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Patna News: सोमवारी स्नान के दौरान गंगा में डूबीं 7 किशोरियां, 2 शव मिले, 2 लापता; NH-31 जाम

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बख्तियारपुर के रानीसराय जहाजी घाट पर सोमवारी स्नान के दौरान सात किशोरियां गंगा में डूब गईं। दो शव बरामद हुए हैं, जबकि दो की तलाश जारी है।

बख्तियारपुर, 17 अगस्त। सावन की सोमवारी पर गंगा स्नान करने पहुंचीं किशोरियों के लिए सोमवार का दिन मातम में बदल गया। पटना जिले के बख्तियारपुर थाना क्षेत्र स्थित रानीसराय जहाजी घाट पर गंगा स्नान के दौरान सात किशोरियां तेज धारा की चपेट में आ गईं। अचानक हुए हादसे के बाद घाट पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल नदी में उतरकर बचाव का प्रयास किया और तीन किशोरियों को बाहर निकालने में सफलता मिली। हादसे में बाद की सूचना के अनुसार दो किशोरियों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है।

घटना की शुरुआत उस समय हुई जब रानीसराय गांव की सात किशोरियां सोमवारी के अवसर पर गंगा स्नान के लिए जहाजी घाट पहुंचीं। घाट पर स्नान के दौरान अचानक दो किशोरियां नदी की तेज धारा में फंस गईं। उन्हें डूबता देख साथ मौजूद अन्य किशोरियों ने बचाने की कोशिश की। मदद के लिए नदी में उतरने के दौरान स्थिति और बिगड़ गई और देखते ही देखते कई किशोरियां गहरे पानी और तेज बहाव की चपेट में आ गईं।

घाट पर मौजूद लोगों को जैसे ही घटना का पता चला, वहां चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों ने बिना देर किए नदी में उतरकर बचाव अभियान शुरू किया। स्थानीय लोगों की कोशिश से तीन किशोरियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। शुरुआती रिपोर्ट में चार किशोरियों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी और SDRF की टीम को भी खोज अभियान में लगाया गया।

बाद में स्थानीय स्तर से मिली जानकारी के अनुसार, लापता किशोरियों में से दो के शव बरामद किए गए। दो किशोरियों की तलाश अभी भी जारी है। गंगा में पानी का बहाव तेज होने के कारण खोज अभियान में लगातार मुश्किलें सामने आ रही हैं। नदी की गहराई और तेज धारा के बीच गोताखोरों तथा बचाव दल को सावधानी के साथ अभियान चलाना पड़ रहा है।

हादसे की खबर गांव में पहुंचते ही बड़ी संख्या में लोग रानीसराय जहाजी घाट पर पहुंच गए। जिन परिवारों की बेटियां नदी में बह गईं, उनके बीच चीख-पुकार मची हुई है। परिजनों की निगाहें लगातार गंगा की ओर लगी हैं। घाट पर मौजूद ग्रामीणों ने प्रशासन से खोज अभियान को और तेज करने तथा अधिक संख्या में गोताखोर और बचाव संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की।

इस हादसे ने एक बार फिर गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सावन की सोमवारी और नागपंचमी के कारण गंगा घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में गहरे पानी वाले हिस्सों की पहचान, बैरिकेडिंग, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और श्रद्धालुओं को लगातार चेतावनी देने की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।

घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी दिखाई दी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घाट पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं को नदी के खतरनाक हिस्सों तक जाने से रोकने में कठिनाई होती है। इसी नाराजगी के बीच लोगों ने बख्तियारपुर-बाढ़ मार्ग पर NH-31 को जाम कर दिया। सड़क पर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से यातायात प्रभावित हुआ और दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक अवसरों पर घाटों पर भीड़ बढ़ने के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते। उनका कहना है कि यदि घाट पर पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी, गोताखोर और नाव उपलब्ध रहें तो ऐसे हादसों में तत्काल मदद पहुंचाई जा सकती है।

प्रशासन और पुलिस की टीमों की ओर से नदी में खोज अभियान जारी रहने की सूचना है। SDRF और स्थानीय गोताखोर लापता किशोरियों की तलाश में जुटे हैं। परिवारों के लिए हर गुजरता पल भारी है और घाट पर मौजूद लोगों की नजरें लगातार नदी की ओर टिकी हुई हैं।

बख्तियारपुर के रानीसराय जहाजी घाट की यह घटना सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे इलाके के लिए गहरे सदमे की वजह बन गई है। जिन किशोरियों को सावन की सोमवारी पर गंगा स्नान के बाद घर लौटना था, उनके परिवार अब उनकी तलाश में घाट पर बैठे हैं। हादसे के बाद सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता दोनों किशोरियों का पता लगाना और बचाव अभियान को पूरी क्षमता के साथ जारी रखना है।

नोट: उपलब्ध शुरुआती रिपोर्ट में सात किशोरियों के डूबने, तीन के बचाए जाने और चार के लापता होने की जानकारी प्रकाशित हुई थी। आपके द्वारा दी गई बाद की स्थानीय अपडेट के अनुसार इनमें से दो के शव बरामद होने की सूचना जोड़ी गई है।

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गंगा घाटों पर सुरक्षा सिर्फ व्यवस्था नहीं, जिम्मेदारी भी

गंगा घाटों पर धार्मिक आस्था के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग स्नान के लिए पहुंचते हैं। सावन और सोमवारी जैसे अवसरों पर भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल भीड़ नियंत्रित करने तक सीमित नहीं रह सकती। घाट पर गहरे पानी वाले स्थानों की पहचान, चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, नाव और प्रशिक्षित गोताखोरों की उपलब्धता जरूरी है।

रानीसराय की घटना यह सवाल छोड़ जाती है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए घाटों पर पहले से कितनी तैयारी रहती है। नदी का बहाव बदलता रहता है और बारिश के मौसम में खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए लोगों को भी प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए और अनजान अथवा गहरे हिस्सों में स्नान करने से बचना चाहिए।

हादसे के बाद सड़क जाम होना ग्रामीणों की नाराजगी को दिखाता है, लेकिन ऐसी स्थिति में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद भी जरूरी है। फिलहाल सबसे अहम काम लापता किशोरियों की तलाश और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना है।

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