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Bihar Politics: संजय सिंह पर आरोपों से चिराग सख्त, बोले- दोषी हुए तो मंत्री पद ही नहीं, पार्टी से भी बाहर

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | मंत्री संजय सिंह पर लगे आरोपों को लेकर चिराग पासवान ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने पर पद और पार्टी दोनों स्तर पर कार्रवाई होगी।

पटना, 31 अगस्त। बिहार की सियासत में मंत्री संजय सिंह को लेकर उठे विवाद के बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई है। चिराग ने स्पष्ट कहा कि जांच में आरोप सही साबित होते हैं और संबंधित व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह की रियायत नहीं बरती जाएगी।

यह विवाद दिल्ली के एक होटल में युवती के साथ कथित अभद्र व्यवहार से जुड़े आरोपों के बाद सामने आया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। मंत्री संजय सिंह इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं और सबूत सामने रखने की चुनौती भी दे चुके हैं।

चिराग बोले- आरोप गंभीर, जांच जरूरी

चिराग पासवान ने कहा कि किसी व्यक्ति पर इस तरह के गंभीर आरोप लगते हैं तो उसे केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

उन्होंने बताया कि पार्टी ने अपने स्तर पर संबंधित मंत्री से जवाब भी मांगा है। यानी पार्टी नेतृत्व इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और आरोपों की सच्चाई सामने आने तक इसे केवल राजनीतिक विवाद मानकर छोड़ने के पक्ष में नहीं है।

होटल और युवती से भी सामने आए तथ्य

चिराग ने कथित घटना से जुड़े होटल प्रबंधन से भी पूरे मामले की जानकारी सामने लाने की अपील की। उनका कहना है कि घटना से जुड़े तथ्यों को सामने आना चाहिए, ताकि जांच किसी अनुमान या आरोप के आधार पर नहीं बल्कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे बढ़े।

उन्होंने कथित तौर पर पीड़ित युवती से भी अपनी बात सामने रखने की अपील की, ताकि जांच एजेंसियों के सामने पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सके।

दोषी मिले तो पद पर नहीं रहेंगे

चिराग पासवान ने अपने रुख को और स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उनके अनुसार दोषी पाए जाने की स्थिति में केवल मंत्री पद से हटाने तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पार्टी स्तर पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि किसी व्यक्ति को केवल राजनीतिक या व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जाएगा।

परिवार का सदस्य भी हुआ तो कार्रवाई की बात

चिराग ने यह भी संदेश दिया कि गलत काम करने वाले व्यक्ति को केवल इसलिए बचाया नहीं जा सकता कि वह किसी राजनीतिक दल या परिवार से जुड़ा हुआ है।

उनका रुख साफ है कि पहले निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो कानून और पार्टी अनुशासन के मुताबिक कार्रवाई हो।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

मंत्री संजय सिंह से जुड़ा विवाद तेज प्रताप यादव की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद चर्चा में आया। तेज प्रताप ने दिल्ली के एक होटल में युवती के साथ कथित अभद्र व्यवहार और मामले को दबाने की कोशिश से जुड़े आरोप लगाए थे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

संजय सिंह ने आरोपों को खारिज किया है और पूरे विवाद को गलत बताया है। उन्होंने आरोप लगाने वालों से सबूत सामने रखने की मांग की है।

मामले में संजय सिंह की ओर से तेज प्रताप यादव को कानूनी नोटिस भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार नोटिस में आरोपों को मानहानिकारक बताते हुए माफी और पोस्ट हटाने की मांग की गई है।

चिराग के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

मामले पर चिराग पासवान का बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि संजय सिंह उनकी पार्टी से जुड़े हैं और बिहार सरकार में मंत्री हैं।

ऐसे में पार्टी अध्यक्ष का यह कहना कि जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी, इस पूरे विवाद को राजनीतिक रूप से और अहम बना देता है।

हालांकि फिलहाल निर्णायक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। आरोपों को सही या गलत साबित करने का फैसला जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना है।

आरक्षण पर भी चिराग ने रखा पक्ष

इसी दौरान चिराग पासवान ने आरक्षण के मुद्दे पर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आरक्षण से जुड़े अधिकारों को बनाए रखना जरूरी है। साथ ही उन्होंने दूसरे वर्गों की शिकायतों और मांगों को भी सुने जाने की बात कही।

उनका कहना है कि किसी एक वर्ग को उसका अधिकार देने के लिए दूसरे वर्ग के अधिकार को कम नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को सभी पक्षों को बातचीत के लिए बुलाकर उनकी समस्याओं को समझना चाहिए और समाधान निकालना चाहिए।

'एक का हक छीनकर दूसरे को देना मंजूर नहीं'

चिराग ने कहा कि वह अनुसूचित जाति के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे वर्गों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जाए।

उन्होंने सभी वर्गों के नेताओं से अपनी-अपनी मांगों को मजबूती से उठाने की अपील की। साथ ही भरोसा दिलाया कि जिन लोगों को अपने अधिकारों की चिंता है, उनकी बात भी लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जानी चाहिए।

आरक्षण के मुद्दे पर चिराग का संदेश यही रहा कि सामाजिक न्याय के नाम पर किसी दूसरे वर्ग के अधिकार को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

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जांच के नतीजे पर टिकी नजर

मंत्री संजय सिंह से जुड़े विवाद में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और उसके बाद क्या निष्कर्ष सामने आता है।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह जरूरी है कि मामले के सभी पक्षों की बात सुनी जाए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच हो।

चिराग पासवान ने भी अपने बयान में यही रुख सामने रखा है कि आरोप गंभीर हैं, इसलिए उनकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। यदि आरोप साबित होते हैं तो कार्रवाई हो और यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते तो स्थिति भी स्पष्ट हो।

फिलहाल इस पूरे विवाद पर बिहार की राजनीति की नजर बनी हुई है। चिराग पासवान के सख्त बयान ने यह जरूर साफ कर दिया है कि पार्टी नेतृत्व जांच के नतीजे को गंभीरता से लेने के मूड में है।

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