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Begusarai News: बारिश में घंटों भीगता रहा महिला का शव, पोस्टमार्टम के लिए 15 घंटे भटकते रहे परिजन

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Begusarai News | Patna News | Samastipur News | बेगूसराय सदर अस्पताल में सड़क हादसे में मृत महिला के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए परिजनों को करीब 15 घंटे इंतजार करना पड़ा। बारिश में शव भीगता रहा।

बेगूसरायः करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए बेगूसराय सदर अस्पताल की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला किसी इलाज में देरी का नहीं, बल्कि एक मृत महिला के शव को बारिश से बचाने तक की व्यवस्था नहीं होने के आरोप से जुड़ा है। सड़क हादसे के बाद मौत का शिकार हुई महिला का शव पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के इंतजार में घंटों खुले में पड़ा रहा। बारिश के दौरान शव भीगता रहा और दूसरी ओर मृतका के परिजन पोस्टमार्टम की अनुमति के लिए अस्पताल और पुलिस थानों के बीच भटकते रहे।

घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं के साथ-साथ पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के मुताबिक, करीब 15 घंटे तक उन्हें पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कराने के लिए इधर-उधर दौड़ना पड़ा। आखिरकार आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया।

मामला बलिया थाना क्षेत्र के बड़ी बलिया वार्ड संख्या-10 से जुड़ा है। यहां की रहने वाली सुशीला देवी 13 जुलाई को सड़क दुर्घटना में घायल हुई थीं। दुर्घटना के बाद पुलिस की मदद से उन्हें इलाज के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल लाया गया था। इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से घर भेज दिया गया था। हालांकि, मंगलवार की रात उनकी मौत हो गई।

महिला की मौत के बाद परिवार के लोग शव लेकर बुधवार की सुबह सदर अस्पताल पहुंचे। परिजनों को उम्मीद थी कि अस्पताल में आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शव का पोस्टमार्टम करा दिया जाएगा, लेकिन यहां से उनकी परेशानी शुरू हो गई।

परिजनों का कहना है कि अस्पताल की ओर से पुलिस की पोस्टमार्टम स्लिप उपलब्ध कराने को कहा गया। इसके बाद परिवार के सदस्य पहले बलिया थाना पहुंचे। वहां से उन्हें नगर थाना जाने को कहा गया। पोस्टमार्टम की अनुमति और कागजी प्रक्रिया के लिए परिजन दोनों थानों के बीच चक्कर लगाते रहे।

इस दौरान अस्पताल परिसर में शव को बारिश से बचाने के लिए कोई पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी। तेज बारिश के बीच शव खुले स्थान पर पड़ा रहा। परिवार के लोग एक तरफ पुलिस की अनुमति के लिए परेशान थे तो दूसरी ओर उन्हें अपने परिजन के शव को बारिश में भीगते हुए देखने की मजबूरी बनी रही।

घटना के दौरान अस्पताल में मौजूद लोगों ने भी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि पोस्टमार्टम से पहले पुलिस की अनुमति और आवश्यक कागजात की प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन मृतक के शव को मौसम की मार से बचाना अस्पताल की मानवीय जिम्मेदारी होनी चाहिए। यदि प्रक्रिया पूरी होने में समय लग रहा था तो शव को सुरक्षित और बारिश से बचाने की व्यवस्था की जानी चाहिए थी।

परिजनों के अनुसार, जब कई घंटे गुजर गए और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो उन्होंने मामले की शिकायत जिलाधिकारी और वरीय अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही। इसके बाद पुलिस की ओर से आवश्यक पोस्टमार्टम स्लिप उपलब्ध कराई गई। कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को पोस्टमार्टम कक्ष में ले जाया गया।

हालांकि, इस पूरे मामले में सदर अस्पताल प्रशासन ने अपने स्तर पर किसी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। सदर अस्पताल के डीएस डॉ. अखिलेश कुमार ने कहा कि दुर्घटना से जुड़े मौत के मामलों में पोस्टमार्टम के लिए पुलिस की ओर से आवश्यक अनुमति और कागजात उपलब्ध कराना जरूरी होता है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पुलिस की ओर से एक्सीडेंटल डेथ से संबंधित प्रमाणपत्र करीब 15 घंटे बाद उपलब्ध कराया गया और दस्तावेज मिलते ही अस्पताल की ओर से पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।

अस्पताल प्रशासन के इस पक्ष के बाद अब सवाल पुलिस की प्रक्रिया और दोनों विभागों के बीच समन्वय को लेकर भी उठ रहे हैं। यदि दुर्घटना में घायल व्यक्ति की बाद में मौत होती है तो ऐसी स्थिति में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए पुलिस और अस्पताल के बीच स्पष्ट समन्वय होना जरूरी है, ताकि मृतक के परिजनों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकना न पड़े।

इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान एक परिवार अपने मृत परिजन के शव के साथ परेशान होता रहा। पोस्टमार्टम के लिए जरूरी कागजात जुटाने में लगने वाले समय का खामियाजा परिजनों को उठाना पड़ा। बारिश में शव के भीगने की तस्वीर ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए।

बेगूसराय सदर अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित किया गया है। ऐसे में मरीजों के इलाज के साथ-साथ मृत्यु के बाद शव को सुरक्षित रखने, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है।

यह मामला केवल पोस्टमार्टम में देरी का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का भी है जिसमें एक दुखी परिवार को अपने मृत परिजन के शव के साथ घंटों इंतजार करना पड़ा। अस्पताल और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है कि ऐसी स्थिति दोबारा सामने न आए और दुर्घटना से जुड़े मामलों में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट और त्वरित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

परिजनों के आरोप और अस्पताल प्रशासन के स्पष्टीकरण के बीच अब यह सवाल बना हुआ है कि आखिर दुर्घटना के बाद मौत के मामलों में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को लेकर अस्पताल और पुलिस के बीच ऐसा समन्वय क्यों नहीं है कि परिजनों को घंटों थानों के चक्कर लगाने पड़ें। इस घटना की निष्पक्ष समीक्षा से भविष्य में ऐसी मानवीय परेशानी को रोका जा सकता है।

बारिश में भीगता रहा शव, व्यवस्था पर उठे सवाल

बेगूसराय सदर अस्पताल में महिला के शव के साथ हुई घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था में संवेदनशीलता और विभागीय समन्वय की जरूरत को सामने ला दिया है। पोस्टमार्टम के लिए पुलिस की अनुमति जरूरी हो सकती है, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान शव को सुरक्षित रखना और परिजनों को स्पष्ट जानकारी देना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है। करीब 15 घंटे तक चली प्रक्रिया ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आखिर ऐसी स्थिति में आम परिवार किसके पास जाए।

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