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Patna News: रामचक बैरिया में 514 करोड़ से बनेगा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, 13 निकायों के 1607 टन कचरे का होगा निस्तारण

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | रामचक बैरिया में 514 करोड़ रुपये की लागत से वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित किया जाएगा। पटना समेत 13 नगर निकायों के 1607 टन ठोस कचरे का प्रतिदिन वैज्ञानिक निस्तारण होगा।

पटना, 7 अगस्त। आलम की खबर: पटना और आसपास के शहरी इलाकों में बढ़ते ठोस कचरे के दबाव को कम करने के लिए रामचक बैरिया में बड़ी एकीकृत कचरा प्रबंधन परियोजना शुरू होने जा रही है। करीब 514 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित किया जाएगा। यहां कचरे को खुले में जमा करने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर बिजली, बायोगैस और जैविक खाद तैयार करने की योजना है।

परियोजना के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना नगर निगम और परियोजना संचालन एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय समझौता किया गया है। रामचक बैरिया में करीब 40 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर तैयार किया जाएगा।

परियोजना की अनुमानित लागत 514 करोड़ रुपये है। इसमें सरकार की ओर से 126 करोड़ रुपये का सहयोग दिया जाएगा, जबकि करीब 388 करोड़ रुपये की राशि परियोजना एजेंसी द्वारा निवेश की जाएगी। निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 30 महीने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद परियोजना का संचालन और रखरखाव लंबे समय तक एजेंसी के जिम्मे रहेगा।

13 नगर निकायों का कचरा पहुंचेगा एक ही प्लांट में

रामचक बैरिया की परियोजना केवल पटना शहर तक सीमित नहीं रहेगी। पटना नगर निगम के साथ आसपास के 12 नगर निकायों से निकलने वाले ठोस कचरे को भी इस केंद्र तक पहुंचाया जाएगा।

परियोजना की प्रस्तावित क्षमता प्रतिदिन 1607 टन ठोस कचरे के निस्तारण की है। इसमें पटना नगर निगम से करीब 1250 टन और अन्य 12 नगर निकायों से लगभग 357 टन कचरा पहुंचने का अनुमान है।

इसके दायरे में दानापुर, फतुहा, खगौल, फुलवारी, बख्तियारपुर, मसौढ़ी, बिहटा, संपतचक, मनेर, नौबतपुर, पुनपुन और खुशरूपुर नगर निकाय शामिल हैं।

कचरा बनेगा ऊर्जा और उपयोगी उत्पाद

परियोजना में अलग-अलग प्रकार के कचरे के लिए अलग तकनीकी व्यवस्था विकसित की जाएगी। मिश्रित और प्रोसेसिंग योग्य कचरे से ऊर्जा तैयार करने के लिए 15 मेगावाट क्षमता का वेस्ट टू एनर्जी प्लांट प्रस्तावित है।

गीले कचरे के लिए प्रतिदिन 100 टन क्षमता का बायोमीथेनेशन प्लांट लगाया जाएगा। इस प्रक्रिया से बायोगैस तैयार की जाएगी। जैविक कचरे से खाद बनाने के लिए 700 टन प्रतिदिन क्षमता की कम्पोस्टिंग इकाई भी विकसित होगी।

वहीं, रिसाइकिल किए जा सकने वाले कचरे की अलग-अलग छंटाई के लिए मटेरियल रिकवरी सेंटर बनाया जाएगा। यहां से उपयोगी सामग्री को अलग करने के साथ आरडीएफ ईंधन तैयार करने की व्यवस्था होगी।

परियोजना में करीब 325 टन प्रतिदिन क्षमता वाला सुरक्षित लैंडफिल भी विकसित किया जाएगा, ताकि ऐसे अवशिष्ट कचरे का सुरक्षित निस्तारण किया जा सके जिसे दोबारा इस्तेमाल या प्रोसेस नहीं किया जा सकता।

कचरे के पहाड़ से शहरों को राहत की उम्मीद

पटना और आसपास के शहरी क्षेत्रों में ठोस कचरे की मात्रा लगातार बढ़ने के कारण उसके अंतिम निस्तारण की चुनौती भी बड़ी होती जा रही है। कई स्थानों पर कचरे का लंबे समय तक जमा रहना पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता है।

रामचक बैरिया की परियोजना का उद्देश्य कचरे को सिर्फ डंप करने के बजाय उसके अधिकतम उपयोग पर जोर देना है। यदि प्रस्तावित व्यवस्था निर्धारित क्षमता के अनुसार संचालित होती है तो लैंडफिल तक पहुंचने वाले कचरे की मात्रा कम की जा सकती है।

कचरे से ऊर्जा और जैविक उत्पाद तैयार होने से एक ओर प्रदूषण का दबाव कम करने की कोशिश होगी, वहीं दूसरी ओर कचरे को आर्थिक संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने का रास्ता भी खुलेगा।

30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य

परियोजना के निर्माण के लिए 30 महीने की समयसीमा निर्धारित की गई है। निर्माण पूरा होने के बाद संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी परियोजना एजेंसी के पास रहेगी। एजेंसी लंबे संचालन काल के दौरान प्लांट की विभिन्न इकाइयों को चलाएगी और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी।

कचरे से तैयार होने वाली बिजली और बायोगैस की बिक्री के जरिए परियोजना से राजस्व जुटाने की भी योजना है। बिजली की बिक्री को लेकर संबंधित विभाग के साथ अलग समझौते की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

निगरानी के लिए बनेगी 13 सदस्यीय कमेटी

परियोजना की निगरानी के लिए पटना नगर आयुक्त की अध्यक्षता में 13 सदस्यीय मॉनिटरिंग कमेटी बनाई गई है। इसमें परियोजना से जुड़े 12 अन्य नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा।

कमेटी की भूमिका परियोजना की प्रगति, नगर निकायों से कचरे की आपूर्ति, संचालन व्यवस्था और आपसी समन्वय की निगरानी में महत्वपूर्ण होगी।

कचरा प्रबंधन की बदलेगी तस्वीर?

रामचक बैरिया की प्रस्तावित परियोजना पटना और आसपास के नगर निकायों में ठोस कचरा प्रबंधन को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। प्रतिदिन 1607 टन कचरे की प्रोसेसिंग और उससे बिजली, गैस तथा खाद तैयार करने की योजना पारंपरिक डंपिंग व्यवस्था से अलग मॉडल पेश करती है।

हालांकि परियोजना की वास्तविक सफलता केवल प्लांट के निर्माण पर निर्भर नहीं करेगी। घरों और बाजारों से निकलने वाले कचरे का सही संग्रहण, गीले और सूखे कचरे की अलग-अलग व्यवस्था, समय पर परिवहन और प्लांट की निर्धारित क्षमता के अनुरूप संचालन भी उतना ही जरूरी होगा।

यदि ये सभी व्यवस्थाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं तो रामचक बैरिया का प्लांट पटना के साथ आसपास के नगर निकायों के लिए कचरा प्रबंधन का बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे कचरे के ढेर, खुले में डंपिंग और उससे जुड़ी पर्यावरणीय परेशानियों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कचरे से कमाई और स्वच्छता का दोहरा लक्ष्य

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कचरे को खर्च मानने के बजाय उससे संसाधन तैयार करने की कोशिश की जा रही है। बिजली और बायोगैस की बिक्री से आय अर्जित करने की योजना है, जबकि जैविक कचरे से तैयार खाद का भी उपयोग किया जा सकेगा।

योजना के सफल क्रियान्वयन से पटना के लिए दोहरा लाभ संभव है—एक तरफ शहर के कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था मजबूत होगी और दूसरी तरफ उसी कचरे से ऊर्जा तथा उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।

कचरे से ऊर्जा की ओर बढ़ता पटना

रामचक बैरिया में प्रस्तावित 514 करोड़ रुपये की परियोजना पटना के ठोस कचरा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम है। 13 नगर निकायों से आने वाले प्रतिदिन 1607 टन कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस करने की योजना शहरों पर बढ़ते कचरे के दबाव को कम कर सकती है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि परियोजना तय समय में कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है और संचालन शुरू होने के बाद निर्धारित क्षमता के अनुसार कितनी प्रभावी रहती है।

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