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Bihar Politics: तेजस्वी यादव का राजभवन मार्च, सीवान AK-47 फायरिंग पर सरकार से 15 सवाल

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | तेजस्वी यादव ने पटना में राजभवन मार्च निकाला। सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 फायरिंग, लाठीचार्ज और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांगा।

पटना, 19 अगस्त। बिहार में छात्र आंदोलन और सीवान में प्रदर्शन के दौरान हुई AK-47 फायरिंग के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने बुधवार को राजधानी पटना में सरकार के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी कार्यकर्ता राजभवन की ओर मार्च करने निकले। कार्यक्रम को लेकर पार्टी की ओर से पहले ही बड़ी संख्या में नेताओं, विधायकों और कार्यकर्ताओं से शामिल होने की अपील की गई थी। कार्यक्रम के समय और शुरुआती स्थान में बदलाव के बाद मार्च जेपी गोलंबर से आगे बढ़ा।

मार्च में शामिल कार्यकर्ताओं के हाथों में तिरंगा, पार्टी से जुड़े झंडे और तेजस्वी यादव की तस्वीर वाली तख्तियां नजर आईं। कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्र हितों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाए। प्रदर्शन को देखते हुए पटना में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए और मार्च के रास्ते पर पुलिस की तैनाती की गई।

तेजस्वी यादव ने मार्च को केवल राजनीतिक प्रदर्शन के तौर पर पेश करने के बजाय इसे छात्रों के अधिकार और सरकार की जवाबदेही से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरते हैं तो उन पर लाठीचार्ज और बल प्रयोग क्यों किया जाता है। इसी क्रम में उन्होंने सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से फायरिंग किए जाने की घटना को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा।

यह मामला 25 जुलाई को सीवान में परीक्षा से जुड़ी मांगों को लेकर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान सामने आया था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई और भीड़ नियंत्रण में हथियारों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे थे। पुलिस की ओर से संबंधित जवान को निलंबित किया गया था। प्रशासन ने बाद में कहा था कि जवान ने भीड़ के बीच अपने स्तर पर हवाई फायरिंग की थी और यह स्पष्ट किया था कि उसे गोली चलाने का आदेश नहीं दिया गया था। घटना में घायल हुए युवकों को लेकर भी जांच की बात कही गई थी।

तेजस्वी यादव इसी कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही का सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि छात्र आंदोलन के दौरान इतनी गंभीर स्थिति पैदा हुई तो केवल निचले स्तर के एक पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करके पूरे मामले को खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूछा कि उस समय मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच क्यों नहीं की जा रही है।

इसी विवाद के बीच बिहार पुलिस ने भीड़ नियंत्रण और सामान्य कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में AK-47, INSAS और SLR जैसे असॉल्ट हथियारों के इस्तेमाल को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। पुलिस की ओर से कहा गया है कि ऐसे हथियारों का इस्तेमाल सामान्य प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण के बजाय गंभीर आपराधिक, आतंकवाद या संगठित अपराध जैसी परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए। इस आदेश के बाद सीवान की घटना एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है।

तेजस्वी यादव ने मार्च से पहले सरकार के सामने कुल 15 सवाल रखे। इन सवालों का केंद्र छात्र आंदोलन, परीक्षा व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और सीवान में हुई फायरिंग की जवाबदेही रहा। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ पुलिस की कार्रवाई किस परिस्थिति में हुई और फायरिंग की नौबत क्यों आई।

आरजेडी नेता लगातार यह भी आरोप लगा रहे हैं कि छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपनाया। हालांकि सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से तेजस्वी के आरोपों को राजनीतिक प्रदर्शन करार दिया गया है। सत्ता पक्ष का कहना है कि प्रशासन ने कानून के अनुसार कार्रवाई की और जिन मामलों में जरूरत थी, वहां कार्रवाई भी की गई।

राजभवन मार्च के दौरान आरजेडी कार्यकर्ताओं की भीड़ से पटना की राजनीतिक हलचल बढ़ गई। कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रीय ध्वज और तेजस्वी यादव की तस्वीर वाली तख्तियां लेकर आगे बढ़ते रहे। पार्टी नेताओं ने इसे छात्रों की आवाज को मजबूत करने वाला आंदोलन बताया। वहीं, पुलिस प्रशासन की कोशिश रही कि मार्च के दौरान यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

तेजस्वी यादव का यह मार्च ऐसे समय हुआ है जब बिहार में परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्र आंदोलनों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। आरजेडी इन मुद्दों को राजनीतिक अभियान का बड़ा हिस्सा बना रही है। पार्टी का कहना है कि युवाओं और छात्रों से जुड़े सवालों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

सीवान की AK-47 फायरिंग ने इस राजनीतिक टकराव को और तीखा कर दिया है। एक तरफ पुलिस का कहना है कि संबंधित जवान ने आदेश के बिना कार्रवाई की और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई, दूसरी तरफ विपक्ष वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।

मार्च के जरिए तेजस्वी यादव ने यह संदेश देने की कोशिश की कि छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे अब सिर्फ परीक्षा या भर्ती व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुके हैं। आरजेडी ने सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए सड़क से लेकर राजनीतिक मंच तक आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं।

अब इस पूरे मामले में निगाह सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। खासकर सीवान की घटना में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका, छात्रों के साथ पुलिस कार्रवाई और परीक्षा से जुड़े विवादों पर सरकार क्या स्पष्ट जवाब देती है, यह आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा बना रह सकता है।

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सरकार के सामने तेजस्वी के सवालों का राजनीतिक असर

तेजस्वी यादव का राजभवन मार्च बिहार की राजनीति में सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं है। इसके पीछे छात्र आंदोलन, परीक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदलने की रणनीति दिखाई देती है। सीवान में AK-47 से फायरिंग की तस्वीर सामने आने के बाद विपक्ष को सरकार को घेरने का एक प्रभावी मुद्दा मिला है। हालांकि पुलिस की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि संबंधित जवान ने आदेश के बिना फायरिंग की और उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है।

ऐसे में असली राजनीतिक सवाल यह है कि क्या विपक्ष सरकार से केवल एक पुलिसकर्मी की कार्रवाई का जवाब मांग रहा है या पूरे प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। तेजस्वी यादव ने इसी बिंदु को अपने मार्च का मुख्य आधार बनाया है।

सरकार के लिए चुनौती यह है कि छात्र आंदोलनों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता का भरोसा कायम किया जाए। वहीं विपक्ष के लिए चुनौती यह है कि वह राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर ठोस सवालों और तथ्यों के साथ सरकार को घेर सके। आने वाले दिनों में सीवान फायरिंग और छात्र आंदोलन का मुद्दा बिहार की राजनीति में कितना बड़ा असर डालता है, यह सरकार की अगली कार्रवाई और विपक्ष की आंदोलन रणनीति पर निर्भर करेगा।

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