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“शहनाई की जगह गूंज उठी सिसकियां, सेहरे से पहले उठी चांद बाबू की अर्थी; बेटे को विदा करते टूट गए मां-बाप”

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | सिंघिया प्रखंड के बलहा गांव निवासी 30 वर्षीय चांद बाबू की सड़क हादसे में मौत हो गई। शादी की तैयारियों के बीच उनकी अर्थी उठी तो गांव का माहौल गमगीन हो गया।

सिंघिया, 21 अगस्त। आलम की खबर: जिस घर में कुछ ही दिनों बाद शादी की खुशियां दस्तक देने वाली थीं, वहां आज मातम पसरा था। जिस बेटे के सिर पर सेहरा सजने की तैयारी थी, उसी बेटे की अर्थी जब घर से निकली तो गांव की गलियां सिसक उठीं। हर तरफ आंखों में आंसू थे, चेहरों पर खामोशी थी और दिल में एक ही सवाल—जिस बेटे को मां-बाप ने पूरी जिंदगी के सपनों के साथ बड़ा किया, वह इतनी जल्दी उन्हें छोड़कर कैसे चला गया?
सिंघिया प्रखंड के बलहा गांव निवासी मोहम्मद हुसैन उर्फ मुन्ना भाई और Alam Ki Khabar के संपादक मोहम्मद आलम के भतीजे 30 वर्षीय चांद बाबू की सड़क हादसे में हुई मौत ने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। 19 अगस्त को सहरसा से अपने घर लौटने के दौरान हुए सड़क हादसे में चांद बाबू की मौत हो गई थी। आज जब उन्हें मिट्टी दी गई तो अंतिम यात्रा में शामिल हर शख्स की आंखें नम थीं।
जिस घर में शादी की तैयारी होनी थी, वहां मातम छा गया
चांद बाबू अभी महज 30 वर्ष के थे। जिंदगी उनके सामने थी। परिवार ने उनके विवाह के लिए बातचीत लगभग तय कर ली थी। घर में शादी को लेकर उम्मीदें थीं, रिश्तेदारों के आने-जाने की बातें थीं और भविष्य को लेकर कई सपने बुने जा रहे थे।
लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था।
19 अगस्त को सहरसा से घर लौटते समय सड़क हादसे ने परिवार की सारी खुशियां एक झटके में छीन लीं। जिस रास्ते से चांद बाबू अपने घर लौट रहे थे, उसी सफर ने उनकी जिंदगी का सफर हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
परिवार को जब हादसे की खबर मिली होगी, उस पल पर क्या गुजरी होगी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। जिस बेटे के घर लौटने का इंतजार था, उसके हादसे का समाचार लेकर लोग पहुंचे। घर में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते खुशियों की जगह मातम ने ले ली।
आज उठी अर्थी तो हर आंख हो गई नम
शुक्रवार को जब चांद बाबू की अंतिम यात्रा निकली तो बलहा गांव का माहौल बेहद गमगीन था। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों के कदम आगे बढ़ रहे थे, लेकिन दिल जैसे वहीं ठहर गया था।
किसी की आंखों में आंसू थे तो कोई अपने आंसुओं को रोकने की कोशिश कर रहा था। कई लोगों की आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे। चांद बाबू को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
अंतिम यात्रा का वह दृश्य हर किसी को अंदर तक झकझोर रहा था। कुछ लोग खामोश थे, कुछ फूट-फूटकर रो रहे थे और कुछ लोग बस दूर खड़े होकर उस अर्थी को देखते रह गए, जिस पर वह युवक जा रहा था जिसके लिए कभी सेहरा सजना था।
मां-बाप पर क्या बीत रही होगी, अंदाजा लगाना मुश्किल
किसी मां-बाप के लिए इससे बड़ा दुख शायद ही कोई हो कि जिस बेटे को उन्होंने अपनी आंखों के सामने बड़ा किया, उसकी अर्थी को अपने सामने जाते देखें।
चांद बाबू के माता-पिता की स्थिति का अंदाजा उस अंतिम यात्रा के माहौल से ही लगाया जा सकता था। उनके लिए यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी को बदल देने वाला ऐसा सदमा है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकती।
जिस बेटे से घर की रौनक थी, जिसके भविष्य को लेकर परिवार ने सपने देखे थे, वही बेटा आज मिट्टी के नीचे सो गया।
मां-बाप की आंखों में बेटे के साथ बिताए हर पल की तस्वीरें तैर रही होंगी। कभी बचपन, कभी उसकी हंसी, कभी घर लौटने की खुशी और अब उसी बेटे की अंतिम विदाई—इन यादों का बोझ कितना भारी होगा, इसे शब्दों में बयान करना आसान नहीं है।
शादी की बातें तय थीं, लेकिन किस्मत ने सब छीन लिया
चांद बाबू की शादी को लेकर परिवार में बातचीत चल रही थी। रिश्ते की बातें तय हो चुकी थीं और परिवार भविष्य की खुशियों की तैयारी में था। लेकिन शादी के मंडप तक पहुंचने से पहले ही चांद बाबू की जिंदगी का सफर खत्म हो गया।
जिस युवक के सिर पर सेहरा देखने की तैयारी थी, उसी के सिर पर आज कफन था।
यह सोचकर ही गांव के लोगों की आंखें भर आईं कि कुछ दिन बाद जिस घर से शादी के गीत सुनाई देने वाले थे, वहां अब मातम की आवाजें गूंज रही हैं।
हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया
चांद बाबू की मौत की खबर जैसे-जैसे आसपास के इलाकों में पहुंची, लोग स्तब्ध रह गए। परिचितों और रिश्तेदारों के लिए यह खबर यकीन करना मुश्किल था।
कई लोगों ने शायद आखिरी बार उनसे बात करने, मिलने या उन्हें घर लौटते देखने की उम्मीद की होगी। लेकिन एक सड़क हादसे ने उन सभी उम्मीदों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
सड़क हादसे सिर्फ एक व्यक्ति की जान नहीं लेते, वे पीछे रह गए परिवार के जीवन को भी बदल देते हैं। एक घर का बेटा चला जाता है, किसी मां की गोद सूनी हो जाती है, किसी पिता का सहारा छिन जाता है और परिवार के भविष्य की पूरी तस्वीर बदल जाती है।
चांद बाबू की मौत भी इसी दर्द की एक कहानी है।
अंतिम विदाई में हर आंख ने कहा—अलविदा चांद
आज जब चांद बाबू को मिट्टी दी गई तो शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि इतनी कम उम्र में उन्हें इस तरह विदा करना पड़ेगा।
अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति की आंखें मानो यही कह रही थीं कि चांद बाबू, तुम्हें अभी जाना नहीं था।
तुम्हारी उम्र तो जिंदगी की नई शुरुआत की थी। तुम्हारे घर में शादी की तैयारी होनी थी। मां-बाप के चेहरे पर खुशी होनी थी। रिश्तेदार जुटने थे। दोस्तों के बीच खुशियां बांटी जानी थीं।
लेकिन आज वही लोग तुम्हें आखिरी बार मिट्टी देने पहुंचे।
यह विदाई सिर्फ एक युवक की विदाई नहीं थी। यह उन तमाम सपनों की विदाई थी, जिन्हें चांद बाबू और उनके परिवार ने मिलकर देखा था।
अब यादों में रहेंगे चांद बाबू
चांद बाबू अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन परिवार और परिचितों की यादों में उनकी मौजूदगी हमेशा बनी रहेगी। उनकी बातें, उनका व्यवहार, उनकी मुस्कान और उनसे जुड़ी छोटी-छोटी यादें अब परिवार के लिए सबसे बड़ी धरोहर हैं।
समय बीत जाएगा, लोग अपने-अपने जीवन में लौट जाएंगे, लेकिन मां-बाप के लिए बेटे की कमी शायद कभी पूरी नहीं होगी।
आज बलहा गांव ने एक बेटे को मिट्टी के हवाले किया है, लेकिन एक परिवार ने अपनी जिंदगी का एक ऐसा हिस्सा खो दिया है जिसे कोई वापस नहीं ला सकता।
एक अर्थी ने छीन ली शादी की सारी खुशियां
कभी-कभी जिंदगी इतनी निर्मम करवट लेती है कि इंसान के पास शब्द ही नहीं बचते। चांद बाबू के परिवार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। घर में शादी की चर्चा थी। भविष्य के सपने थे। एक युवक की जिंदगी के नए अध्याय की तैयारी हो रही थी।
लेकिन अचानक एक सड़क हादसा आया और सारी कहानी बदल गई।
आज जिस घर में शादी की तैयारी होनी थी, वहां सन्नाटा है। जिस मां को बेटे के सिर पर सेहरा देखना था, उसकी आंखों के सामने बेटे की अर्थी थी। जिस पिता को बेटे की शादी में मेहमानों का स्वागत करना था, उसे बेटे को अंतिम विदाई देनी पड़ी।
इस दर्द को कोई खबर पूरी तरह शब्दों में नहीं उतार सकती।
चांद बाबू की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ और लोगों की नम आंखें इस बात की गवाही दे रही थीं कि उन्होंने अपने पीछे सिर्फ परिवार नहीं, बल्कि एक पूरा सामाजिक रिश्ता छोड़ा है।
एक सड़क हादसा केवल सड़क पर घटने वाली घटना नहीं होती। उसके बाद कई जिंदगियां हमेशा के लिए बदल जाती हैं। चांद बाबू के परिवार का दर्द भी यही बताता है कि सड़क पर एक छोटी-सी लापरवाही कितने बड़े दुख में बदल सकती है।
आज बलहा गांव की मिट्टी में चांद बाबू सो गए, लेकिन उनके परिवार की आंखों में उनकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।अल्लाह चांद बाबू की मगफिरत फरमाए और उनके मां-बाप व पूरे परिवार को सब्र-ए-जमील अता करे।(आमीन)

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