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Bihar News: गंगा-कोसी-गंडक समेत कई नदियां उफान पर, पटना के दियारा इलाकों में बढ़ा खतरा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, सोन और बागमती समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा है। पटना के दियारा समेत कई तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ने के बाद प्रशासन अलर्ट है।

बिहार, 21 अगस्त। आलम की खबर: बिहार में भले ही इस मानसून सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई हो, लेकिन राज्य की प्रमुख नदियों का बढ़ता जलस्तर अब चिंता बढ़ाने लगा है। गंगा, कोसी, गंडक, सोन, बागमती और घाघरा समेत कई नदियां उफान पर हैं। पटना से लेकर भागलपुर तक कई नदी किनारे के इलाकों में पानी बढ़ने से खतरा मंडरा रहा है। पटना के दियारा क्षेत्रों में स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सतर्क करना शुरू कर दिया है और जरूरत वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर गुरुवार दोपहर खतरे के निशान से करीब 20 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। आने वाले समय में इसके और बढ़ने की संभावना जताई गई है। ऐसे में नदी के आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

गंगा का जलस्तर कई इलाकों में बढ़ा

पटना के गांधी घाट के अलावा दीघाघाट और राज्य के दूसरे गंगा घाटों पर भी जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में दीघाघाट के साथ-साथ हाथीदह, साहिबगंज और कहलगांव में भी गंगा का पानी खतरे के निशान को पार कर सकता है।

यदि जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो नदी से जुड़े निचले इलाकों में पानी फैलने की स्थिति बन सकती है। यही वजह है कि प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है।

सोन नदी ने भी बढ़ाई चिंता

सोन नदी का जलस्तर भी इस मौसम में काफी बढ़ा है। इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी में करीब 2.94 लाख क्यूसेक पानी दर्ज किया गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे अधिक स्तर बताया जा रहा है।

सोन नदी का बढ़ा प्रवाह गंगा में मिलने वाले पानी को भी प्रभावित करता है। ऐसे में गंगा के पहले से बढ़े जलस्तर के बीच सोन का बढ़ता पानी प्रशासन के लिए अतिरिक्त चिंता का कारण बन सकता है।

गंडक खतरे के निशान से ऊपर

उत्तर बिहार में गंडक नदी भी कई इलाकों में उफान पर है। गोपालगंज जिले के डुमरियाघाट में गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 61 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। हालांकि यहां जलस्तर में कमी आने की संभावना भी जताई गई है।

दूसरी ओर पश्चिमी चंपारण के बगहा क्षेत्र में नदी के कटाव ने परेशानी बढ़ा दी है। कई स्थानों पर नदी का पानी घरों और खेतों तक पहुंचने की सूचना है। कटाव की वजह से ग्रामीणों के सामने जमीन और आवास दोनों को लेकर संकट पैदा हो गया है।

घाघरा और बागमती भी उफान पर

सीवान जिले के दरौली में घाघरा नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया। यहां पानी लाल निशान से करीब 13 सेंटीमीटर ऊपर बताया गया है।

मुजफ्फरपुर जिले के वेनीवाद में बागमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 37 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। बागमती के बढ़ते पानी को देखते हुए आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

पटना के दियारा क्षेत्रों में बढ़ी चिंता

गंगा का जलस्तर बढ़ने का सबसे ज्यादा असर पटना के दियारा क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। नदी के बीच और आसपास बसे इन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जलस्तर में थोड़ी सी भी अतिरिक्त वृद्धि परेशानी पैदा कर सकती है।

प्रशासन की ओर से प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। जिन स्थानों पर पानी तेजी से बढ़ रहा है, वहां लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कार्रवाई की जा रही है। राहत और बचाव की तैयारी भी पहले से रखने के निर्देश दिए गए हैं।

दियारा क्षेत्र के लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि गंगा का पानी और ऊपर जाता है तो खेतों के साथ-साथ आवासीय इलाकों में भी पानी पहुंच सकता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से नदी के किनारे जाने से बचने की अपील की है।

बेगूसराय से भागलपुर तक बढ़ा नदी का दबाव

बिहार के मध्य और पूर्वी हिस्सों में भी नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर दिखाई दे रहा है। बेगूसराय जिले के मुंगेर घाट क्षेत्र में गंगा का पानी लगातार बढ़ने की स्थिति में है।

बक्सर में भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास बना हुआ है। वहीं भागलपुर और कहलगांव क्षेत्र में भी आने वाले दिनों में जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है।

इस तरह पटना से भागलपुर तक गंगा के किनारे बसे कई इलाकों में प्रशासन और ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है।

नेपाल की बारिश से बढ़ा खतरा

बिहार में इस साल अब तक सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद नदियों का बढ़ना कई सवाल खड़े करता है। इसकी बड़ी वजह नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही बारिश को माना जा रहा है।

नेपाल में भारी बारिश होने पर वहां से निकलने वाली नदियों और जलधाराओं में अचानक पानी बढ़ सकता है। इसका सीधा असर उत्तर बिहार के जिलों पर पड़ता है। इसी वजह से बिहार में बारिश कम होने के बावजूद कई नदियों में उफान की स्थिति बन गई है।

मौसम और नदी के जलस्तर में बदलाव को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। नेपाल में बारिश बढ़ने की स्थिति में बिहार की नदियों का जलस्तर अचानक और ऊपर जा सकता है।

प्रशासन अलर्ट, लोगों से सावधानी की अपील

बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। नदी किनारे रहने वाले लोगों से कहा जा रहा है कि वे जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।

लोगों को विशेष रूप से बच्चों को नदी और जलजमाव वाले क्षेत्रों से दूर रखने की सलाह दी गई है। ग्रामीण इलाकों में नाव और अन्य राहत संसाधनों की उपलब्धता पर भी नजर रखी जा रही है।

बाढ़ की स्थिति में सबसे बड़ा खतरा अचानक पानी बढ़ने और कटाव का होता है। इसलिए नदी के किनारे कमजोर तटबंध या कटाव वाले क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।

अभी खतरा टला नहीं

फिलहाल बिहार की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर चिंता पैदा करने वाला है। कुछ स्थानों पर पानी घटने की संभावना है, लेकिन गंगा समेत कई नदियों में बढ़ोतरी का पूर्वानुमान भी है।

ऐसे में अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश जारी रही तो बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ का संकट और गहरा सकता है।

प्रशासन की तैयारी और स्थानीय लोगों की सतर्कता इस समय सबसे अहम है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय प्रशासन और मौसम विभाग की आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

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नदियों का बढ़ता जलस्तर बिहार के लिए चेतावनी

बिहार में सामान्य से कम बारिश के बावजूद नदियों का बढ़ता जलस्तर एक महत्वपूर्ण संकेत है। इसका सीधा मतलब है कि बाढ़ का खतरा केवल स्थानीय बारिश पर निर्भर नहीं करता। नेपाल और पड़ोसी क्षेत्रों में होने वाली बारिश भी बिहार की नदियों के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है।

गंगा, गंडक, बागमती और घाघरा जैसी नदियों के किनारे बड़ी आबादी रहती है। इसलिए जलस्तर में मामूली वृद्धि भी कई गांवों और दियारा क्षेत्रों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।

इस समय सबसे जरूरी है कि प्रशासन संभावित प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव की तैयारी पहले से मजबूत रखे। सुरक्षित स्थानों की पहचान, नावों की उपलब्धता और जरूरी दवाओं एवं खाद्य सामग्री की व्यवस्था समय रहते होनी चाहिए।

वहीं आम लोगों को भी सावधानी बरतनी होगी। बाढ़ के पानी को सामान्य समझकर उसमें प्रवेश करना या बच्चों को नदी के आसपास जाने देना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।

अभी स्थिति को भयावह बताना जल्दबाजी होगी, लेकिन बढ़ते जलस्तर को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं होगा। अगले कुछ दिनों में नदियों का रुख ही तय करेगा कि बिहार में बाढ़ का संकट कितना गंभीर होता है।

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