:
Breaking News

Bihar Education News: 73 हजार सरकारी स्कूलों को जोड़ने के लिए बिहार बोर्ड का नया डिजिटल पोर्टल, पूर्व छात्र भी दे सकेंगे सहयोग

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Bihar Education News | बिहार बोर्ड सरकारी स्कूलों के विकास के लिए ‘मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान’ डिजिटल पोर्टल ला रहा है। पूर्व छात्र, नागरिक, एनआरआई और कंपनियां स्कूलों को सहयोग दे सकेंगी।

पटना, 10 अगस्त। आलम की खबर: बिहार के सरकारी स्कूलों के विकास में अब पूर्व छात्रों और आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने ‘मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान’ नाम से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने की पहल की है। इसके जरिए राज्य के 73 हजार से अधिक सरकारी विद्यालयों को पूर्व छात्रों, सामाजिक संगठनों, एनआरआई, गैर सरकारी संस्थाओं और कॉरपोरेट क्षेत्र से जोड़ने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।

इस व्यवस्था के तहत किसी विद्यालय से पढ़ चुके छात्र अपने पुराने स्कूल से दोबारा जुड़कर उसके विकास में योगदान दे सकेंगे। खास बात यह है कि योगदान केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रहेगा। कोई व्यक्ति अपनी विशेषज्ञता, समय, तकनीकी ज्ञान, संसाधन या अन्य उपयोगी सेवाओं के जरिए भी विद्यालय की जरूरत पूरी करने में सहयोग कर सकेगा।

इस पहल की जानकारी शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित प्रशिक्षण सह चिंतन शिविर में दी गई। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के मंत्री मिथिलेश तिवारी, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिलों के शिक्षा पदाधिकारी और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

तीन साल से आजीवन सहयोग तक का विकल्प

नए डिजिटल पोर्टल पर किसी सरकारी विद्यालय से जुड़ने वाले पूर्व छात्र समूह, संगठन, कंपनी या एनआरआई के लिए अलग-अलग अवधि का विकल्प रखा गया है। इच्छुक व्यक्ति या संस्था तीन वर्ष, पांच वर्ष अथवा आजीवन अवधि के लिए किसी विद्यालय को अपनाकर उसके विकास में योगदान कर सकेगी।

इसका मकसद स्कूलों को जरूरत के हिसाब से बाहरी सहयोग उपलब्ध कराना है। कई सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई के साथ-साथ डिजिटल संसाधन, आधारभूत सुविधाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और अन्य शैक्षणिक जरूरतों को मजबूत करने की आवश्यकता होती है।

पोर्टल के माध्यम से ऐसी जरूरतों की जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने की योजना है, जिससे सहयोग देने वाले लोग या संस्थाएं अपनी क्षमता के अनुसार विद्यालय का चयन कर सकें।

स्कूल खुद बताएंगे अपनी जरूरत

इस पूरी व्यवस्था में विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। प्रधानाध्यापक अपने स्कूल में जिन सुविधाओं या संसाधनों की जरूरत महसूस करेंगे, उन्हें डिजिटल पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे।

इससे सहयोग करने वाले लोगों को यह समझने में आसानी होगी कि संबंधित विद्यालय को वास्तव में किस चीज की जरूरत है। किसी विद्यालय को डिजिटल उपकरणों की आवश्यकता हो सकती है, तो किसी अन्य स्कूल को पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल सामग्री या आधारभूत सुविधाओं की जरूरत हो सकती है।

विद्यालय की सहमति को भी व्यवस्था का जरूरी हिस्सा रखा गया है। यानी बिना विद्यालय की सहमति के किसी प्रकार का सहयोग थोपे जाने की स्थिति नहीं होगी।

CSR से स्कूलों को मिल सकता है बड़ा फायदा

कॉरपोरेट कंपनियों को भी इस पहल से जोड़ने की तैयारी है। कंपनियां अपनी CSR गतिविधियों के जरिए सरकारी विद्यालयों को आर्थिक सहायता, संसाधन और विशेषज्ञता उपलब्ध करा सकती हैं।

हालांकि CSR के माध्यम से मिलने वाले सहयोग के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी की मंजूरी आवश्यक होगी। इससे आर्थिक सहयोग की प्रक्रिया में प्रशासनिक निगरानी बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।

एनआरआई और विदेशों में रहने वाले पूर्व छात्र डिजिटल शिक्षा, आधुनिक तकनीक, आधारभूत सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय अवसरों से सरकारी विद्यालयों को जोड़ने में मदद कर सकेंगे।

सिर्फ पैसे नहीं, ज्ञान और समय भी दे सकेंगे लोग

पोर्टल की खासियत यह होगी कि सरकारी स्कूलों की मदद के लिए केवल आर्थिक योगदान को ही प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। आम नागरिक अपने ज्ञान और कौशल के जरिए भी विद्यालयों के साथ जुड़ सकेंगे।

किसी क्षेत्र के विशेषज्ञ विद्यार्थियों को करियर संबंधी मार्गदर्शन दे सकते हैं। कोई तकनीकी विशेषज्ञ डिजिटल शिक्षा में मदद कर सकता है। इसी तरह पूर्व छात्र अपने अनुभव के जरिए विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी दे सकते हैं।

इससे विद्यालय और समाज के बीच संबंध मजबूत होने की उम्मीद है।

146 मॉडल स्कूलों में शुरू होगी ऑनलाइन JEE-NEET कोचिंग

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर देने के लिए बिहार बोर्ड ने एक और बड़ी योजना सामने रखी है। राज्य के 146 अतिरिक्त प्लस टू मॉडल स्कूलों को ऑनलाइन संध्याकालीन निशुल्क कोचिंग से जोड़ने की तैयारी है।

इस व्यवस्था में विद्यार्थियों को जेईई और नीट जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेषज्ञ शिक्षकों की कक्षाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

बिहार बोर्ड फिलहाल पटना में दो स्थानों पर जेईई और नीट की तैयारी के लिए निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है। इसके अलावा नौ प्रमंडलीय मुख्यालय वाले जिलों में भी विद्यार्थियों के लिए गैर-आवासीय प्रशिक्षण की व्यवस्था संचालित की जा रही है।

विद्यार्थियों की रुचि और कार्यक्रम के परिणाम को देखते हुए अब इसका दायरा बढ़ाने की तैयारी की गई है।

स्टूडियो से तैयार होगी डिजिटल पढ़ाई

ऑनलाइन कोचिंग के लिए बिहार बोर्ड मुख्यालय में एक स्टूडियो तैयार किया जा रहा है। स्टूडियो शुरू होने तक विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा अलग-अलग विषयों और टॉपिक पर तैयार किए गए वीडियो विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने की योजना है।

इससे मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अपने स्कूल से ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक सामग्री मिल सकेगी।

688 मॉडल स्कूलों में 15 अगस्त से इंटरएक्टिव ऑनलाइन लर्निंग

बिहार के 688 मॉडल स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए भी डिजिटल पढ़ाई की व्यवस्था शुरू होने जा रही है। 15 अगस्त से कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को इंटरएक्टिव ऑनलाइन लर्निंग की सुविधा देने की तैयारी है।

इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत लाइव संवाद होगा। विद्यार्थी अपनी कक्षा और विषय के अनुसार ऑनलाइन शिक्षक से पढ़ाई कर सकेंगे और पढ़ाई के दौरान आने वाली परेशानी का समाधान सीधे पूछ सकेंगे।

विद्यार्थियों को पोर्टल या मोबाइल एप के जरिए पंजीकरण करना होगा। इसके बाद वे अपनी कक्षा, विषय और संबंधित टॉपिक का चयन कर ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे।

24 घंटे उपलब्ध रहने की योजना

नई ऑनलाइन व्यवस्था में विद्यार्थियों को हर समय शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। विद्यार्थियों के लिए शिक्षक की उपलब्धता 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन रखने की योजना है।

अगर किसी विद्यार्थी को किसी अध्याय या विषय को समझने में दिक्कत होती है तो वह अपना सवाल भेज सकेगा। शिक्षक उस सवाल का समाधान समझाकर देंगे।

यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क रखने की बात कही गई है। इससे खासकर उन विद्यार्थियों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जो महंगी निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते।

सरकारी स्कूलों की पढ़ाई को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम

बिहार में सरकारी स्कूलों को पूर्व छात्रों और समाज से जोड़ने के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा का दायरा बढ़ाने की कोशिश एक साथ आगे बढ़ रही है।

‘मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान’ पोर्टल के जरिए स्कूलों को समाज से संसाधन और विशेषज्ञता मिल सकती है, जबकि ऑनलाइन लर्निंग की व्यवस्था विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता दे सकती है।

अब इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने पूर्व छात्र, नागरिक और संस्थाएं वास्तव में विद्यालयों से जुड़ती हैं और स्कूलों की जरूरतों के अनुरूप कितना सहयोग उपलब्ध होता है।

अगर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्कूलों की वास्तविक जरूरतें स्पष्ट रूप से सामने आती हैं और सहयोग की प्रक्रिया पारदर्शी रहती है, तो इसका असर सरकारी विद्यालयों की सुविधाओं के साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी दिखाई दे सकता है।

यह भी पढ़ें

बिहार के मॉडल स्कूलों में बढ़ेंगी डिजिटल पढ़ाई की सुविधाएं, विद्यार्थियों को मिलेगा ऑनलाइन मार्गदर्शन

बिहार बोर्ड की नई पहल, सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बढ़ेगा दायरा

शिक्षा में समाज की भागीदारी से बदल सकती है तस्वीर

सरकारी स्कूलों के विकास की जिम्मेदारी केवल सरकार और शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं हो सकती। जिन विद्यालयों से पढ़कर लोग अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़े हैं, उनका अपने पुराने स्कूल से दोबारा जुड़ना विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का बड़ा माध्यम बन सकता है।

‘मेरा विद्यालय, मेरा स्वाभिमान’ जैसी पहल की सफलता इस बात में है कि इसे केवल दान जुटाने का माध्यम न बनाया जाए। पूर्व छात्र अगर विद्यार्थियों को पढ़ाने, मार्गदर्शन देने, करियर की जानकारी देने या आधुनिक तकनीक से जोड़ने में योगदान देते हैं तो इसका प्रभाव कहीं ज्यादा व्यापक होगा।

इसी तरह CSR के माध्यम से मिलने वाली सहायता का इस्तेमाल स्कूल की वास्तविक जरूरतों के अनुसार होना जरूरी है। पारदर्शी व्यवस्था और स्पष्ट प्राथमिकता से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि संसाधन वहीं पहुंचे जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

दूसरी तरफ ऑनलाइन शिक्षा सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए अवसरों की दूरी कम कर सकती है। जेईई-नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए डिजिटल माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों तक पहुंच मिलना उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जो बड़े शहरों की महंगी कोचिंग तक नहीं पहुंच पाते।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *