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Patna News: पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री के विरोध में मसौढ़ी के कातिबों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, 9 दस्तावेजों का निबंधन

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पेपरलेस और डिजिटल जमीन रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में मसौढ़ी निबंधन कार्यालय के कातिबों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। इसके बावजूद दो दिनों में 9 दस्तावेजों का निबंधन हुआ।

पटना, 18 अगस्त। जमीन और मकान की रजिस्ट्री की प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाने के सरकार के कदम के विरोध में मसौढ़ी निबंधन कार्यालय के कातिबों की अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही। कातिबों के काम से दूर रहने के कारण जमीन-मकान की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, कातिबों की हड़ताल के बावजूद निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई और दो दिनों में कुल नौ दस्तावेजों का निबंधन किया गया।

सरकार की नई व्यवस्था में दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक डिजिटल और पेपरलेस बनाया जा रहा है। इसी व्यवस्था को लेकर कातिबों में असंतोष है। उनका कहना है कि वे तकनीक या डिजिटल निबंधन व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन नई प्रणाली में दस्तावेज नवीसों यानी कातिबों की भूमिका को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

हड़ताल कर रहे कातिबों की प्रमुख मांग है कि नई व्यवस्था में उन्हें अलग यूजर आईडी उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा और उनके पेशे से जुड़ी आजीविका की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए जाएं।

कातिबों का तर्क है कि जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज तैयार करने में उनकी लंबे समय से भूमिका रही है। यदि पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने के बाद दस्तावेज तैयार करने के काम में उनकी भूमिका समाप्त कर दी जाती है तो बड़ी संख्या में इस पेशे से जुड़े लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।

साइबर धोखाधड़ी और संपत्ति हेराफेरी की आशंका

कातिबों ने नई डिजिटल व्यवस्था को लेकर साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि ओटीपी आधारित पहचान और पूरी प्रक्रिया के डिजिटल होने से साइबर धोखाधड़ी की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने संपत्ति के दस्तावेजों में हेराफेरी और गलत तरीके से संपत्ति हस्तांतरण जैसी संभावनाओं को लेकर भी चिंता जताई है। कातिबों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू करने से पहले सरकार को सुरक्षा के सभी पहलुओं को मजबूत करना चाहिए।

हालांकि, कातिबों ने यह स्पष्ट किया है कि उनका विरोध डिजिटल तकनीक से नहीं है। वे चाहते हैं कि नई व्यवस्था में तकनीक के साथ दस्तावेज नवीसों की भूमिका को भी व्यवस्थित तरीके से शामिल किया जाए। इसके लिए सरकार की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की जा रही है।

रजिस्ट्री कार्यालय में काम जारी

मसौढ़ी की सब रजिस्ट्रार अमृता कुमारी ने बताया कि 17 अगस्त से बिहार के 91 निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था शुरू की गई है। कातिबों के हड़ताल पर रहने के बावजूद मसौढ़ी निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री का काम जारी है।

उनके अनुसार सोमवार और मंगलवार को मिलाकर कार्यालय में कुल नौ दस्तावेजों का निबंधन किया गया। इसका मतलब है कि कातिबों की हड़ताल का असर दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया पर जरूर पड़ा है, लेकिन निबंधन कार्यालय का काम पूरी तरह ठप नहीं हुआ है।

सब रजिस्ट्रार ने लोगों से अपील की है कि जिन्हें जमीन या मकान का निबंधन कराना है, वे निबंधन कार्यालय पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि कार्यालय में निबंधन की प्रक्रिया जारी है।

गुरुवार से पेपरलेस व्यवस्था के तहत काम

सब रजिस्ट्रार अमृता कुमारी ने बताया कि मसौढ़ी निबंधन कार्यालय में गुरुवार से पेपरलेस व्यवस्था के तहत काम शुरू किया जाएगा। इसके बाद नई डिजिटल प्रणाली के माध्यम से निबंधन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही अब दस्तावेज तैयार करने, पहचान सत्यापन और निबंधन की प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक की भूमिका बढ़ने वाली है। सरकार का उद्देश्य निबंधन प्रक्रिया को कागजरहित और अधिक तकनीक आधारित बनाना है।

वहीं, कातिबों का कहना है कि व्यवस्था में बदलाव के साथ उनके पेशे और अधिकारों को लेकर भी स्पष्ट नीति होनी चाहिए। वे सरकार से इस मुद्दे पर बातचीत कर समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं।

जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों की बढ़ी चिंता

कातिबों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो जमीन या मकान की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने के लिए उनके पास पहुंचते हैं। हालांकि निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री जारी रहने के कारण पूरी प्रक्रिया बंद नहीं हुई है, लेकिन दस्तावेज तैयार कराने वाले लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ रही है।

मसौढ़ी निबंधन कार्यालय में आने वाले लोगों के लिए आने वाले दिनों में नई व्यवस्था को समझना भी जरूरी होगा। डिजिटल प्रणाली के तहत कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए, पहचान सत्यापन किस तरह होगा और आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी, इसकी जानकारी निबंधन कार्यालय से लेना महत्वपूर्ण रहेगा।

फिलहाल कातिबों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है। एक तरफ सरकार पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कातिब अपनी भूमिका और आजीविका को लेकर सरकार से स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं। अब इस विवाद का समाधान बातचीत से निकलता है या हड़ताल आगे भी जारी रहती है, इस पर नजर रहेगी।

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डिजिटल व्यवस्था के साथ रोजगार की चिंता का समाधान भी जरूरी

निबंधन प्रक्रिया को पेपरलेस और डिजिटल बनाना समय की जरूरत है। इससे कागजी प्रक्रिया कम हो सकती है और रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन किसी भी नई व्यवस्था को लागू करते समय उससे जुड़े लोगों की भूमिका और रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

मसौढ़ी के कातिबों का विरोध इसी चिंता से जुड़ा है। वे डिजिटल व्यवस्था को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे, बल्कि नई प्रणाली में अपनी भूमिका स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। यह मांग बातचीत के जरिए हल की जा सकती है।

दूसरी ओर, डिजिटल रजिस्ट्री में साइबर सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय है। जमीन और संपत्ति के दस्तावेज बेहद संवेदनशील होते हैं। इसलिए ओटीपी आधारित पहचान, डिजिटल हस्ताक्षर और ऑनलाइन रिकॉर्ड की सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था जरूरी है।

सरकार यदि नई व्यवस्था के लाभ के साथ कातिबों की भूमिका, प्रशिक्षण और रोजगार सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नीति तैयार करती है, तो विरोध की स्थिति को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है। तकनीक और पारंपरिक अनुभव के बीच संतुलन बनाकर ही ऐसी व्यवस्था को लंबे समय तक सफल बनाया जा सकता है।

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