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Bihar Weather: बिहार में वज्रपात का कहर, 24 घंटे में 14 मौतें; कई जिलों में मचा हाहाकार

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Bihar Weather | बिहार के कई जिलों में वज्रपात से 24 घंटे के भीतर 14 लोगों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री ने मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये सहायता देने का निर्देश दिया।

पटना, 12 अगस्त। आलम की खबर: बिहार में मानसून की सक्रियता के बीच कई जिलों में वज्रपात लोगों के लिए जानलेवा साबित हुआ है। पिछले 24 घंटे के दौरान बांका, लखीसराय, नवादा, गया, जमुई और पटना समेत कई इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं में कुल 14 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।

कई हादसे उस समय हुए जब लोग खेतों में धान की रोपनी या दूसरे कृषि कार्य में जुटे थे। अचानक बारिश के साथ बिजली गिरने से लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अलग-अलग घटनाओं के बाद गांवों में मातम पसरा हुआ है।

बांका में सबसे ज्यादा नुकसान

बांका जिले में वज्रपात की अलग-अलग घटनाओं में पांच लोगों की जान चली गई। इनमें चार महिलाएं शामिल बताई गई हैं।

चांदन थाना क्षेत्र के बोंड़ा गांव में कुसमी देवी, रिंकू देवी और रेणु देवी की मौत की सूचना है। वहीं बौंसी प्रखंड के सिराय गांव में सुरेश यादव और काजीकैरी गांव में सुफियाना खातून भी आकाशीय बिजली की चपेट में आ गईं।

एक ही जिले में पांच मौतों की घटना से ग्रामीण इलाकों में शोक का माहौल है।

लखीसराय में तीन महिलाओं की मौत

लखीसराय जिले में भी वज्रपात ने तीन परिवारों को गहरा सदमा दिया। बन्नू बगीचा गांव में धान की रोपनी से लौट रही रुद्र देवी और कोमल कुमारी की मौत हो गई।

वहीं संग्रामपुर पंचायत के शिवडीह गांव में आंगनबाड़ी सहायिका अनुसूइया देवी भी वज्रपात की चपेट में आ गईं।

इन घटनाओं के बाद स्थानीय प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों से जानकारी जुटाई गई।

नवादा में तीन लोगों की जान गई

नवादा जिले के रजौली थाना क्षेत्र में भी आकाशीय बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत की सूचना है। दरियापुर गांव में मणि मांझी, इंद्रजीत मांझी और राजेंद्र मांझी हादसे का शिकार हुए।

बताया गया कि कुछ मजदूर दूसरे इलाके से धान की रोपनी के लिए यहां पहुंचे थे। इसी दौरान मौसम अचानक बिगड़ा और वज्रपात की घटना हो गई।

गया में खेत की ओर गए युवक की मौत

गया जिले के फतेहपुर थाना क्षेत्र के बोगिजोई गांव में रविशंकर कुमार की वज्रपात से मौत हो गई। वह धान रोपनी से संबंधित काम के लिए खेत की ओर गए थे।

इसी दौरान बारिश शुरू हुई और आकाशीय बिजली गिरने से वह उसकी चपेट में आ गए।

जमुई में महिला की मौत

जमुई के सोनो इलाके में गोरबा मटिहाना के पास खेत में धान की रोपनी कर रही 28 वर्षीय पूजा देवी की भी वज्रपात से मौत हो गई।

घटना के समय उनकी सास भी उनके साथ खेत में काम कर रही थीं। वह इस हादसे में बाल-बाल बच गईं।

14वीं मौत की जानकारी की आधिकारिक पुष्टि जरूरी

राज्य में 24 घंटे के भीतर कुल 14 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। हालांकि उपलब्ध जिलेवार विवरण में सभी 14 मृतकों की जानकारी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आती है। इसलिए जिन मृतकों के नाम और स्थान की पुष्टि उपलब्ध विवरण में है, उन्हीं को इस रिपोर्ट में शामिल किया गया है।

बाकी मौत के संबंध में आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही पूरी जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।

मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वज्रपात की घटनाओं में हुई मौतों पर दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने का निर्देश दिया है।

संबंधित अधिकारियों को प्रभावित परिवारों तक सरकारी सहायता जल्द पहुंचाने के लिए कहा गया है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि आपदा की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ प्रशासन खड़ा है।

खराब मौसम में विशेष सावधानी की अपील

वज्रपात की लगातार हो रही घटनाओं के बीच लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।

जब बारिश के साथ तेज गर्जना और बिजली चमकने लगे तो लोगों को खुले मैदान, खेत या अन्य खुले स्थानों में रहने से बचना चाहिए। मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर जाना ज्यादा बेहतर है।

पेड़ और बिजली के खंभों से रहें दूर

आकाशीय बिजली के दौरान पेड़ के नीचे खड़ा होना भी जोखिम भरा हो सकता है। लोगों को पेड़, बिजली के खंभे और खुले ऊंचे स्थानों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

खासकर किसान और खेतों में काम करने वाले मजदूर मौसम का मिजाज बिगड़ते ही सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। कुछ मिनट की सावधानी बड़े हादसे को टाल सकती है।

मानसून में बढ़ जाता है वज्रपात का खतरा

बिहार में मानसून के दौरान बारिश के साथ वज्रपात की घटनाएं लगातार सामने आती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका खतरा इसलिए भी ज्यादा रहता है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग खेती-किसानी के काम के लिए खुले खेतों में रहते हैं।

ऐसे में मौसम संबंधी चेतावनी को गंभीरता से लेना जरूरी है। प्रशासन की ओर से जारी अलर्ट और आपदा प्रबंधन संबंधी निर्देशों का पालन करने से जान बचाई जा सकती है।

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खेतों में काम कर रहे लोगों के लिए वज्रपात बना बड़ा खतरा

बिहार में धान की रोपनी का मौसम चल रहा है। बड़ी संख्या में किसान और मजदूर बारिश के बीच खेतों में काम कर रहे हैं। ऐसे में अचानक मौसम बदलने पर उनकी सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है।

वज्रपात से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि मौसम खराब होने के संकेत मिलते ही खुले खेत से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा जाए। तेज गर्जना के दौरान पेड़ के नीचे शरण लेना भी उचित नहीं है।

सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देना तत्काल राहत जरूर है, लेकिन ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए गांव-गांव तक मौसम चेतावनी और वज्रपात से बचाव की जानकारी पहुंचाना भी जरूरी है।

किसानों और मजदूरों को विशेष रूप से यह समझना होगा कि बारिश के दौरान खेत में काम जारी रखना हमेशा सुरक्षित नहीं होता। मौसम साफ होने का इंतजार करना कई बार जान बचाने वाला फैसला साबित हो सकता है।

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