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Bihar Weather News: बिहार में फिर बदला मौसम, 12 जिलों में येलो अलर्ट; 13-14 अगस्त को 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में मानसून फिर सक्रिय, 12 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट। 13-14 अगस्त को 19 जिलों में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी।

पटना, 10 अगस्त। आलम की खबर: बिहार में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। राज्य के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है, वहीं मौसम विभाग ने सोमवार को पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी बिहार के कई जिलों के लिए बारिश के साथ तेज हवाओं को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम के इस बदले मिजाज के बीच अगले कुछ दिनों में बारिश का दायरा और बढ़ने का अनुमान है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, सोमवार को पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, बक्सर, भोजपुर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, अरवल और जहानाबाद में मौसम पर विशेष नजर रखने की जरूरत है। इन जिलों में बारिश के दौरान हवा की गति करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे में खुले स्थानों, कमजोर संरचनाओं और बिजली के तारों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 12 अगस्त तक बिहार में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। खासकर उत्तर बिहार के कुछ इलाकों में बारिश का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक रहने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं। बारिश का यह दौर खेतों और किसानों के लिए राहत लेकर आ सकता है, लेकिन जिन इलाकों में पहले से जलजमाव है वहां परेशानी भी बढ़ सकती है।

इसके बाद 13 और 14 अगस्त को मौसम का मिजाज और अधिक सक्रिय होने का अनुमान है। इन दो दिनों के दौरान राज्य के 19 जिलों में भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान की स्थिति बनने की चेतावनी दी गई है। इस सूची में जहानाबाद, सारण, सीवान, बक्सर, गया, पटना, बेगूसराय, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, सहरसा, सुपौल, खगड़िया, भागलपुर और लखीसराय शामिल हैं।

इन जिलों में रहने वाले लोगों को मौसम में अचानक होने वाले बदलाव को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। तेज हवा के दौरान पेड़, बिजली के खंभे और कमजोर निर्माण प्रभावित हो सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम करने वाले लोगों को भी गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

नदियों के बढ़ते जलस्तर पर भी नजर

लगातार हो रही बारिश के बीच बिहार की नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर बिहार के कई हिस्से पहले से ही नदियों और जलजमाव की समस्या से प्रभावित रहते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अगर बारिश की तीव्रता बढ़ती है तो निचले इलाकों में पानी जमा होने और ग्रामीण सड़कों पर आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।

प्रशासनिक स्तर पर भी संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए रखने की जरूरत है। लोगों को नदी, नहर या जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक जाने से बचना चाहिए। बिजली गिरने की आशंका के दौरान पेड़ या खुले मैदान के नीचे खड़ा होना भी जोखिम भरा हो सकता है।

बारिश हो रही, फिर भी मानसून की कमी बरकरार

बिहार में पिछले कुछ दिनों से बारिश का दौर चलने के बावजूद पूरे मानसून सीजन का आंकड़ा अभी सामान्य से काफी नीचे है। 9 अगस्त तक राज्य में 369.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 573.4 मिलीमीटर होना चाहिए था। यानी राज्य में अब तक सामान्य से करीब 36 फीसदी कम बारिश हुई है।

बारिश की यह कमी राज्य के सभी हिस्सों में समान नहीं है। कुछ जिलों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि कैमूर, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और खगड़िया जैसे जिलों में बारिश की कमी ज्यादा गंभीर बनी हुई है। आने वाले दिनों में होने वाली बारिश इस कमी को कुछ हद तक कम कर सकती है, लेकिन पूरे मानसून सीजन के आंकड़े को सामान्य स्तर तक पहुंचाने के लिए व्यापक बारिश की जरूरत होगी।

15 अगस्त के बाद राहत की उम्मीद

मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 13 और 14 अगस्त को बारिश की गतिविधियां तेज रहने के बाद 15 अगस्त के बाद मौसम में धीरे-धीरे सुधार की संभावना है। हालांकि मौसम का पूर्वानुमान लगातार बदल सकता है, इसलिए लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट और प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देते रहना चाहिए।

फिलहाल बिहार के लिए अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण हैं। एक ओर बारिश की कमी झेल रहे किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार है, तो दूसरी ओर लगातार तेज बारिश की स्थिति में जलजमाव और नदियों के बढ़ते जलस्तर की चुनौती सामने आ सकती है। ऐसे में बारिश को राहत के साथ-साथ सावधानी के नजरिए से भी देखना जरूरी है।

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मौसम पर नजर: बारिश की जरूरत और सावधानी दोनों जरूरी

बिहार में इस समय मौसम की तस्वीर थोड़ी विरोधाभासी है। एक तरफ राज्य में मानसून की बारिश सामान्य से काफी कम है और कई जिलों में बारिश की कमी किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। दूसरी तरफ कुछ दिनों में जब बारिश तेज होती है तो जलजमाव, नदियों के बढ़ते जलस्तर और यातायात बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं।

13 और 14 अगस्त को जिन 19 जिलों के लिए भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई है, वहां प्रशासन को पहले से तैयारी रखने की जरूरत है। निचले इलाकों में जलनिकासी, बिजली व्यवस्था और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाना जरूरी होगा। लोगों को भी मौसम चेतावनी को सामान्य सूचना मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

वहीं बारिश की कमी वाले जिलों के किसानों के लिए आने वाला दौर राहत देने वाला साबित हो सकता है। अच्छी बारिश से खरीफ फसलों को फायदा मिलेगा और जमीन में नमी की कमी कुछ हद तक दूर होगी। लेकिन बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर खेतों में पानी जमा होने से फसलों को नुकसान भी हो सकता है।

इसलिए मौजूदा मौसम में सबसे जरूरी संतुलन है—जहां बारिश की जरूरत है वहां पर्याप्त पानी पहुंचे और जहां बारिश अधिक हो वहां जलनिकासी की व्यवस्था मजबूत रहे। आने वाले दिनों का मौसम बिहार के लिए इसी संतुलन की परीक्षा लेने वाला है।

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