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Aurangabad News: औरंगाबाद में 50 हजार रुपये घूस लेते दारोगा गिरफ्तार, पोक्सो केस में फंसाने की धमकी का आरोप

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Alam Ki Khabar: औरंगाबाद के रिसियप थाना के एक दारोगा को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 50 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। शिकायतकर्ता ने राहत दिलाने के नाम पर घूस मांगने और पोक्सो केस में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया है।

औरंगाबाद, 1 अगस्त। आलम की खबर: बिहार के औरंगाबाद जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिसियप थाना में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर उमेश कुमार को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दारोगा ने मारपीट के एक मामले में राहत दिलाने के नाम पर पहले दो लाख रुपये की मांग की थी और रकम नहीं देने पर पोक्सो एक्ट में फंसाने की धमकी भी दी थी। सत्यापन के बाद निगरानी की टीम ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए आरोपी पुलिस अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।

निगरानी ब्यूरो के अनुसार शिकायत रिसियप थाना क्षेत्र के तेंदुआ गणपत गांव निवासी ग्रामीण चिकित्सक डॉ. लक्ष्मण राम ने दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नाली विवाद से जुड़े मारपीट के मामले की जांच कर रहे सब-इंस्पेक्टर उमेश कुमार लगातार उनसे रिश्वत की मांग कर रहे थे। शिकायत में यह भी कहा गया कि यदि मांग पूरी नहीं की गई तो उन्हें पोक्सो एक्ट के मामले में फंसा दिया जाएगा।

शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने आरोपों का सत्यापन कराया। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने पर विशेष टीम गठित की गई। शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच कथित तौर पर बाद में एक लाख रुपये में समझौता हुआ, जिसे दो किश्तों में देने की बात तय हुई। पहली किश्त के रूप में 50 हजार रुपये देने की योजना के अनुसार निगरानी टीम पहले से ही मौके पर तैनात थी।

बताया गया कि शिकायतकर्ता जब तय राशि लेकर रिसियप थाना पहुंचा तो सब-इंस्पेक्टर उसे थाना परिसर के पीछे स्थित पंचायत सरकार भवन के पास ले गए। जैसे ही आरोपी ने 50 हजार रुपये अपने कब्जे में लिए, पहले से घात लगाए निगरानी अधिकारियों ने उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी दारोगा को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम अपने साथ पटना ले गई, जहां आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार आरोपी को विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा, जिसके बाद आगे की न्यायिक कार्रवाई होगी।

शिकायतकर्ता डॉ. लक्ष्मण राम ने बताया कि 14 जुलाई को गांव में नाली विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच मारपीट हुई थी। दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग आवेदन थाने में दिए गए थे और मामले की जांच सब-इंस्पेक्टर उमेश कुमार को सौंपी गई थी। इसी दौरान कथित तौर पर रिश्वत की मांग शुरू हुई।

शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि आरोपी अधिकारी ने कहा था कि रिश्वत की रकम अन्य अधिकारियों तक भी पहुंचाई जाएगी और सभी को "मैनेज" करना पड़ता है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।

निगरानी ब्यूरो ने दोहराया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायत मिलने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत सत्यापन और साक्ष्य जुटाने के बाद ही कार्रवाई की जाती है। इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

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संपादकीय

भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कार्रवाई तभी प्रभावी मानी जाती है जब जांच निष्पक्ष और कानूनी रूप से मजबूत हो। किसी भी सरकारी अधिकारी पर लगे आरोपों की पारदर्शी जांच न केवल न्याय व्यवस्था को मजबूत करती है बल्कि आम लोगों का भरोसा भी बढ़ाती है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के साथ दोष सिद्ध होने तक निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया का पालन भी उतना ही आवश्यक है।

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