:
Breaking News

Bihar News: बिहार के 3588 मदरसों में AI, ड्रोन और रोबोटिक्स की पढ़ाई, छात्रों को मिलेगा मुफ्त कौशल प्रशिक्षण

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | बिहार के 3588 मदरसों में AI, ड्रोन, कोडिंग, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन समेत कई तकनीकी ट्रेड में निशुल्क कौशल प्रशिक्षण देने की तैयारी।

पटना, 12 अगस्त। आलम की खबर: बिहार के मदरसों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की शिक्षा को आधुनिक तकनीक और रोजगार से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल शुरू करने की तैयारी की है। अब मदरसा शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को ऐसे तकनीकी कौशल सिखाए जाने की योजना है, जिनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

प्रस्तावित कौशल प्रशिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन तकनीक, कोडिंग, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे आधुनिक क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा मोबाइल रिपेयरिंग, कंप्यूटर शिक्षा और इलेक्ट्रिकल वायरिंग जैसे व्यावहारिक ट्रेड भी प्रशिक्षण का हिस्सा होंगे।

सबसे खास बात यह है कि यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों को निशुल्क उपलब्ध कराने की योजना है। सरकार का उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले युवाओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ ऐसे हुनर से जोड़ना है, जिससे आगे की पढ़ाई और रोजगार के रास्ते खुल सकें।

3588 मदरसों को योजना से जोड़ने की तैयारी

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अनुसार, राज्य में कुल 3588 मदरसों में कौशल विकास कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। इनमें 1942 अनुदान प्राप्त और 1646 गैर-अनुदानित मदरसे शामिल हैं।

योजना का दायरा सिर्फ सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों तक सीमित नहीं रखा गया है। गैर-अनुदानित मदरसों को भी इस कार्यक्रम में शामिल करने की तैयारी है।

इससे बड़ी संख्या में मदरसा विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण का अवसर मिलने की उम्मीद है।

AI से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन तक सीखेंगे छात्र

प्रारंभिक प्रशिक्षण में ऐसे ट्रेड चुने गए हैं जिनका संबंध मौजूदा समय की तकनीकी जरूरतों और रोजगार बाजार से है।

विद्यार्थियों को AI, ड्रोन, कोडिंग और रोबोटिक्स जैसी नई तकनीकों से परिचित कराने के साथ इलेक्ट्रिक वाहन से संबंधित कौशल भी सिखाया जाएगा।

इसके साथ ही कंप्यूटर शिक्षा, मोबाइल रिपेयरिंग और इलेक्ट्रिकल वायरिंग जैसे क्षेत्र भी शामिल किए गए हैं। ये ऐसे कौशल हैं जिन्हें विद्यार्थी प्रशिक्षण के बाद नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

NSIC के सहयोग से चलेगा कार्यक्रम

इस कौशल विकास कार्यक्रम को संचालित करने के लिए नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन लिमिटेड (NSIC) का सहयोग लिया जाएगा। यह केंद्र सरकार का उपक्रम है।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और NSIC के बीच इस संबंध में समझौता ज्ञापन यानी MoU किए जाने की तैयारी है। विभागीय स्तर पर अगले सप्ताह इसे लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

समझौते के बाद प्रशिक्षण को व्यवस्थित तरीके से मदरसों तक पहुंचाने और अलग-अलग तकनीकी ट्रेड के लिए प्रशिक्षण व्यवस्था तैयार करने का रास्ता साफ होगा।

मंत्री ने दिए व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. जमा खान की ओर से राज्य के मदरसों में विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

सरकार का जोर इस बात पर है कि मदरसा विद्यार्थियों को केवल किताबी शिक्षा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें बदलती तकनीक और रोजगार की जरूरतों के अनुरूप भी तैयार किया जाए।

इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी है।

प्रशिक्षण के बाद रोजगार पर भी फोकस

सरकार की योजना केवल प्रशिक्षण देकर विद्यार्थियों को छोड़ देने की नहीं है। कौशल विकास कार्यक्रम को रोजगार के अवसरों से जोड़ने की भी तैयारी है।

इसके लिए अलग-अलग जिलों में रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे। प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को इन आयोजनों के माध्यम से संभावित रोजगार अवसरों से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह होगा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को उनके कौशल के अनुरूप अवसर मिल सकें।

मदरसा शिक्षा में तकनीकी कौशल का नया अध्याय

बिहार में मदरसा शिक्षा को लेकर लंबे समय से आधुनिक विषयों और रोजगारपरक शिक्षा की जरूरत पर चर्चा होती रही है। ऐसे में AI, ड्रोन, कोडिंग और रोबोटिक्स जैसे विषयों को कौशल कार्यक्रम से जोड़ने की योजना एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा सकती है।

आज तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में यदि विद्यार्थियों को स्कूली स्तर से ही कंप्यूटर, कोडिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और नई तकनीक की बुनियादी जानकारी मिलने लगे तो आगे की पढ़ाई में भी उन्हें इसका लाभ मिल सकता है।

इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रिकल वायरिंग जैसे ट्रेड स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं भी पैदा कर सकते हैं।

मुफ्त प्रशिक्षण से छात्रों को मिलेगा अतिरिक्त अवसर

निशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए भी तकनीकी शिक्षा तक पहुंच आसान हो सकती है।

हालांकि योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त प्रशिक्षक, उपकरण, लैब और व्यावहारिक अभ्यास की व्यवस्था कितनी प्रभावी तरीके से की जाती है।

AI या रोबोटिक्स जैसे विषयों के लिए केवल कक्षा में सैद्धांतिक जानकारी पर्याप्त नहीं होगी। विद्यार्थियों को प्रयोग और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का अवसर भी देना होगा।

इसी तरह ड्रोन और इलेक्ट्रिक वाहन से जुड़े प्रशिक्षण में सुरक्षा मानकों और तकनीकी उपकरणों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी।

रोजगार से जुड़ा तो बड़ा बदलाव संभव

अगर प्रशिक्षण कार्यक्रम को रोजगार मेलों और उद्योगों से प्रभावी तरीके से जोड़ा जाता है तो इसका लाभ सिर्फ प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं रहेगा। विद्यार्थियों को वास्तविक नौकरी, अप्रेंटिसशिप और स्वरोजगार के रास्ते मिल सकते हैं।

बिहार सरकार की यह पहल मदरसा विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक कौशल उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा प्रयास हो सकती है। अब इसकी निगाह इस बात पर रहेगी कि 3588 मदरसों तक प्रशिक्षण व्यवस्था किस गति से पहुंचती है और विद्यार्थियों को इसका वास्तविक लाभ कब से मिलने लगता है।

यह भी पढ़ें

Bihar News: बिहार में युवाओं के लिए बढ़ रहे कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर

Bihar News: तकनीकी शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के लिए राज्य में नई योजनाओं पर जोर

मदरसा शिक्षा में तकनीक की दस्तक, असली चुनौती होगी गुणवत्ता

मदरसा विद्यार्थियों को AI, ड्रोन, कोडिंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों से जोड़ने का फैसला निश्चित रूप से समय के बदलाव के अनुरूप है। आज रोजगार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और केवल पारंपरिक शिक्षा के भरोसे युवाओं के लिए पर्याप्त अवसर हासिल करना आसान नहीं है।

लेकिन किसी भी कौशल कार्यक्रम की सफलता उसके नाम से नहीं, बल्कि जमीन पर होने वाले प्रशिक्षण से तय होती है। AI और रोबोटिक्स जैसे विषयों के लिए प्रशिक्षित शिक्षक, कंप्यूटर और प्रैक्टिकल उपकरण जरूरी होंगे।

अगर सरकार प्रशिक्षण के साथ अच्छी लैब, योग्य प्रशिक्षक और रोजगार से सीधा संपर्क सुनिश्चित करती है तो इसका असर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।

खासकर रोजगार मेलों को केवल औपचारिक आयोजन न बनाकर कंपनियों और स्थानीय उद्योगों से जोड़ा जाना चाहिए। विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के बाद अप्रेंटिसशिप और नौकरी के वास्तविक अवसर मिलेंगे, तभी इस योजना का उद्देश्य पूरा माना जाएगा।

बिहार के 3588 मदरसों में यह कार्यक्रम बड़े पैमाने पर लागू होने वाला है। इसलिए इसकी निगरानी, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के परिणाम पर नियमित नजर रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *