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Samastipur News: रोसड़ा में पत्रकार के परिवार पर तीसरी बार जानलेवा हमला, बेटे को गोली लगने के बाद भी न्याय का इंतजार

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Alam Ki Khabar: समस्तीपुर के रोसड़ा थाना क्षेत्र में पत्रकार मणिकांत राय के परिवार पर लगातार तीन जानलेवा हमलों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप। 22 जुलाई को बेटे को गोली लगने के मामले में न्याय की मांग तेज।

समस्तीपुर, 1 अगस्त। आलम की खबर: बिहार सरकार लगातार प्रदेश में सुशासन और बेहतर कानून-व्यवस्था का दावा करती रही है। प्रशासनिक अधिकारी भी अपराध पर प्रभावी नियंत्रण की बात कहते हैं, लेकिन समस्तीपुर जिले के रोसड़ा थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव की एक घटना इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय पत्रकार मणिकांत राय का आरोप है कि उनके परिवार पर लगातार तीन बार जानलेवा हमले हुए, तीनों मामलों में रोसड़ा थाना में एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन अब तक किसी भी मामले में प्रभावी पुलिस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि पहले ही मामले में समय पर सख्त कार्रवाई होती तो शायद तीसरी घटना नहीं होती।

पीड़ित पत्रकार के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को उनके पुत्र सम्राट सौरभ पर अपराधियों ने गोली चला दी। गोली उनके हाथ में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इस मामले में रोसड़ा थाना कांड संख्या-294/26 दर्ज किया गया। घटना को एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने से परिवार में भय और आक्रोश का माहौल है।

मणिकांत राय का कहना है कि यह उनके परिवार पर पहला हमला नहीं था। इससे पहले 21 मई 2026 को उनके पुत्र सम्राट सौरभ पर जानलेवा हमला किया गया था, जिसके संबंध में रोसड़ा थाना कांड संख्या-184/26 दर्ज है। इसके मात्र तीन दिन बाद 24 मई 2026 को उनके दूसरे पुत्र सम्राट सचिन पर चाकू से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। इस मामले में रोसड़ा थाना कांड संख्या-205/2026 दर्ज की गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि दोनों मामलों में भी पुलिस द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण अपराधियों का मनोबल बढ़ता गया और अंततः 22 जुलाई को गोलीबारी की घटना हो गई।

पत्रकार मणिकांत राय का कहना है कि न्याय की मांग को लेकर वह लगातार रोसड़ा थाना से लेकर वरीय पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों तक गुहार लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि दर्ज मामलों के बावजूद अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होने से उनका पूरा परिवार दहशत के साये में जी रहा है। उन्होंने कहा कि यदि एक पत्रकार का परिवार ही सुरक्षित नहीं है, तो आम लोगों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

इस घटना ने पत्रकारों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दर्ज मामलों में निष्पक्ष जांच कर दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी होनी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और लोगों का कानून पर विश्वास बना रहे।

इस मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए 'आलम की खबर' ने रोसड़ा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) संजय सिन्हा से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

फिलहाल पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच, आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। अब देखना होगा कि समस्तीपुर पुलिस इस गंभीर मामले में आगे क्या कार्रवाई करती है और पीड़ित परिवार को न्याय कब तक मिल पाता है।

न्याय में देरी, अपराधियों के हौसले बुलंद

बिहार में सुशासन की अवधारणा केवल सरकारी विज्ञापनों, भाषणों और दावों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उसकी असली परीक्षा तब होती है, जब कोई पीड़ित न्याय की गुहार लेकर पुलिस और प्रशासन के दरवाजे पर पहुंचता है। यदि शिकायत दर्ज होने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं होती, तो सबसे बड़ा नुकसान जनता के कानून पर भरोसे को होता है।

समस्तीपुर के रोसड़ा थाना क्षेत्र में पत्रकार मणिकांत राय के परिवार के साथ घटित घटनाएं कई गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। यदि एक ही परिवार पर लगातार तीन बार जानलेवा हमले होने के बाद भी अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती, तो स्वाभाविक रूप से कानून-व्यवस्था पर सवाल उठेंगे। यह मामला केवल एक पत्रकार या उनके परिवार का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है, जिस पर आम नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए निर्भर रहता है।

लोकतंत्र में पत्रकार समाज और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं। यदि पत्रकार या उनके परिवार खुद को असुरक्षित महसूस करें, तो यह चिंता का विषय है। हालांकि किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकलना चाहिए, लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि दर्ज मामलों की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध हो। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।

पुलिस की जिम्मेदारी केवल एफआईआर दर्ज कर लेना नहीं है। अपराधियों तक पहुंचना, साक्ष्य जुटाना, पीड़ित परिवार को सुरक्षा का भरोसा देना और कानून के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। यदि कार्रवाई में अनावश्यक विलंब होता है, तो अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं और समाज में भय का वातावरण बनता है।

इस मामले में यदि पुलिस ने अपनी ओर से आवश्यक कार्रवाई की है, तो उसे सार्वजनिक रूप से सामने लाना भी जरूरी है। वहीं यदि कहीं लापरवाही हुई है, तो उसकी निष्पक्ष समीक्षा कर जवाबदेही तय होनी चाहिए। यही सुशासन की असली पहचान होगी।

सरकार और पुलिस प्रशासन से जनता की अपेक्षा केवल इतनी है कि कानून सभी के लिए समान रूप से लागू हो। पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच, त्वरित कार्रवाई और न्याय मिले, ताकि यह संदेश जाए कि बिहार में कानून का राज केवल दावा नहीं, बल्कि धरातल पर भी दिखाई देता है। यही लोकतंत्र की मजबूती और सुशासन की वास्तविक कसौटी है।

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