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Bihar News: मजबूरी का पलायन रोकने के लिए बिहार में उद्योग जरूरी, CM सम्राट चौधरी बोले- रोजगार के लिए बाहर जाना गलत नहीं

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Bihar Migration News | मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि रोजगार और बेहतर अवसर के लिए बिहार से बाहर जाना गलत नहीं, लेकिन मजबूरी का पलायन रोकने के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर उद्योग और रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे।

पटना, 8 अगस्त। बिहार में रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर होने वाले पलायन को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने औद्योगिकीकरण को सबसे अहम समाधान बताया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि बेहतर अवसर की तलाश में किसी व्यक्ति का दूसरे राज्य जाना अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन आर्थिक मजबूरी के कारण परिवार और घर छोड़कर रोजगार के लिए बाहर जाने की स्थिति को बदलना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करने के लिए बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित करने होंगे। उनका मानना है कि राज्य में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय स्तर पर नौकरियां और आय के साधन बढ़ेंगे और मजबूरी में होने वाले पलायन पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सकेगी।

हर तरह के पलायन को एक नजर से नहीं देखा जा सकता

सम्राट चौधरी ने पलायन को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतर बताया। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बेहतर नौकरी, अधिक आय, कारोबार या अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से दूसरे राज्य में जाता है तो इसे गलत नहीं माना जाना चाहिए।

समस्या उस स्थिति में है, जब किसी गरीब या आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के पास अपने क्षेत्र में काम का विकल्प नहीं होता और उसे परिवार से दूर जाकर दूसरे राज्य में मजदूरी या रोजगार तलाशना पड़ता है।

मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार की चुनौती ऐसे ही मजबूर पलायन को कम करने की है।

उद्योगों के विस्तार पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए औद्योगिक निवेश को गति देनी होगी। केवल योजनाओं या घोषणाओं से पलायन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

स्थानीय स्तर पर कारखाने, उत्पादन इकाइयां, कारोबार और रोजगार के दूसरे अवसर विकसित होंगे तो श्रमिकों और युवाओं को अपने ही जिले या राज्य में काम मिलने की संभावना बढ़ेगी।

इसी वजह से मुख्यमंत्री ने उद्योग को पलायन से जुड़ी समस्या के समाधान का प्रमुख माध्यम बताया।

PDS के आंकड़ों का भी किया जिक्र

पलायन की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने जन वितरण प्रणाली यानी PDS के आंकड़ों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने दूसरे राज्यों में राशन लेने वाले बिहार के लोगों से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा की है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, वन नेशन वन राशन कार्ड व्यवस्था के तहत करीब छह लाख लोग ऐसे हैं जो बिहार के बाहर जाकर राशन प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस आंकड़े में एक-दो लाख लोगों को और जोड़ दिया जाए, तब भी संख्या बहुत बड़ी नहीं होगी।

हालांकि, इन आंकड़ों को बिहार से होने वाले कुल पलायन का पूर्ण आंकड़ा नहीं माना जा सकता, क्योंकि सभी प्रवासी श्रमिक दूसरे राज्यों में PDS का लाभ लेते हों, यह जरूरी नहीं है।

नेपाल का पानी और बिहार की बाढ़

मुख्यमंत्री ने बिहार की भौगोलिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्राकृतिक परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। कहीं सूखे की स्थिति का सामना करना पड़ता है तो कहीं अत्यधिक पानी की समस्या रहती है।

बिहार की बाढ़ की चर्चा करते हुए उन्होंने नेपाल से आने वाले पानी को भी महत्वपूर्ण कारण बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार नेपाल में भारी बारिश होने पर वहां से आने वाली नदियों के जलस्तर में वृद्धि का सीधा असर बिहार के मैदानी इलाकों पर पड़ता है।

खासकर उत्तर बिहार के कई हिस्सों में मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बिहार के सामने एक साथ बाढ़ प्रबंधन, जल निकासी और सिंचाई जैसी चुनौतियां रहती हैं।

बाढ़ और सूखे के बीच विकास की चुनौती

बिहार की भौगोलिक स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री ने यह संकेत दिया कि राज्य के विकास की रणनीति बनाते समय प्राकृतिक परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

एक ओर बाढ़ प्रभावित इलाकों में जल प्रबंधन जरूरी है, वहीं दूसरी ओर ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी चुनौती है जहां सूखे जैसी स्थिति बनती है।

ऐसी परिस्थितियों के बीच उद्योगों के लिए आधारभूत ढांचा विकसित करना और निवेश आकर्षित करना सरकार के सामने बड़ी जिम्मेदारी है।

मानव तस्करी का भी खतरा

मुख्यमंत्री ने मजबूरी में होने वाले पलायन को केवल रोजगार से जुड़ी समस्या नहीं माना। उन्होंने संकेत दिया कि बड़े पैमाने पर असुरक्षित पलायन की स्थिति में मानव तस्करी जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

गरीब परिवारों के लोगों को रोजगार का लालच देकर दूसरे राज्यों या दूसरे क्षेत्रों में ले जाने के मामलों में उनकी सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाती है।

इसलिए रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ श्रमिकों के अधिकारों और सुरक्षित प्रवासन पर भी ध्यान देना जरूरी है।

बिहार में रोजगार पैदा करना बड़ी चुनौती

मुख्यमंत्री के बयान से साफ है कि बिहार में मजबूरी वाले पलायन को कम करने के लिए सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय रोजगार का विस्तार करना है।

इसके लिए उद्योग, निवेश, बिजली, सड़क, परिवहन, कौशल विकास और बाजार से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करना होगा। यदि किसी जिले में पर्याप्त औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां विकसित होती हैं तो वहां के युवाओं और श्रमिकों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

पलायन रोकने की रणनीति में उद्योग अहम

बिहार से रोजगार के लिए बाहर जाने का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का हिस्सा रहा है। राज्य के लाखों लोग अलग-अलग समय में रोजगार, मजदूरी और कारोबार के लिए देश के दूसरे हिस्सों का रुख करते रहे हैं।

मुख्यमंत्री के ताजा बयान में इस समस्या का समाधान उद्योग और स्थानीय रोजगार के विस्तार से जोड़कर देखा गया है।

हालांकि, केवल उद्योग स्थापित करना ही पर्याप्त नहीं होगा। उद्योगों को स्थानीय युवाओं को रोजगार देने, कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने और छोटे कारोबार को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम करना होगा।

बाढ़, रोजगार और पलायन का आपस में संबंध

बिहार के लिए बाढ़ और पलायन दो अलग-अलग समस्याएं जरूर हैं, लेकिन इनके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव कई जगह एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

बाढ़ से प्रभावित इलाकों में खेती, कारोबार और स्थानीय रोजगार प्रभावित होने पर परिवारों की आय कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में रोजगार की तलाश में बाहर जाने का दबाव बढ़ सकता है।

इसलिए बाढ़ प्रबंधन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान ने इसी व्यापक चुनौती की ओर संकेत किया है। बिहार में यदि उद्योग और निवेश का विस्तार होता है, स्थानीय रोजगार बढ़ता है और बुनियादी ढांचा मजबूत होता है तो आर्थिक मजबूरी में होने वाले पलायन को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव संभव है।

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