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Patna News: चाय के पैसे को लेकर दुकानदार से मारपीट, वीडियो वायरल होते ही ASI सस्पेंड; होमगार्ड 6 महीने ड्यूटी से बाहर

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Alam Ki Khabar | Patna News | Bakhtiyarpur News | बख्तियारपुर में चाय के पैसे को लेकर दुकानदार से मारपीट के मामले में ASI को निलंबित और होमगार्ड को छह महीने के लिए ड्यूटी से हटाया गया।

पटना, 9 अगस्त। आलम की खबर: पटना जिले के बख्तियारपुर थाना क्षेत्र में एक चाय दुकानदार के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने अपने ही दो कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है। घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच कराई। जांच में प्रथम दृष्टया दोनों पुलिसकर्मियों का आचरण अनुशासन के अनुरूप नहीं पाया गया, जिसके बाद एक सहायक अवर निरीक्षक (ASI) को निलंबित कर दिया गया, जबकि एक गृह रक्षक को छह महीने के लिए ड्यूटी से वंचित किया गया है।

मामला बख्तियारपुर थाना क्षेत्र में एनएच-31 फोरलेन के आसपास स्थित एक चाय दुकान से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि घटना रात के समय हुई, जब गश्ती दल और चाय दुकानदार के बीच चाय के भुगतान को लेकर विवाद शुरू हुआ। मामूली कहासुनी के बाद मामला बढ़ गया और दुकानदार के साथ मारपीट की स्थिति पैदा हो गई।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा और विभाग ने इसे गंभीरता से लिया।

वायरल वीडियो ने खोली घटना की परत

पुलिस अधिकारियों को 2 अगस्त को घटना से संबंधित वीडियो प्राप्त हुआ। वीडियो में एक चाय दुकानदार के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर मारपीट किए जाने की तस्वीरें दिखाई दे रही थीं।

वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, पटना के स्तर से मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का निर्देश दिया गया। इसके बाद बाढ़-02 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी दी गई।

जांच अधिकारी ने घटनास्थल से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की। इसमें सीसीटीवी फुटेज की जांच, घटनास्थल का निरीक्षण और संबंधित लोगों से पूछताछ शामिल थी।

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका को अनुशासनहीनता के दायरे में माना गया।

चाय के भुगतान को लेकर शुरू हुआ था विवाद

जांच में सामने आया कि घटना 1 अगस्त की रात की है। उस समय इलाके में पुलिस का गश्ती दल मौजूद था। चाय की दुकान पर भुगतान को लेकर पुलिसकर्मियों और दुकानदार के बीच विवाद हुआ।

विवाद बढ़ने के बाद ड्यूटी पर मौजूद ASI संजय कुमार और गृह रक्षक अंकित कुमार पर दुकानदार के साथ मारपीट करने का आरोप सामने आया।

जांच में यह भी सामने आया कि दुकानदार के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया और उसका कॉलर पकड़कर मारपीट की गई।

मामला केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं रहा, क्योंकि इसमें ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आई थी। यही वजह रही कि वरिष्ठ अधिकारियों ने विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की।

ASI संजय कुमार निलंबित

जांच रिपोर्ट अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पुलिस विभाग ने तत्काल कार्रवाई की। 3 अगस्त को ASI संजय कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय नवीन पुलिस केंद्र, पटना निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

विभागीय जांच का उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि घटना में उनकी भूमिका कितनी थी और पुलिस सेवा के नियमों का किस स्तर पर उल्लंघन हुआ।

गृह रक्षक पर भी छह महीने की कार्रवाई

मामले में दूसरे पुलिसकर्मी गृह रक्षक अंकित कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। उन्हें छह महीने की अवधि के लिए ड्यूटी से वंचित कर दिया गया है।

पुलिस विभाग ने दोनों कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई तथ्यों और विभागीय नियमों के आधार पर की जाएगी।

पुलिस की छवि पर उठे सवाल

घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि विवाद में आम नागरिक और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी आमने-सामने थे। पुलिस से लोगों को सुरक्षा, संयम और कानून के मुताबिक व्यवहार की अपेक्षा रहती है।

ऐसे में किसी दुकानदार के साथ मारपीट का वीडियो सामने आने से पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, विभाग ने मामले में तत्काल कार्रवाई करके यह संदेश देने की कोशिश की है कि ड्यूटी के दौरान अनुशासनहीनता या आम लोगों के साथ दुर्व्यवहार को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

वीडियो वायरल होने के बाद तेजी से हुई कार्रवाई

इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर सामने आया वीडियो महत्वपूर्ण साबित हुआ। वीडियो अधिकारियों तक पहुंचने के बाद जांच शुरू हुई और कुछ ही समय में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई।

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि पुलिस विभाग अब अपने कर्मियों के सार्वजनिक व्यवहार को लेकर अधिक सतर्कता बरत रहा है। खासकर ऐसे मामलों में जहां वीडियो या अन्य डिजिटल साक्ष्य सामने आते हैं, वहां कार्रवाई की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

पुलिस ने दिया अनुशासन का संदेश

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आम लोगों के साथ अनुचित व्यवहार या ड्यूटी के दौरान अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।

पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों के साथ संयमित और जिम्मेदार व्यवहार करने की जिम्मेदारी भी होती है। बख्तियारपुर की घटना में कार्रवाई इसी संदेश का हिस्सा मानी जा रही है।

अब विभागीय जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि दोनों कर्मियों के खिलाफ आगे क्या कदम उठाया जाता है।

फिलहाल, ASI को निलंबित करने और गृह रक्षक को छह महीने के लिए ड्यूटी से हटाने की कार्रवाई से विभाग ने यह संकेत दिया है कि पुलिसकर्मियों के आचरण से जुड़े मामलों में शिकायत या वीडियो सामने आने के बाद जांच और कार्रवाई की जाएगी।

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पुलिस की वर्दी के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है

पुलिस व्यवस्था में अनुशासन केवल विभागीय नियमों तक सीमित नहीं है। पुलिसकर्मी जब वर्दी में जनता के बीच मौजूद होता है तो उसके व्यवहार से पूरे विभाग की छवि बनती है। इसलिए किसी मामूली विवाद को भी इस स्तर तक नहीं पहुंचना चाहिए कि उसमें मारपीट की नौबत आ जाए।

बख्तियारपुर की घटना में चाय के भुगतान जैसा छोटा विवाद सामने आया, लेकिन इसके बाद जिस तरह पुलिसकर्मियों की भूमिका जांच के घेरे में आई, वह पुलिस व्यवस्था के लिए गंभीर संदेश है।

ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि जांच निष्पक्ष हो और उपलब्ध वीडियो, सीसीटीवी तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर सच्चाई सामने लाई जाए। दोष सिद्ध होने पर विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, जबकि निर्दोष पाए जाने वाले कर्मियों के साथ भी न्याय होना जरूरी है।

पुलिस और आम जनता के बीच भरोसा कानून-व्यवस्था की बुनियाद है। पुलिसकर्मी यदि संयम, संवेदनशीलता और कानून के दायरे में रहकर काम करते हैं तो जनता का विश्वास मजबूत होता है। वहीं, किसी नागरिक के साथ अनुचित व्यवहार पूरे विभाग पर सवाल खड़े कर सकता है।

बख्तियारपुर मामले में त्वरित विभागीय कार्रवाई से कम से कम यह संदेश जरूर गया है कि पुलिसकर्मियों के आचरण को लेकर शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

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