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Samastipur News: बाढ़ के खतरे को देखते हुए समस्तीपुर रेल मंडल में ट्रैक और पुलों की निगरानी बढ़ी, पानी बढ़ा तो तुरंत रोकी जाएंगी ट्रेनें

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | नेपाल में बाढ़ के खतरे को देखते हुए समस्तीपुर रेल मंडल में ट्रैक, पुल-पुलिया और जलस्तर की निगरानी बढ़ाई गई है। खतरा बढ़ने पर ट्रेनों का परिचालन तत्काल रोका जाएगा।

समस्तीपुर, 27 अगस्त।नेपाल में बाढ़ की गंभीर स्थिति और वहां से आने वाले पानी के कारण उत्तर बिहार के सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते जलस्तर की आशंका के बीच समस्तीपुर रेल मंडल ने रेलवे ट्रैक और पुल-पुलियों की निगरानी और तेज कर दी है। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी रेलखंड पर पानी का स्तर बढ़ता है या ट्रैक और पुल की सुरक्षा प्रभावित होने की सूचना मिलती है तो ट्रेनों का परिचालन तत्काल नियंत्रित अथवा रोका जा सकता है।

समस्तीपुर रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक ज्योति प्रकाश मिश्रा ने पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण के जिला प्रशासन से समन्वय बनाए रखने को कहा है। नेपाल से आने वाले पानी का असर चंपारण के सीमावर्ती क्षेत्रों में पड़ने की आशंका को देखते हुए रेलवे और जिला प्रशासन के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इंजीनियरिंग विभाग को विशेष सतर्कता

रेल मंडल प्रशासन ने इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। ट्रैकमैन और पुलों की निगरानी में तैनात कर्मचारियों को अपने-अपने क्षेत्र में लगातार गश्त और निरीक्षण करने को कहा गया है।

रेलवे ट्रैक की स्थिति के साथ पुल-पुलियों के आसपास पानी का दबाव, जलस्तर में बदलाव और संभावित कटाव पर विशेष नजर रखी जाएगी। किसी स्थान पर स्थिति सामान्य नहीं मिलने पर इसकी जानकारी तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को देने का निर्देश है।

रेल प्रशासन का मानना है कि बाढ़ के दौरान रेलवे ट्रैक और पुलों की सुरक्षा केवल पानी की ऊंचाई से नहीं, बल्कि पानी के तेज बहाव और उससे होने वाले दबाव से भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए संवेदनशील रेलखंडों की निगरानी को लगातार जारी रखने की तैयारी की गई है।

जिला प्रशासन से लगातार संपर्क

समस्तीपुर रेल मंडल के अधिकारी पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण के प्रशासनिक अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे। इसके अलावा राज्य के बाढ़ नियंत्रण निदेशक से भी जलस्तर और बाढ़ की स्थिति से जुड़ी जानकारी लगातार ली जाएगी।

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश और बाढ़ की स्थिति का असर उत्तर बिहार की नदियों पर पड़ सकता है। ऐसे में रेलवे प्रशासन किसी भी संभावित बदलाव की सूचना समय रहते प्राप्त करने पर जोर दे रहा है।

रेलवे के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह है कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में ट्रैक और पुलों की वास्तविक स्थिति का आकलन जल्द किया जा सके। इसके लिए जमीनी स्तर पर तैनात रेलकर्मियों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है।

सूचना मिलते ही परिचालन पर लगेगा ब्रेक

रेल प्रशासन ने परिचालन से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यदि किसी रेलखंड पर पानी बढ़ने, ट्रैक के कमजोर होने या पुल की सुरक्षा को लेकर खतरे की सूचना मिलती है तो ट्रेनों को आगे बढ़ाने के बजाय तत्काल रोकने अथवा परिचालन नियंत्रित करने का निर्णय लिया जाए।

इस व्यवस्था का सीधा उद्देश्य किसी संभावित दुर्घटना को पहले ही रोकना है। रेलवे प्रशासन के अनुसार यात्रियों की सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। स्थिति सामान्य होने तक संबंधित रेलखंड पर ट्रेनों की गति और परिचालन को आवश्यकता के अनुसार नियंत्रित किया जा सकता है।

हर बदलाव की सूचना ऊपर तक पहुंचाने की व्यवस्था

मंडल स्तर पर जलस्तर और रेलवे परिसंपत्तियों की स्थिति की जानकारी तेजी से अधिकारियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। ट्रैक और पुलों की निगरानी करने वाले कर्मचारी किसी भी असामान्य स्थिति की सूचना तत्काल देंगे।

रेलवे प्रशासन का फोकस इस समय दो स्तरों पर है। पहला, संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी और दूसरा, खतरे का संकेत मिलते ही परिचालन संबंधी निर्णय लेना। इससे संभावित नुकसान को सीमित करने के साथ यात्रियों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

बाढ़ के दौरान रेल परिचालन को सामान्य बनाए रखना रेलवे के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे समय में एक ओर यात्रियों की आवाजाही जारी रखने की जरूरत होती है तो दूसरी ओर ट्रैक और पुलों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होती है। समस्तीपुर रेल मंडल ने इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।

रेल प्रशासन की ओर से रेलकर्मियों को किसी भी स्थिति में लापरवाही नहीं बरतने और लगातार अलर्ट रहने को कहा गया है। जलस्तर में अचानक वृद्धि होने पर तत्काल सूचना देने तथा आवश्यकता पड़ने पर ट्रेन रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

फिलहाल मंडल प्रशासन की नजर नेपाल से आने वाले पानी और चंपारण समेत संवेदनशील क्षेत्रों के जलस्तर पर बनी हुई है। आने वाले समय में यदि पानी का दबाव बढ़ता है तो संबंधित रेलखंडों में परिचालन को सुरक्षा मानकों के अनुसार नियंत्रित किया जा सकता है।

रेलवे का संदेश स्पष्ट है कि बाढ़ की स्थिति में ट्रेनों की रफ्तार से ज्यादा यात्रियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण होगी। किसी भी रेलखंड पर खतरे का संकेत मिलने पर ट्रेन रोकने में देरी नहीं की जाएगी।

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जलस्तर बढ़ा तो रेल परिचालन पर तुरंत लिया जाएगा फैसला

बाढ़ जैसी आपदा में रेलवे की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करना है। समस्तीपुर रेल मंडल ने इस दिशा में निगरानी व्यवस्था मजबूत कर सही कदम उठाया है। ट्रैक और पुलों की स्थिति पर जमीनी स्तर से मिलने वाली सूचना जितनी तेजी से अधिकारियों तक पहुंचेगी, उतनी ही जल्दी जोखिम वाले स्थानों पर परिचालन रोका जा सकेगा।

खासकर नेपाल से आने वाले पानी का असर चंपारण और उत्तर बिहार के कई इलाकों में पड़ सकता है। ऐसे में रेलवे और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। जलस्तर की सूचना केवल प्रशासनिक रिकॉर्ड तक सीमित न रहे, बल्कि उसका सीधा इस्तेमाल रेल परिचालन के फैसले में हो, यह व्यवस्था यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है।

बाढ़ के समय ट्रैक के आसपास जमा पानी से ज्यादा चिंता पुलों पर पानी के दबाव और बहाव की होती है। इसलिए रेलवे कर्मचारियों की लगातार निगरानी और संवेदनशील स्थानों पर तत्काल निरीक्षण दुर्घटना की आशंका को कम कर सकता है।

ट्रेनों को रोकने का फैसला यात्रियों के लिए असुविधाजनक जरूर हो सकता है, लेकिन यदि सामने सुरक्षा का सवाल हो तो परिचालन रोकना ही बेहतर विकल्प है। रेलवे प्रशासन को इसी सतर्कता के साथ आगे बढ़ना होगा।

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