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Bihar News: बिहार प्रशासनिक सेवा की अधिकारी श्वेता मिश्रा पर विभागीय कार्रवाई, 2714 दाखिल-खारिज अपील लंबित रखने का आरोप

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Alam Ki Khabar: Bihar News, Patna News। बिहार प्रशासनिक सेवा की अधिकारी श्वेता मिश्रा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है। आरा सदर में डीसीएलआर रहते हुए 2714 दाखिल-खारिज अपील लंबित रखने, आधिकारिक लॉगिन के दुरुपयोग और बिना सुनवाई आदेश पारित करने सहित कई आरोपों की जांच होगी।

पटना, 6 अगस्त। आलम की खबर: बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) की अधिकारी श्वेता मिश्रा के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच के लिए मुख्य जांच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया है। श्वेता मिश्रा वर्तमान में मनिहारी अनुमंडल में लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि आरोप उनके आरा सदर अनुमंडल में भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) के कार्यकाल से जुड़े हैं।

सरकारी अभिलेखों के अनुसार श्वेता मिश्रा 25 जुलाई 2022 से 18 अक्टूबर 2024 तक आरा सदर में डीसीएलआर रहीं। इस अवधि में उनके न्यायालय में दाखिल-खारिज अपील के कुल 3501 मामले दर्ज हुए, लेकिन इनमें से केवल 727 मामलों का ही निस्तारण किया गया। यानी करीब 22.48 प्रतिशत मामलों का ही निष्पादन हुआ, जबकि 2714 अपीलें लंबित रह गईं। विभाग का मानना है कि मामलों के निष्पादन में असामान्य देरी से आम रैयतों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए।

विभागीय दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि अधिकारी पर आधिकारिक लॉगिन के दुरुपयोग, भूमि विवादों के मामलों का अपेक्षित संख्या में निपटारा नहीं करने, अधिकांश मामलों में पक्षकारों को विधिवत नोटिस जारी नहीं करने तथा कई मामलों में बिना सुनवाई आदेश पारित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों को कर्तव्यहीनता और स्वेच्छाचारिता की श्रेणी में रखा गया है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इन आरोपों के आधार पर 8 जुलाई 2025 को सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र भेजकर अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। समीक्षा के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए औपचारिक विभागीय जांच शुरू करने का निर्णय लिया है।

जांच के दौरान भूमि विवाद निराकरण अधिनियम से जुड़े मामलों की भी समीक्षा होगी। विभाग के अनुसार इस अधिनियम के तहत दर्ज 12 मामलों का भी समय पर निष्पादन नहीं किया गया। अब मुख्य जांच आयुक्त पूरे मामले की विस्तृत जांच करेंगे। जांच प्रक्रिया के दौरान संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा, जिसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों और नियमों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को सरकारी कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत आगे की अनुशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।

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प्रशासनिक जवाबदेही केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए

सरकारी कार्यालयों में लंबित मामलों का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। भूमि से जुड़े विवाद वर्षों तक अटके रहने पर लोगों को आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आते हैं तो निष्पक्ष और समयबद्ध जांच आवश्यक है। हालांकि किसी भी अधिकारी को दोषी मानने से पहले जांच पूरी होना और उसका पक्ष सुना जाना भी उतना ही जरूरी है। पारदर्शी जांच और जवाबदेही ही प्रशासन में जनता का विश्वास मजबूत करती है।

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