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Bihar News: स्वतंत्रता दिवस पर सम्राट चौधरी ने पेश किया बिहार के विकास का रोडमैप

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वतंत्रता दिवस पर बिहार के विकास का रोडमैप पेश किया। निवेश, रोजगार, मुफ्त बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, पर्यटन और सामाजिक सुरक्षा को लेकर कई घोषणाएं की गईं।

पटना, 15 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित राजकीय समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के विकास को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं और आने वाले वर्षों के लक्ष्य का विस्तृत खाका सामने रखा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उद्योग, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, बिजली, पर्यटन, सामाजिक सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण योजनाओं और लक्ष्यों की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बिहार को सुरक्षित, समृद्ध और विकसित राज्य बनाना है। इसके लिए निवेश आकर्षित करने से लेकर युवाओं को रोजगार, गरीब परिवारों को आवासीय जमीन, किसानों को सिंचाई, आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और विद्यार्थियों के लिए पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी सम्राट चौधरी को बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री के रूप में दर्ज किया गया है।

नवंबर तक 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को तेज करने के लिए सरकार ने बड़ा निवेश लक्ष्य निर्धारित किया है। नवंबर तक करीब 5 लाख करोड़ रुपये का निजी निवेश राज्य में लाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि उद्योगों के लिए नीतिगत बदलाव किए जा रहे हैं और नए क्षेत्रों में निवेश के लिए वातावरण तैयार किया जा रहा है। सेमीकंडक्टर और आईटी क्षेत्र के लिए अलग-अलग नीतियां तैयार किए जाने की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने दी।

राज्य में 100 से अधिक औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, करीब 10 हजार एकड़ औद्योगिक जमीन की स्वीकृति और लगभग 14,100 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया का भी मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया। सरकार का प्रयास है कि बिहार में उद्योग आएं, नए कारखाने लगें और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हों।

बिहार में बने उत्पादों को खरीद में प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने स्थानीय उद्योग और कारोबार को बढ़ावा देने की दिशा में भी सरकार की योजना बताई। उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद में बिहार में तैयार होने वाले उत्पादों को कम से कम 30 प्रतिशत प्राथमिकता देने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।

इससे राज्य के छोटे और मध्यम कारोबारियों, स्थानीय उत्पादकों और उद्यमियों को बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पांच स्टील प्लांट स्थापित करने को लेकर करीब 51 हजार करोड़ रुपये के एमओयू हुए हैं।

30 हजार भूमिहीन परिवारों को बासगीत पर्चा

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने गरीब और भूमिहीन परिवारों को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य के करीब 30 हजार भूमिहीन गरीब परिवारों को बासगीत पर्चा के रूप में जमीन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके साथ ही राशन कार्ड से वंचित लोगों को सरकारी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने पर भी सरकार का जोर है। मुख्यमंत्री के अनुसार करीब एक करोड़ लोगों को राशन कार्ड से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है और पिछले एक महीने में ही 30 लाख से अधिक लोगों को राशन कार्ड से जोड़े जाने की जानकारी दी गई।

हर परिवार में एक उद्यमी बनाने की तैयारी

बिहार में स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की सरकार की योजना का भी मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप, उद्यमी योजना और लघु उद्यमी योजना के माध्यम से करीब आठ लाख लोगों को सहयोग दिया जा चुका है।

अब सरकार का लक्ष्य राज्य के करीब 3.25 करोड़ से अधिक परिवारों में कम से कम एक उद्यमी तैयार करना है। इसका उद्देश्य युवाओं और परिवारों को रोजगार तलाशने वाले से रोजगार देने वाले की भूमिका में लाना है।

मुख्यमंत्री ने बिहार से बाहर काम कर रहे लोगों से भी अपील की कि वे अपनी क्षमता और अनुभव के साथ अपनी जन्मभूमि लौटकर राज्य के विकास में योगदान दें।

हर महीने 125 यूनिट मुफ्त बिजली

बिजली के क्षेत्र में हुए बदलाव को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बिजली की उपलब्धता और खपत में बड़ा बदलाव आया है। उनके अनुसार बिजली की खपत करीब 950 मेगावाट से बढ़कर 9475 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अमीर और गरीब सभी परिवारों को हर महीने 125 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध करा रही है। इसे उन्होंने बिहार के बिजली क्षेत्र में आए बड़े बदलाव के रूप में पेश किया।

छह महीने में पांच और चीनी मिलों पर काम

कृषि आधारित उद्योगों को लेकर मुख्यमंत्री ने चीनी मिलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रामनगर की चीनी मिल शुरू हो चुकी है और अगले छह महीने में पांच और चीनी मिलों पर काम शुरू करने का लक्ष्य है।

राज्य में कुल 25 चीनी मिल स्थापित करने की योजना की जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही मखाना, जर्दालू आम और बिहार के अन्य स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की बात कही गई।

मुख्यमंत्री ने मखाना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का उल्लेख करते हुए स्थानीय उत्पादों को बिहार की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने पर जोर दिया।

स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावा

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि सभी प्रखंडों के 30 बेड वाले अस्पतालों और जिला अस्पतालों को मजबूत किया जाएगा।

जिला अस्पतालों में 36 प्रकार के ऑपरेशन की सुविधा विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 15 अगस्त के बाद यदि किसी जिले में मरीजों को अनावश्यक रूप से दूसरे स्थान पर रेफर किया जाता है तो संबंधित सिविल सर्जन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

15 जिलों में PPP मॉडल पर मेडिकल कॉलेज

राज्य के 15 जिलों में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की योजना की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने दी।

उन्होंने दवा आपूर्ति के क्षेत्र में बिहार की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य पिछले 22 महीनों से इस मामले में देश में पहले स्थान पर है। सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को बिहार सरकार स्वास्थ्य योजना का लाभ देने की बात भी कही गई।

करीब 10 करोड़ लोगों तक आयुष्मान का लाभ

मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना के विस्तार की भी जानकारी दी। उनके अनुसार पहले करीब 7.5 करोड़ लोगों को योजना से जोड़ा गया था और अब 2.5 करोड़ और लोगों को इससे जोड़ा गया है।

इस तरह करीब 10 करोड़ बिहारियों तक योजना का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य बताया गया। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है।

परीक्षा व्यवस्था पर निगरानी के लिए रिटायर्ड जज की कमेटी

शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी।

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए भी उच्चस्तरीय समिति गठित करने की बात कही गई।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 17 अगस्त से विद्यार्थी सहयोग पोर्टल शुरू किया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को छात्रावास, कोचिंग और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की सुविधा मिलेगी और शिकायतों के समाधान के लिए 30 दिनों की समय-सीमा तय की जाएगी।

75 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर बैठे सुविधा

वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी मुख्यमंत्री ने नई सुविधा की घोषणा की। 75 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर से ही जमीन की रजिस्ट्री और खरीद-बिक्री की सुविधा देने की योजना बताई गई।

इसके साथ ही बुजुर्गों को घर पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम करने की बात कही गई। सरकार का उद्देश्य उम्रदराज लोगों को कार्यालयों और अस्पतालों के अनावश्यक चक्कर से राहत देना है।

सिंचाई का दायरा 21 से 44 लाख हेक्टेयर

कृषि क्षेत्र के लिए सिंचाई सुविधा को मुख्यमंत्री ने विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके अनुसार वर्ष 2005 में बिहार में करीब 21 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित थी, जो अब बढ़कर लगभग 44 लाख हेक्टेयर हो गई है।

कोसी-मेची लिंक परियोजना सहित कई सिंचाई योजनाओं को आगे बढ़ाने की जानकारी दी गई। करीब 10 हजार करोड़ रुपये की 46 परियोजनाओं पर काम चलने का भी उल्लेख किया गया।

इसके अलावा सोन नदी को फल्गु नदी से जोड़ने की योजना का भी मुख्यमंत्री ने जिक्र किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य कृषि भूमि तक पानी की पहुंच बढ़ाना और किसानों की सिंचाई संबंधी परेशानी कम करना है।

शिकायतों के निपटारे पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक जवाबदेही के लिए चलाए जा रहे सहयोग कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार अब तक 6,46,281 आवेदन प्राप्त हुए हैं और करीब 95 प्रतिशत शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है।

लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि 17,773 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पहला, 860 को दूसरा और 48 को तीसरा नोटिस दिया गया है।

हर महीने के दूसरे मंगलवार को मुख्यमंत्री सचिवालय में सहयोग कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई। पंचायत स्तर पर प्रत्येक महीने के अंतिम रविवार को पंचायत विकास दिवस आयोजित करने का भी लक्ष्य रखा गया है।

पर्यटन को हेलीकॉप्टर सेवा से जोड़ने की तैयारी

बिहार के पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा का विस्तार करने की योजना भी सामने रखी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि 2100 रुपये में पटना का हेलीकॉप्टर से भ्रमण कराया जा रहा है।

आगे राजगीर, वाल्मीकिनगर, कैमूर और सासाराम जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को भी हेलीकॉप्टर सेवा से जोड़ने की योजना है। इससे राज्य के धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान बनाने की कोशिश होगी।

सीतामढ़ी में बनेगा भव्य मां सीता मंदिर

धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को लेकर मुख्यमंत्री ने सीतामढ़ी में करीब 1000 करोड़ रुपये की लागत से मां सीता के भव्य मंदिर के निर्माण की बात कही।

इसके साथ ही बोधगया और विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर के विकास की योजना का उल्लेख किया गया। विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने दी।

बिहटा में करीब 10 एकड़ जमीन पर तिरुपति बालाजी मंदिर निर्माण के लिए तिरुपति ट्रस्ट को जमीन उपलब्ध कराने की बात भी मुख्यमंत्री के संबोधन में सामने आई।

विकास के साथ जवाबदेही पर जोर

स्वतंत्रता दिवस के मंच से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की घोषणाओं का दायरा उद्योग से लेकर गांव, शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य और पर्यटन से लेकर प्रशासन तक फैला रहा। सरकार ने निवेश और रोजगार को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने के साथ-साथ गरीब, भूमिहीन, बुजुर्ग, विद्यार्थी और किसानों के लिए अलग-अलग योजनाओं को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

इन घोषणाओं के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इनके समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन की होगी। निवेश के लक्ष्य को जमीन पर उतारना, उद्योगों को चालू करना, युवाओं को रोजगार देना, अस्पतालों में वास्तविक सुविधाएं बढ़ाना, परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और सिंचाई परियोजनाओं को समय पर पूरा करना सरकार के लिए अहम कसौटी होगी।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गांधी मैदान से मुख्यमंत्री ने जिस विकसित बिहार का रोडमैप रखा है, उसकी सफलता का वास्तविक आकलन आने वाले वर्षों में योजनाओं के धरातल पर उतरने और आम लोगों तक उसका लाभ पहुंचने से होगा।

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विकास के रोडमैप की असली परीक्षा अब जमीन पर

स्वतंत्रता दिवस के मंच से बड़े लक्ष्यों की घोषणा किसी भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश होती है, लेकिन असली चुनौती उन घोषणाओं को जमीन पर उतारने की होती है। बिहार जैसे बड़े और विविधतापूर्ण राज्य में निवेश, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और उद्योग के क्षेत्र में बदलाव का असर तभी दिखाई देगा जब योजनाओं की निगरानी मजबूत हो और समयसीमा का पालन हो।

5 लाख करोड़ रुपये के निजी निवेश का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है। इसके लिए केवल एमओयू पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि उद्योगों को जमीन, बिजली, परिवहन, कुशल मानव संसाधन और तेज प्रशासनिक मंजूरी उपलब्ध करानी होगी। इसी तरह हर परिवार में एक उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य भी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार की उपलब्धता से ही सफल हो सकता है।

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी घोषणा से ज्यादा जरूरी उसका क्रियान्वयन है। जिला अस्पतालों में ऑपरेशन की सुविधा और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जैसी पहल सीधे आम लोगों और विद्यार्थियों से जुड़ी हैं।

अगर सरकार इन लक्ष्यों को तय समय में लागू करने में सफल होती है तो बिहार की विकास यात्रा को नई गति मिल सकती है। अब जनता की नजर घोषणाओं से आगे बढ़कर उनके परिणामों पर होगी।

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