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Saharsa News:कोसी एक्सप्रेस के कोच से उठा धुआं, पहिए के पास लगी आग; समय रहते बची बड़ी अनहोनी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Saharsa News | Simri Bakhtiyarpur News | कोसी एक्सप्रेस के M-2 कोच में आग लगने से हड़कंप मच गया। गेटमैन की सतर्कता से समय रहते सूचना मिली और आग पर काबू पा लिया गया।

सहरसा, 12 अगस्त। आलम की खबर: सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन के पास बुधवार की सुबह चलती कोसी एक्सप्रेस के एक कोच में आग और धुआं दिखाई देने के बाद कुछ देर के लिए अफरातफरी की स्थिति बन गई। ट्रेन पूर्णिया कोर्ट से हटिया की ओर जा रही थी। घटना की सबसे अहम बात यह रही कि कोच के नीचे से निकल रहे धुएं पर समय रहते रेलवे फाटक के गेटमैन की नजर पड़ गई। सूचना तत्काल स्टेशन मास्टर तक पहुंची और रेलवे कर्मियों ने स्थिति संभालने की कार्रवाई शुरू कर दी।

घटना सुबह करीब 5:30 बजे के आसपास की बताई जा रही है। ट्रेन सिमरी बख्तियारपुर की ओर बढ़ रही थी। इसी दौरान रानीबाग ढाला के पास तैनात गेटमैन ने ट्रेन के एक कोच के निचले हिस्से से धुआं उठता देखा। सामान्य स्थिति से अलग धुआं दिखाई देने पर उसने बिना देर किए इसकी जानकारी रेलवे के संबंधित अधिकारियों को दी।

सूचना मिलते ही सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर मौजूद रेलकर्मी सक्रिय हो गए। ट्रेन के स्टेशन पहुंचने के बाद प्रभावित कोच की जांच की गई। इस दौरान कोच के नीचे पहिए और ब्रेक सिस्टम के आसपास आग के निशान और धुआं दिखाई दिया। रेलवे कर्मचारियों ने उपलब्ध अग्निशमन यंत्रों से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। स्थिति को देखते हुए फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी गई।

कुछ ही देर में दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने की कार्रवाई में जुट गई। रेलवे कर्मियों और अग्निशमन दल की संयुक्त कोशिश से आग को फैलने से रोक लिया गया। इसके बाद प्रभावित कोच में सफर कर रहे यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें दूसरे कोच में भेजा गया।

आग की घटना से यात्रियों के बीच स्वाभाविक रूप से चिंता और बेचैनी पैदा हुई। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना में किसी यात्री के घायल होने या किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। आग को समय रहते नियंत्रित कर लिए जाने से बड़ा हादसा टल गया।

ब्रेक सिस्टम में गड़बड़ी से आग लगने की आशंका

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आग कोच के नीचे ब्रेक सिस्टम के आसपास लगी थी। तकनीकी जांच में ब्रेक ब्लॉक के जाम होने और अत्यधिक घर्षण के कारण गर्मी पैदा होने की आशंका जताई गई है। अत्यधिक गर्म होने के बाद ब्रेक पैड के आसपास आग और धुआं निकलने की स्थिति बनी हो सकती है।

हालांकि आग लगने की अंतिम और आधिकारिक वजह तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। रेलवे की तकनीकी टीम प्रभावित कोच के ब्रेक सिस्टम और अन्य संबंधित हिस्सों की जांच कर सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि खराबी किस स्तर पर हुई और उससे आग की स्थिति क्यों बनी।

घटना के बाद ट्रेन को कुछ समय के लिए रोककर सुरक्षा संबंधी जांच की गई। स्थिति सामान्य पाए जाने के बाद ट्रेन को आगे की यात्रा के लिए रवाना किया गया। प्रभावित कोच के यात्रियों को भी सुरक्षा के मद्देनजर दूसरे कोच में स्थानांतरित किया गया।

गेटमैन की सतर्कता ने टाला बड़ा खतरा

इस घटना में गेटमैन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। ट्रेन के स्टेशन पहुंचने से पहले ही धुआं दिखाई देना और उसकी सूचना तुरंत स्टेशन मास्टर तक पहुंचना राहत का बड़ा कारण बना। अगर निचले हिस्से में हो रही समस्या पर समय रहते ध्यान नहीं जाता और आग बढ़ती रहती, तो स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती थी।

रेलवे परिचालन में ट्रेन के पहियों, ब्रेक और निचले हिस्से की तकनीकी स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होती है। चलती ट्रेन में ब्रेक सिस्टम अत्यधिक गर्म होने पर आग जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में रास्ते में तैनात रेलकर्मियों और गेटमैन की सतर्कता सुरक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी साबित होती है।

कुछ दिनों में दूसरी घटना, सुरक्षा पर सवाल

सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन के आसपास हाल के दिनों में ट्रेन में आग लगने की यह दूसरी घटना बताई जा रही है। इससे पहले 3 अगस्त को स्टेशन पर खड़ी समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन के इंजन में आग लग गई थी। उस घटना में भी किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं थी।

अब कुछ ही दिनों के अंतराल में कोसी एक्सप्रेस के कोच के निचले हिस्से में आग लगने की घटना सामने आने के बाद रेलवे की तकनीकी जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा होना स्वाभाविक है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं में यह जानना जरूरी है कि क्या दोनों घटनाओं के कारण पूरी तरह अलग हैं या कहीं रखरखाव और तकनीकी निरीक्षण से जुड़ा कोई साझा पहलू भी है।

हालांकि दोनों घटनाओं को सीधे जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी। प्रत्येक घटना की अलग तकनीकी जांच जरूरी है। रेलवे के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच में सामने आने वाली खामियों को समय रहते दूर किया जाए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर किसी तरह का जोखिम न रहे।

फिलहाल कोसी एक्सप्रेस को आगे के लिए रवाना कर दिया गया है। प्रभावित कोच की स्थिति, आग लगने के वास्तविक कारण और तकनीकी खराबी की प्रकृति को लेकर जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी। यात्रियों के लिए राहत की बात यही है कि इस घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई और आग को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया।

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सतर्कता से बच सकता है बड़ा रेल हादसा

ट्रेन में आग लगने की घटनाएं सिर्फ तकनीकी खराबी का मामला नहीं होतीं, बल्कि वे रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की कई परतों की परीक्षा भी होती हैं। सिमरी बख्तियारपुर के पास कोसी एक्सप्रेस के कोच से धुआं दिखाई देना और समय रहते इसकी सूचना मिल जाना बताता है कि रेलवे के फील्ड स्टाफ की सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण है।

चलती ट्रेन के पहियों और ब्रेक सिस्टम में किसी तरह की असामान्य गर्मी पैदा होना शुरुआती स्तर पर ही पकड़ लिया जाए तो बड़े हादसे की संभावना काफी कम की जा सकती है। इस मामले में भी यही हुआ। धुआं दिखाई दिया, सूचना पहुंची, ट्रेन की जांच हुई और आग को फैलने से पहले नियंत्रित कर लिया गया।

लेकिन घटना का दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि तकनीकी जांच में ब्रेक सिस्टम की खराबी सामने आती है तो यह देखना जरूरी होगा कि संबंधित कोच का पिछला निरीक्षण कब हुआ था और उसमें कोई शुरुआती खराबी दर्ज की गई थी या नहीं। केवल आग बुझा देना पर्याप्त नहीं है; ऐसी घटना दोबारा न हो, इसकी वजह तलाशना ज्यादा जरूरी है।

कुछ दिनों के भीतर उसी स्टेशन क्षेत्र में ट्रेन में आग की दूसरी घटना सामने आने से रेलवे के अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। यात्रियों का भरोसा तभी मजबूत होगा जब जांच के निष्कर्षों के आधार पर जरूरी सुधार भी दिखाई दें।

रेलवे देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था है। यहां छोटी तकनीकी चूक भी बड़े जोखिम में बदल सकती है। इसलिए गेटमैन से लेकर स्टेशन मास्टर, तकनीकी कर्मचारी और परिचालन से जुड़े हर स्तर पर सतर्कता ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।

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