:
Breaking News

Muzaffarpur News: नहर का 20 फीट बांध टूटा, रक्सा में सैकड़ों खेत जलमग्न; धान की फसल पर संकट

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Muzaffarpur News | Karwan News | रक्सा में तिरहुत मुख्य नहर का करीब 20 फीट बांध टूटने से खेतों में पानी फैल गया। धान की फसल जलमग्न होने के बाद किसानों ने प्रशासन से तत्काल बांध की मरम्मत की मांग की है।

मुजफ्फरपुर, 9 अगस्त। आलम की खबर: मुजफ्फरपुर जिले के मड़वन प्रखंड में रविवार की सुबह तिरहुत मुख्य नहर का बांध टूटने से किसानों की परेशानी बढ़ गई। रक्सा पंचायत के वार्ड संख्या 14 में नहर के उत्तर दिशा वाला बांध करीब 20 फीट तक टूट गया। इसके बाद नहर का पानी आसपास के खेतों की ओर फैल गया और धान की फसल पानी में डूब गई।

घटना के बाद इलाके के किसानों में फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि धान की रोपनी के बाद फसल इस समय खेतों में तैयार हो रही है। ऐसे समय में नहर का पानी अनियंत्रित तरीके से खेतों में पहुंचने से फसल को नुकसान हो सकता है।

तड़के करीब साढ़े तीन बजे टूटा बांध

स्थानीय लोगों के अनुसार रविवार की सुबह करीब 3:30 बजे अचानक नहर का बांध टूट गया। बांध टूटते ही नहर का पानी तेजी से आसपास के खेतों में जाने लगा।

सुबह जब ग्रामीणों और किसानों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों को सूचना दी।

बताया गया कि नहर में इस समय पानी की मात्रा बहुत अधिक नहीं है। इसी वजह से खेतों में जमा पानी का कुछ हिस्सा धीरे-धीरे निकल भी रहा है। हालांकि ग्रामीणों की चिंता यह है कि यदि बांध की मरम्मत जल्द नहीं की गई और पानी का बहाव लगातार बना रहा तो नुकसान का दायरा बढ़ सकता है।

घरों तक नहीं पहुंचा पानी, लेकिन खतरा बरकरार

पूर्व मुखिया इंदल साह के अनुसार फिलहाल नहर का पानी आसपास के किसी घर तक नहीं पहुंचा है। इससे रिहायशी इलाकों को तत्काल राहत है।

लेकिन बांध करीब 20 फीट तक टूटने के कारण पानी का बहाव बना रहा तो स्थिति बदल सकती है। खेतों के बाद पानी आसपास के रिहायशी क्षेत्रों की ओर भी बढ़ने की आशंका से ग्रामीण चिंतित हैं।

उन्होंने कहा कि इलाके में किसानों ने धान की रोपनी कर रखी है। ऐसे समय में खेतों में आवश्यकता से अधिक पानी जमा होने से फसल प्रभावित हो सकती है।

धान की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ी

धान की खेती में पानी की जरूरत होती है, लेकिन अनियंत्रित तरीके से लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल को नुकसान पहुंच सकता है। यही वजह है कि बांध टूटने के बाद किसानों की नजर अब नहर के पानी के बहाव और खेतों में जलजमाव की स्थिति पर बनी हुई है।

जिन खेतों में पानी पहुंचा है, वहां किसान स्थिति का जायजा ले रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते टूटे हिस्से को बंद कर दिया गया तो संभावित नुकसान को सीमित किया जा सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप मांगा

घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके पर टीम भेजकर स्थिति का निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल पानी कम होने का इंतजार करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि टूटे बांध की मरम्मत भी जल्द करानी जरूरी है।

पूर्व मुखिया इंदल साह ने जिलाधिकारी से मामले का संज्ञान लेने और संबंधित विभाग को तत्काल निर्देश देने की मांग की है। उनका कहना है कि बांध को अविलंब दुरुस्त कर पानी के बहाव को नियंत्रित किया जाना चाहिए, ताकि किसानों की फसल को होने वाले संभावित नुकसान को रोका जा सके।

समय पर मरम्मत नहीं हुई तो बढ़ सकती है परेशानी

फिलहाल नहर में पानी का स्तर बहुत अधिक नहीं होने के कारण खेतों में जमा पानी धीरे-धीरे कम होने की बात कही जा रही है। लेकिन ग्रामीणों का मानना है कि टूटा हुआ बांध इसी स्थिति में रहा तो पानी का बहाव दोबारा बढ़ने पर खेतों में जलजमाव गंभीर रूप ले सकता है।

इसलिए किसानों की मांग है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर टूटे हिस्से का निरीक्षण करें और मरम्मत का काम शुरू कराएं।

रक्सा में नहर का बांध टूटने की घटना ने किसानों के सामने एक और चिंता खड़ी कर दी है। धान की फसल के इस मौसम में नहर का अनियंत्रित पानी खेतों तक पहुंचना उनके लिए नुकसान का कारण बन सकता है।

अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और सिंचाई विभाग की कार्रवाई पर है। यदि समय रहते बांध की मरम्मत हो जाती है तो बड़े नुकसान की आशंका को कम किया जा सकता है। वहीं देरी होने पर पानी का फैलाव और फसल को नुकसान दोनों बढ़ सकते हैं।

यह भी पढ़ें

Bihar News: मुजफ्फरपुर और उत्तर बिहार में बारिश, नहर और जलजमाव से जुड़ी खबरें Alam Ki Khabar पर पढ़ें।

नहर की मरम्मत में देरी किसानों पर भारी पड़ सकती है

किसानों के लिए धान की फसल का मौसम बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस समय खेतों में पानी की जरूरत तो होती है, लेकिन पानी का नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है। नहर का बांध टूटने के बाद पानी यदि निर्धारित रास्ते से बाहर निकलकर खेतों में लंबे समय तक जमा रहता है तो फसल प्रभावित होने की आशंका रहती है।

रक्सा की घटना में फिलहाल राहत की बात यह है कि नहर का पानी किसी घर तक पहुंचने की सूचना नहीं है और खेतों में जमा पानी धीरे-धीरे निकल रहा है। लेकिन करीब 20 फीट का टूटाव मामूली नहीं है। यदि इसकी तुरंत मरम्मत नहीं हुई तो पानी का बहाव दोबारा बढ़ने पर समस्या गंभीर हो सकती है।

ऐसे मामलों में प्रशासन और संबंधित विभाग की त्वरित कार्रवाई सबसे महत्वपूर्ण होती है। मौके पर टीम भेजकर वास्तविक स्थिति का आकलन, टूटे हिस्से की मरम्मत और पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने की व्यवस्था जल्द की जानी चाहिए।

किसानों की चिंता केवल आज के जलजमाव तक सीमित नहीं है। फसल को नुकसान होने पर उनकी पूरी मेहनत और खेती पर किया गया खर्च प्रभावित हो सकता है। इसलिए बांध की मरम्मत को केवल नहर की तकनीकी समस्या न मानकर किसानों की आजीविका से जुड़े विषय के रूप में देखना जरूरी है।

रक्सा के किसानों को अब आश्वासन से ज्यादा मौके पर कार्रवाई का इंतजार है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *