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Muzaffarpur News: बेलसंड विधायक अमित रानू पर गिरफ्तारी का शिकंजा, 25 केसों में 8 में नामजद

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | मुजफ्फरपुर में जमीन विवाद और तोड़फोड़ के मामलों में बेलसंड विधायक अमित रानू की मुश्किलें बढ़ीं, 25 केस दर्ज, 8 में नामजद, गिरफ्तारी वारंट की तैयारी।

डेस्क, मुजफ्फरपुर, 26 अगस्त।मुजफ्फरपुर में जमीन विवाद से शुरू हुआ मामला अब राजनीतिक और पुलिस कार्रवाई के बड़े केंद्र में बदलता दिखाई दे रहा है। सीतामढ़ी जिले की बेलसंड विधानसभा सीट से लोजपा (रामविलास) के विधायक अमित कुमार रानू और उनके भाई सोनू सिंह के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जमीन पर कथित कब्जे, तोड़फोड़, रंगदारी और जालसाजी से जुड़े मामलों की जांच में कई अहम साक्ष्य सामने आए हैं। अब दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

अहियापुर थाना क्षेत्र के झपहां-उदनडीह इलाके में जमीन विवाद के दौरान निर्माणाधीन मकानों और चहारदीवारी को जेसीबी से क्षतिग्रस्त किए जाने के बाद विवाद ने तूल पकड़ा था। इसके बाद एक के बाद एक शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं और अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज होने लगीं। पुलिस के अनुसार अब इस पूरे प्रकरण से जुड़े मामलों की संख्या 25 तक पहुंच चुकी है। इनमें आठ मामलों में विधायक अमित कुमार रानू और उनके भाई सोनू सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया है।

जेसीबी से तोड़फोड़ के बाद बढ़ी कार्रवाई

पुलिस जांच का मुख्य केंद्र झपहां-उदनडीह में हुई तोड़फोड़ की घटना है। पुलिस का कहना है कि इस घटना से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मौके पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे और जेसीबी की मदद से मकान तथा बाउंड्री को नुकसान पहुंचाया गया।

जांच में विधायक के भाई सोनू सिंह की भूमिका भी सामने आने का पुलिस ने दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, घटना के दौरान पार्टी का झंडा लगी गाड़ी मौके पर पहुंची थी। इसके बाद पीड़ित पक्ष की शिकायत और उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।

पुलिस अब घटना में शामिल लोगों की पहचान वीडियो फुटेज और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कर रही है। इस मामले में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही की जा चुकी है।

विधायक के ठिकानों पर हुई थी छापेमारी

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 23 अगस्त को विधायक अमित रानू के मुजफ्फरपुर स्थित आवास और सीतामढ़ी में उनके कार्यालय से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली थी। कार्रवाई अदालत से प्राप्त सर्च वारंट के आधार पर की गई थी।

पुलिस के मुताबिक, तलाशी के दौरान जमीन और कारोबारी गतिविधियों से संबंधित दस्तावेज मिले। सीतामढ़ी स्थित कार्यालय की तलाशी के दौरान हथियार और कारतूस बरामद होने की भी पुलिस ने जानकारी दी है। इस कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात भी सामने आई थी।

पुलिस का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच की जा रही है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि जमीन से जुड़े विवादों और आरोपितों के बीच क्या संबंध हैं।

25 केस, 8 में विधायक और भाई नामजद

मुजफ्फरपुर पुलिस के अनुसार इस पूरे प्रकरण में मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी में कुल 25 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। इनमें आठ मामलों में अमित कुमार रानू और उनके भाई अभिनव उर्फ सोनू सिंह नामजद आरोपी हैं।

पुलिस की जांच केवल मौजूदा जमीन विवाद तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने विधायक के खिलाफ सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर थाने में पहले से दर्ज मामलों की जानकारी भी जुटानी शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, पुराने मामले रंगदारी, जबरन वसूली और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं से जुड़े हैं।

हालांकि, किसी भी मामले में आरोप साबित होना अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल पुलिस की ओर से सामने रखे गए आरोप और साक्ष्य जांच का हिस्सा हैं।

सरकारी काम में बाधा का भी केस

पुलिस कार्रवाई के दौरान सरकारी काम में बाधा और पुलिस के साथ कथित अभद्र व्यवहार को लेकर भी अलग प्राथमिकी दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि विधायक के आवास पर हुई कार्रवाई और बाद में उनके भाई की तलाश के दौरान भी ऐसी स्थिति बनी, जिसके बाद अलग से कानूनी कार्रवाई की गई।

पुलिस अब सभी प्राथमिकी, वीडियो फुटेज, बरामद दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों को केस डायरी में शामिल कर रही है। इसी आधार पर अदालत के समक्ष गिरफ्तारी वारंट के लिए आवेदन देने की तैयारी की जा रही है। ताजा पुलिस बयान के मुताबिक, वारंट मिलने के बाद विधायक और उनके भाई के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।

संपत्ति की जांच भी जांच के दायरे में

मामले में पुलिस अब आरोपितों की संपत्ति और आर्थिक गतिविधियों से संबंधित जानकारी भी जुटाने की तैयारी में है। पुलिस सूत्रों के अनुसार आर्थिक अपराध इकाई से संपत्तियों की जांच कराने के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि जमीन से जुड़े मामलों में किसी तरह का आर्थिक लेनदेन हुआ था या नहीं। बैंक खातों, संपत्ति के दस्तावेज और दूसरे वित्तीय रिकॉर्ड जांच का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।

विधायक ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

दूसरी तरफ विधायक अमित कुमार रानू ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ कार्रवाई बिना पर्याप्त साक्ष्य के की जा रही है। ऐसे में अब पुलिस के आरोपों और विधायक के पक्ष के बीच पूरा मामला अदालत की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा।

फिलहाल मुजफ्फरपुर पुलिस की अगली बड़ी कार्रवाई अदालत से मिलने वाले आदेश पर निर्भर है। अगर गिरफ्तारी वारंट जारी होता है तो विधायक अमित रानू और उनके भाई सोनू सिंह की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। वहीं, पूरे मामले में अदालत के सामने पेश किए जाने वाले दस्तावेज और वीडियो साक्ष्य जांच की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जमीन विवाद से जुड़े 25 मामलों, नामजद आरोपियों, कथित तोड़फोड़, रंगदारी और बरामद सामग्री की अलग-अलग कड़ियों को जोड़कर पुलिस आगे की कार्रवाई की तैयारी में है।

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कार्रवाई और आरोपों के बीच अब अदालत की भूमिका अहम

मुजफ्फरपुर का यह मामला केवल एक जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। कई प्राथमिकी दर्ज होने और एक जनप्रतिनिधि का नाम सामने आने के बाद इसकी गंभीरता बढ़ गई है। पुलिस ने जांच के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाने की बात कही है, जबकि विधायक ने खुद को साजिश का शिकार बताया है।

ऐसे मामलों में सबसे जरूरी बात यह है कि आरोप और अपराध सिद्ध होने के बीच का फर्क स्पष्ट रखा जाए। पुलिस के पास मौजूद साक्ष्यों की जांच अदालत में होगी और उसी के आधार पर आगे की कानूनी स्थिति तय होगी। गिरफ्तारी की प्रक्रिया भी न्यायालय के आदेश और कानून के तहत ही आगे बढ़ेगी।

इस मामले में अब सबकी नजर पुलिस की ओर से अदालत में दाखिल की जाने वाली केस डायरी और साक्ष्यों पर है। यदि अदालत से वारंट जारी होता है तो यह प्रकरण एक नए चरण में प्रवेश करेगा। वहीं, जांच के दौरान यदि किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते हैं तो कानून के मुताबिक उसका भी संज्ञान लिया जाना चाहिए। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण है कि जांच निष्पक्ष रहे और जमीन विवाद से जुड़े सभी पक्षों को कानून के अनुसार न्याय मिले।

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