन तब तक महिला की मौत हो चुकी थी।

घटना की सूचना मिलते ही वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मदनपुर वन क्षेत्र के अधिकारी नसीम अंसारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। नौरंगिया थाना पुलिस ने भी घटनास्थल पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।

लगातार दो दिनों में हुए हमलों के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से बाघ को जल्द पकड़ने या आबादी वाले क्षेत्र से दूर खदेड़ने की मांग की है। वन विभाग ने लोगों से अकेले खेतों में नहीं जाने और विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। साथ ही प्रभावित इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है और बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

लगातार हो रहे हमलों ने यह संकेत दिया है कि जंगल और आबादी के बीच संघर्ष की स्थिति गंभीर होती जा रही है। ऐसे में वन विभाग को केवल लोगों को सतर्क रहने की सलाह देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संवेदनशील गांवों में विशेष निगरानी, त्वरित बचाव दल और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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संपादकीय

बाघ संरक्षित वन्यजीव है, लेकिन मानव जीवन की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि लगातार आबादी वाले क्षेत्रों में बाघ पहुंच रहे हैं तो यह केवल वन विभाग ही नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन के लिए भी गंभीर चुनौती है। प्रभावित गांवों में नियमित गश्त, अलर्ट सिस्टम और त्वरित रेस्क्यू टीम की व्यवस्था समय की जरूरत है। वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

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